Bihar Election 2025 : तेजस्वी यादव ने अंग्रेजी में लिखी चिट्ठी, देश के 35 बड़े नेताओं को लिखे पत्र में है क्या?
Bihar News : तेजस्वी यादव ने इस बार अंग्रेजी में चिट्ठी लिखी है, ताकि कांग्रेस और दक्षिण भारतीय राज्यों के दलों के नेता भी इसे पढ़-समझ सकें। यह चिट्ठी 35 दिग्गजों को भेजी गई है, जिसमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मल्लिकार्जुन खरगे, ममता बनर्जी आदि प्रमुख हैं।
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बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अब चिट्ठियों के जरिए देशव्यापी पहुंच बनाने की कोशिश शुरू की है। उन्होंने देशभर के 35 दिग्गज नेताओं को अंग्रेजी में चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी भारत निर्वाचन आयोग की ओर से बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ है। तेजस्वी यादव लगातार इसे गरीब और अनपढ़ मतदाताओं का नाम हटाने की साजिश बता रहे हैं और चूंकि आयोग बिहार के बाद इसे बाकी राज्यों में कराने की तैयारी में है तो तेजस्वी ने यह पत्र राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, मल्लिकार्जुन खरगे समेत देश के तमाम विपक्षी नेताओं को भेजी है।
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नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पत्र में लिखा है कि यह पत्र मैं आपको गहरी पीड़ा के साथ लिख रहा हूँ। उन्होंने आगे लिखा है कि भाजपा सरकार के इशारे पर चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची पुनरीक्षण की आड़ में मतदान के अधिकार एवं लोकतंत्र पर हमला कर रहा है। इसलिए हम सब मिलकर इस प्रक्रिया का तब तक विरोध करेंगे जब तक यह पारदर्शी एवं समावेशी ना हो। भारत का चुनाव आयोग (ECI) जैसी 'स्वतंत्र संस्था' किस तरह हमारी चुनावी प्रक्रिया की अखंडता में जनता के विश्वास को खत्म करने पर अड़ी हुई है। इस देश का हर व्यक्ति, चाहे उसकी पृष्ठभूमि या स्थिति कुछ भी हो, अपने वोट पर गर्व करता है। देश के शासन में भागीदारी करने की क्षमता अत्यंत सशक्त बनाती है।
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नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पत्र में आगे लिखा है कि अब लाखों मतदाताओं को, बिना किसी गलती के वंचित और अपमानित किया जा रहा है। 16 जुलाई 2025 के चुनाव आयोग के प्रेस नोटों के अनुसार लगभग 4.5% आबादी "अपने पते पर मतदाता नहीं मिलने" के नाम पर पहले ही मतदान से वंचित हो चुकी है। यह उन 4% उन लोगों के अतिरिक्त है जो "संभवतः" मर चुके हैं या स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए हैं। इन आँकड़ों के आधार पर, ज़मीनी पत्रकार और इस प्रक्रिया पर नज़दीकी से नज़र रख रहे राजनीतिक वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मताधिकार से वंचित लोगों की संख्या 12% से 15% तक है। यह हमारे देश के इतिहास में अभूतपूर्व है।