Jitan Sahni Murder : मुकेश सहनी की पार्टी हत्याकांड की जांच को नहीं मान रही सही, डीजीपी को लिखकर दी यह बात
Bihar News : वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी के पिता जीतन सहनी की हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य अभियुक्त की गिरफ्तारी दिखा दी, लेकिन अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। सहनी की पार्टी के नेताओं ने डीजीपी से मिलकर पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठा दिए हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख और राज्य के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी के पिता जीतन सहनी की हत्या के मुख्य अभियुक्त को सामने लाए जाने के अगले दिन इस मामले में नया मोड़ आ गया है। जीतन सहनी के भतीजे ने पुलिस महानिदेशक को एक आवेदन और सीसीटीवी फुटेज दिया है, जिसके अनुसार हत्या के पहले 10-12 लोग लाठी-डंडे के साथ उनके घर के पास दिख रहे हैं। मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी के नेताओं ने इस आवेदन के साथ बिहार के डीजीपी आरएस भट्टी से मुलाकात की और कहा कि दरभंगा पुलिस जल्दबाजी में जांच को गलत दिशा में ले जा रही है। अनुसंधान को भटकाने की आशंका जताते हुए लिखा गया है कि पुलिस की ओर से मीडिया को दिया गया बयान और उपलब्ध कराए गए हिसाब के कागजात भ्रम फैलाने के लिए काफी हैं।
सीसीटीवी फुटेज पर भी उठाए सवाल
वीआईपी के राष्ट्रीय महासचिव व रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी ब्रजकिशोर सिंह और राष्ट्रीय प्रवक्ता देव ज्योति के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने मृतक जीतन सहनी के भतीजे पवन सहनी की ओर से लिखे आवेदन पत्र के साथ डीजीपी से मुलाकात की।इस आवेदन में कई सवाल भी उठाए गए हैं। आवेदन में कहा गया है कि अनुसंधान प्रारंभिक अवस्था में है। कई मीडिया में 10 जुलाई की रात्रि का सीसीटीवी फुटेज चलाया जा रहा है, जिसमें बताया जा रहा है कि 10 से 15 लोग घटनास्थल के पास लाठी डंडे के साथ खड़े हैं। तो क्या इनलोगों की पहचान कर इनसे पूछताछ की गई है?
हिसाब का कागज मीडिया में कहां से गया
सवाल उठाया गया है कि हिसाब का जो कागज मीडिया में दिखाया जा रहा है, वह तालाब से बरामद बॉक्स के अंदर से मिला था? अगर हां तो यह किसने दिया और इसका मकसद अनुसंधान को भटकाना तो नहीं है? इसकी जांच होनी चाहिए। अगर यह कागजात बॉक्स के अंदर नहीं थे तो इसका स्रोत बताया जाना चाहिए। आवेदन में कहा गया है कि पुलिस के अनुसार सिर्फ एक अपराधी पकड़ा गया है। अपराध में इस्तेमाल हथियार की भी बरामदगी नहीं हुई है। फिर भी अनुसंधानकर्ता जल्दबाजी में हैं। अभी अन्य सह-अभियुक्त आजाद हैं। उनसे पूछताछ नहीं हुई है। इस एक अपराधी की बातों को मानकर अनुसंधान के निष्कर्ष पर पहुंचना गलत है। पत्र के जरिए मांग की गई है कि अनुसंधान में साक्ष्यों का संकलन किया जाए और जब सारे साक्ष्य जमा हो जाएं, तब उनका विश्लेषण कर निष्कर्ष निकाला जाए। शिष्टमंडल ने इस मामले में किसी षड्यंत्र की आशंका से भी इनकार नहीं किया। शिष्टमंडल ने आग्रह किया है कि अनुसंधान समाप्त होने पर फास्ट ट्रैक कोर्ट से अपराधी को सजा दिलवाई जाए। इस शिष्टमंडल में वीआईपी के प्रदेश अध्यक्ष बाल गोविंद बिंद, उमेश सहनी, सुमित सहनी, प्रभुदत्त बेलदार, सुनीता सहनी, बैद्यनाथ सहनी, पुष्पा सहनी आदि शामिल थे।