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Me Too Case : पटना में यह क्या हुआ, जो उठ रही बात- कवियों का क्या भरोसा! जानें, हर एक पक्ष

सार

Bihar News : प्रकाशन के 75वें वर्ष के उपलक्ष्य में नई धारा ने पहली बार एक 'साहित्यिक निवास कार्यक्रम' शुरू किया था। इस कार्यक्रम में एक युवा साहित्यकार को एक नामचीन साहित्यकार के 'सत्संग' से कुछ सीखना था। लेकिन, हंगामा मचा है Me Too जैसा।

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Bihar News : nai dhara surajpura residency program literature me too case patna bihar news
इसी कार्यक्रम में शामिल महिला साहित्यकार के आरोपों से मचा है घमासान। - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

शब्दों से खेलते हैं साहित्यकार। शब्दों से ही खेलना सिखाते भी है। कभी-कभी एक मुलाकात काफी होती है। लेकिन, यहां शब्दों से खेलना सिखाने के लिए पटना में पहली बार एक 'साहित्यिक निवास कार्यक्रम' रखा गया था।प्रेमचंदकालीन लेखक राजा राधिकरमण प्रसाद सिंह ने हिंदी साहित्य की जिस महत्वपूर्ण पत्रिका 'नई धारा' को शुरू किया था, उसके प्रकाशन के 75 वर्ष होने पर हिंदी भाषा में शुरू हुई यह पहली राइटर्स रेजिडेंसी (Writers residency) विवादों में आ गई है। देशभर के साहित्यकार पटना और इसमें हुए कथित कांड पर बातें कर रहे हैं। 'अमर उजाला' ने उसकी तह तक जाकर समझा और हर पक्ष को सामने ला रहा है।

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क्या था कार्यक्रम, कहां मचा हंगामा?

राजा राधिका रमण प्रसाद सिंह (1890-1971) साहित्य और बिहार की दृष्टि से बेहद प्रतिष्ठित नाम आज भी हैं। उन्हीं के संरक्षण में नई धारा पत्रिका का प्रकाशन शुरू हुआ था। पत्रिका के 75 वर्ष पूरा होने पर पटना में उनके सूर्पुयूरा हाउस में राइटर्स रेजिडेंसी रखा गया। छह हफ्ते के इस निवास कार्यक्रम की जानकारी खुद इसके लिए चयनित किए गए वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण कल्पित ने भी सोशल मीडिया के जरिए दी थी कि इस दौरान चयनित लेखक अपनी अधूरी पांडुलिपि पूर्ण कर सकते हैं। जहां तक हंगामे की बात है तो जयपुर में रहने वाले कृष्ण कल्पित लंबे समय तक पहले पटना में रहे हैं और इस बार जब वह एक नई भूमिका में आए तो सबकुछ ठीक होते-होते एक हंगामा मच गया। आरोप है कि वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण कल्पित ने अपने संरक्षण में साहित्यिक गतिविधि के लिए दिल्ली से आई युवा रचनाकार के सामने अमर्यादित मांग रख दी। बताया गया कि सूर्यपुरा हाउस के केयटेकर्स के सामने युवा महिला रचनाकार ने आरोप लगाया कि कृष्ण कल्पित ने न केवल अनुचित मांग रखी, बल्कि यह तक कहा कि इसी के सहारे कई महिला रचनाकारों को उन्होंने खड़ा किया है।

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महिला रचनाकार की शिकायत थाने में नहीं
लोग आरोप लगाने वाली महिला रचनाकार का नाम जानना चाह रहे और कुछ तो उनकी तस्वीर-नाम जाहिर कर रहे, लेकिन पत्रकारिता के उच्च मापदंडों का अनुपालन करते हुए 'अमर उजाला' यह जानकारी सामने नहीं ला रहा है। चूंकि आरोप के तत्काल बाद कृष्ण कल्पित पटना से जयपुर रवाना हो गए और कथित तौर पर साहित्यकारों के एक खेमे ने कुछ घटित नहीं होने के आधार पर मामले को थाने तक नहीं जाने दिया, इसलिए पुलिस की भूमिका नहीं आई।
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कृष्ण कल्पित ने आरोप को लेकर क्या कहा
कृष्ण कल्पित के बीच कार्यक्रम से जाने को लोग बाकायदा सोशल मीडिया पर 'बचाकर भगाया जाना' कह रहे हैं और अगर जांच में यह आरोप गलत साबित हो तो उनकी प्रतिष्ठा धूमिल होती, इसलिए 'अमर उजाला' ने उनसे सीधी बात की। वह जयपुर में हैं और उनसे मोबाइल पर बातचीत में पहला सवाल यह था कि क्या महिला रचनाकार का यह आरोप सही है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यह निराधार बात है। तब अगला सवाल जाहिर तौर पर यही था कि आप अचानक छह हफ्ते के निवास कार्यक्रम के बीच से क्यों निकल गए? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कुछ जरूरी काम था, इसलिए अपनी इच्छा से लौट आया। किसी दूसरे की वजह से नहीं लौटा। अंतिम सवाल में हमने पूछा कि क्या इस यह निवास कार्यक्रम पेड था, मतलब इसका शुल्क भी मिलता था तो उन्होंने कहा कि नहीं।


आयोजकों पर सवाल, मगर नहीं मिला जवाब
नई धारा पत्रिका और इस निवास कार्यक्रम का संयोजन साहित्यकार शिवनारायण देखते हैं। पूरे देश के साहित्यकार यह सवाल उठा रहे हैं कि अगर महिला युवा रचनाकार के साथ इस तरह की घटना हुई तो आयोजकों को आगे आकर इसकी भर्त्सना करनी चाहिए। कड़ा रुख अख्तियार करना चाहिए। ऐसे में 'अमर उजाला' ने शिवनारायण से भी बात करने का प्रयास किया। ज्यादातर साहित्यकार उनका मोबाइल बंद होने की जानकारी दे रहे थे, लेकिन जब कॉल किया तो पूरा रिंग हुआ। कॉल नहीं रिसीव होने पर 'जरूरी बात' करने के लिए मैसेज भी किया गया, लेकिन जवाब नहीं मिला।

आयोजकों से 5 सवालों का जवाब चाह रहा साहित्य-समाज

  1. अमर्यादित मांग के आरोप में कितनी सच्चाई है?
  2. घटनास्थल के सीसीटीवी में विवाद का फुटेज है या नहीं?
  3. 15 जुलाई तक चलने वाला कार्यक्रम पहले ही क्यों बंद हुआ?
  4. महिला का आरोप सही है तो आयोजन समिति ने कर्तव्य क्यों नहीं निभाया?
  5. साहित्य जगत में मी टू के इस आरोप को देखकर सबकुछ साफ क्यों नहीं किया गया?
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