Election 2024 : उपेंद्र कुशवाहा ने सीएम नीतीश कुमार को दे दिया खुला ऑफर, एनडीए के घटक दलों में उठापटक
NDA Crisis : एनडीए में सीटों का बंटवारा हो गया, लेकिन अब एक नया बखेड़ा तोड़-फोड़ के कारण शुरू हो गया है। महज एक लोकसभा सीट से संतोष करने वाले उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी में तोड़फोड़ देख सीएम नीतीश की पार्टी को
कुटिल शब्दों में बड़ा ऑफर किया है।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा हत्थे से उखड़ गए हैं। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से शांत रहने की अपील करते हुए खुद ही अपने गुस्से का इजहार करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड को बड़ा ऑफर कर दिया है। कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि अगर जदयू को लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की कमी पड़ रही है तो आकर उनकी पार्टी से ले जाए। कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर लिखा है- "जदयू के लोगों से आग्रह है कि कुछ और उम्मीदवार की जरूरत हो तो बताइएगा, प्लीज़।"
एक सीट पाकर भी चुप रहे, मगर अब लिखा
कुशवाहा को लोकसभा के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में एक ही सीट मिली, जबकि जदयू को 16 सीटें मिली हैं। इसके बावजूद वह शांत थे, लेकिन अब उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके पूर्व विधायक के सपत्नी जदयू में मिलन समारोह कर उन्हें लोकसभा चुनाव में उतारने की जानकारी पर कुशवाहा ने यह गुस्सा दिखाया है। शनिवार को विजय लक्ष्मी कुशवाहा सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में औपचारिक रूप से जुड़ गईं। उनके पति रमेश कुशवाहा देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद से पहचाने जाने वाले सीवान में जीरादेई से विधायक रह चुके हैं। वह कुशवाहा की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे। शनिवार को रमेश कुशवाहा ने अपनी पत्नी विजय लक्ष्मी कुशवाहा को आगे करते हुए जदयू की सदस्यता ग्रहण की और एनडीए को बिहार की 40 में से 40 सीटों पर जिताने का आह्वान किया। इसी पर कुशवाहा ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। दरअसल, कुशवाहा को बांटने के लिए सीट नहीं मिली, जबकि माना जा रहा है कि जदयू विजय लक्ष्मी कुशवाहा को सीवान से लोकसभा का टिकट दे रहा है।
बच्चन की पंक्तियों के साथ कटाक्ष भी किया
कुशवाहा लोकसभा में एक सीट मिलने पर भी चुप थे, लेकिन शनिवार को अपनी पार्टी से एक टूट के बाद उन्होंने लिखा- "राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा किसी अन्य पार्टी में शामिल हो जाने पर आक्रोशित मित्र कृपया हरिवंश राय बच्चन साहब की निम्नलिखित पंक्तियों का स्मरण करें --
जो बीत गई सो बात गई
मधुवन की छाती को देखो
सूखी कितनी इसकी कलियां मुरझाई
कितनी वल्लरियां जो मुरझाई
फिर कहां खिलीं पर बोलो
सूखे फूलों पर कब मधुवन शोर मचाता है
जो बीत गई सो बात गई "
वैसे जदयू के लोगों से आग्रह है कि कुछ और उम्मीदवार की जरूरत हो तो बताइएगा, प्लीज़।"