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Election 2024 : छह से पांच, फिर तीन, अब अकेले रह जाएंगे पशुपति पारस? एनडीए के टिकट पर अब भी यह विकल्प बाकी

सार

Lok Sabha : पशुपति कुमार पारस को केंद्रीय मंत्री की कुर्सी क्यों मिली और अब चिराग पासवान को ज्यादा तवज्जों क्यों? इन दो सवालों का जवाब पारस समझ नहीं सके। शायद उनके साथ शुरू में रहे चार सांसदों में से दो ने तब समझ लिया था। बाकी दो अब समझ लें शायद।

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Bihar News : lok sabha election 2024 Scope for pashupati paras in chirag paswan ljp NDA Seat Sharing in bihar
एनडीए के सीट बंटवारे को एक बार ठीक से समझना होगा। सब खेला उसी में है। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने सोमवार को बिहार की 40 लोकसभा सीटों के घटक दलों में बंटवारे की घोषणा की और मंगलवार को एक केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा हो गया। शायद इससे ज्यादा बवाल भाजपा के अंदर में नहीं है। अंदर-अंदर यही माना जा रहा है। बाहर समझाने की कोशिश हो रही है, ताकि घर फूटने पर कोई लूटने नहीं चला आए। दरअसल, बिहार की 40 सीटों के बंटवारे के साथ एनडीए के सबसे बड़े दल भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा खेला कर दिया। खेला सीट बंटवारे में सीटों के चयन का है। इस बंटवारे में तीन सांसदों का टिकट कैंसिल करते हुए तीन को वेटिंग में छोड़ दिया गया। वह वेटिंग शायद पशुपति कुमार पारस नहीं समझ सके। बहुत चौंकने वाली बात नहीं होगी कि बाकी दो वेटिंग इस बात को समझ जाएं।

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आज से कल तक हो जाएगा पारस का भविष्य साफ
केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले पशुपति कुमार पारस ने पिछले हफ्ते बिहार में प्रेस से बात की तो अपने लिए हाजीपुर, प्रिंस राज के लिए समस्तीपुर और चंदन सिंह के लिए नवादा की सीट कन्फर्म बताई। मतलब यह साफ कहा कि वह तीनों अपनी सीटों से ही लड़ेंगे। उनकी ही बात अगर एक हद तक आगे सही हो जाए तो अजूबा नहीं। वह आज शाम बिहार आकर लालू यादव और तेजस्वी यादव से मिलने की योजना में हैं। लेकिन, भाजपा भी उन्हें आसानी से जाने नहीं देना चाह रही है। इसके लिए भाजपा ने विकल्प खोल रखे हैं। इसे समझने के लिए 'अमर उजाला' की वह खबर याद कर सकते हैं, जिसमें पशुपति कुमार पारस को उनके गृह जिला खगड़िया से मौका मिलने की बात कही गई थी। बाकी, सोमवार को जब सीटों की घोषणा की गई तो यह सब एनडीए ने देखकर ही घोषित किया। ऐसे में अब सबकुछ पारस पर निर्भर है। वह हाजीपुर की जिद छोड़ खगड़िया से हाथ आजमाएं तो मौका मिल सकता है। भाजपा मान रही है कि अब सिर्फ यही एक रास्ता है कि वह पीएम मोदी के गुड बुक में कायम रह सकते हैं। यही उन्हें समझाया जा रहा है। फैसला आज से कल तक हो जाएगा।
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टिकट कैंसिल करते हुए भी फायदे का गणित बनाया
भाजपा ने शिवहर सीट से रमा देवी को बेटिकट किया। यह सीट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड को देने की घोषणा होते-होते बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह की पत्नी लवली आनंद ने पार्टी ज्वाइन कर ली। मतलब, राजपूतों को मनाने का रास्ता पक्का कर लिया गया। गया सीट जदयू से लेकर हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा-सेक्युलर को देने से भूतपूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को प्रसन्न कर लिया गया। इसी तरह, उपेंद्र कुशवाहा की पसंदीदा सीट काराकाट जदयू से लेकर राष्ट्रीय लोक मोर्चा को दी गई। अब पूर्व केंद्रीय मंत्री कुशवाहा भी इससे खुश हैं। यह है टिकट कैंसिल करने के फायदे की बात।

वेटिंग टिकट का भी जबरदस्त फायदा मिलेगा आगे
भाजपा ने हाजीपुर सीट चिराग पासवान को भले दी, लेकिन लोक जनशक्ति पार्टी की सीट छह से पांच होने के बावजूद खगड़िया सीट उससे नहीं छीनी। यह सीट एक तरह से पशुपति पारस को ध्यान में रखकर छोड़ी गई है। नवादा सीट लोजपा से ली गई, वहां से बाहुबली सूरजभान सिंह के भाई चंदन सिंह सांसद हैं। चंदन सिंह अगड़ी जाति से हैं, इसलिए वह चिराग पासवान की छोड़ी जमुई सीट पर नहीं जा सकते। उन्हें सोचना पड़ेगा। वैसे, उनके लिए भी शायद चिराग पासवान के साथ जाने का फैसला लेना बहुत मुश्किल नहीं। चिराग के पास वैशाली सीट भी है, हालांकि वहां की सांसद वीणा देवी की दावेदारी तो है ही। उधर, दिवंगत रामविलास पासवान के भतीजे प्रिंस राज को सोचना नहीं पड़ेगा। उनकी समस्तीपुर सीट को चिराग पासवान के पास छोड़ा गया है।

पारस को मौका और दस्तूर याद आएगा तो समझेंगे
राम विलास पासवान के निधन के बाद लोक जनशक्ति पार्टी जब टुकड़ों में बंटी थी तो चिराग पासवान अकेले पड़ गए थे और उनके चाचा पशुपति पारस चार सांसदों प्रिंस राज, चंदन सिंह, वीणा देवी और चौधरी महबूब अली कैसर को लेकर अलग हो गए थे। उन्हें भाजपा ने केंद्रीय मंत्री बनाया और चिराग को किनारे छोड़ दिया। चिराग की वापसी नहीं हो पा रही थी। 2020 के चुनाव में एनडीए के घटक जदयू को नुकसान पहुंचाने के कारण चिराग पासवान सीएम नीतीश कुमार के निशाने पर थे। जब चिराग की वापसी के संकेत मिले तो वीणा देवी और फिर कैसर ने चिराग के प्रति आस्था जता दी। ऐसे में बाकी दो की आस्था और विश्वास का पता आज से कल तक चल जाएगा। पता चल जाएगा कि पारस अकेले गए या यह सब देख वापसी का फैसला लेने को मजबूर हुए।

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