Bihar Election 2025 : तेजस्वी यादव के राजद में 'भूरा बाल' का हाल देखें; बिहार चुनाव के लिए क्या रहेगी योजना?
RJD Party : कभी लालू यादव ने 'भूरा बाल साफ करो' का नारा दिया था। अब जैसे ही उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से जगदानंद सिंह का नाम हटा, यह नारा फिर चर्चा में है। शायद इसलिए उन्होंने जगदा बाबू के लिए कुछ बड़े प्लान की चर्चा छेड़ी।
विस्तार
देश में जातीय जनगणना होगी- यह पक्का हो चुका है। बिहार में हो चुकी है। अब बिहार में चुनाव होने वाला है तो 'जाति' की बात अब पूरे जोर-शोर से होगी। होनी शुरू भी हो चुकी है। पटना में जहां भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाईटेड और राष्ट्रीय जनता दल का कार्यालय है; उसी बीच मिलर हाई स्कूल के ग्राउंड पर विभिन्न जातियों के 'अधिकार सम्मेलन' का दौर चल रहा है। इस बीच लालू प्रसाद यादव की पार्टी- राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष पद से अगड़ी जाति के चेहरे जगदानंद सिंह की विदाई हो गई। नए प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को पदभार देने के लिए भी जगदानंद सिंह राज्य परिषद् की बैठक में नहीं थे। मंच पर लालू ने दलित, पिछड़े, गरीब, किसान से लेकर तेजस्वी यादव की ताजपोशी तक की बात की, लेकिन मंच की तस्वीर ने तेजस्वी यादव के राजद में 'भूरा बाल' की हालत दिखा दी।
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लालू का दिया नारा आखिर क्यों याद आया?
गुरुवार को जब पटना के ज्ञान भवन में राजद के राज्य परिषद् की बैठक में नए प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल के नाम की औपचारिक घोषणा की गई तो राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने बिहार के पूर्व अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बारे में इतना ही कहा कि "धन्यवाद देते हैं, अच्छा काम किया, पार्टी को बढ़ाया था।" मंच पर कही इन बातों से अलग मीडिया के सामने यह बात आई कि उन्हें कोई बड़ा पद दिया जा सकता है। यह बात खूब उछाली भी गई। लेकिन, मंच से ऐसा कोई एलान नहीं होने के कारण और मंच की तस्वीर देखकर वहां मौजूद अगड़ी जाति के गिने-चुने नेताओं को झेंपते हुए भी देखा गया। सभा में कहने को लालू-राबड़ी दौर के खेल मंत्री अशोक सिंह, राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई विधान पार्षद सुनील कुमार सिंह, जगदानंद सिंह के सांसद बेटे सुधाकर सिंह जैसे कुछ नेता थे, लेकिन मंच पर यह गुमनाम जैसे ही थे। वैसे, लालू ने पूर्व केंद्रीय मंत्री कांति सिंह का नाम लिया। मंच पर आगे की कतार में मौजूद नेताओं, यानी राजद के चेहरों में 'भूरा बाल' का गायब होना ज्ञान भवन में भी चर्चा का विषय बना गया। दरअसल, कभी लालू ने पिछड़े वर्ग की राजनीति के लिहाज से 'भूरा बाल साफ करो' का नारा दिया था। भू, मतलब भूमिहार। रा, मतलब राजपूत। बा, मतलब ब्राह्मण। ल, मतलब लाला यानी कायस्थ।
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भूरा बाल में 'भू' और 'ल' तो पहले ही नदारद हैं
लालू प्रसाद यादव जब खुद मुख्यमंत्री थे तो भले ही 'भूरा बाल साफ करो' का नारा देने के कारण चर्चित रहे थे, लेकिन अपने आसपास अभी की तरह ही भारतीय प्रशासनिक सेवा के कायस्थ अधिकारी ही रखते थे। अभी नीतीश कुमार सरकार में भी ज्यादातर अहम पदों पर कायस्थ अधिकारी हैं। जहां तक भूमिहार का सवाल है तो बिहार में भाजपा ने एक उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को भी इस जाति से दे रखा है। दूसरी तरफ राजद में भूमिहार चेहरा ढूंढ़ते रह जाएंगे। दोनों ही जाति के नेता या तो राजद में हैं नहीं, या सीन से बाहर हैं। राजपूत में भी जगदानंद सिंह का बड़ा नाम था, जो अब किनारे लग चुके हैं। राजद के बड़े नामों को देखें तो खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव हैं और उनके बेटे तेजस्वी यादव बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता के साथ-साथ अब राजद के नीति-निर्धारक भी हैं। दोनों यादव हैं। परिवार से हैं। उसके बाद ताकतवर स्थिति में राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी का नाम रखा जा सकता है। यह अल्पसंख्यक वर्ग से हैं। प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल धानुक जाति से और अति पिछड़ा वर्ग से हैं।
भूरा बाल में 'रा' और 'बा' की हालत भी समझ लें
लोकसभा चुनाव की तरह ही बिहार विधानसभा चुनाव में भी राजद के पास दिखाने के लिए अगड़ा चेहरा राज्यसभा सांसद मनोज झा ही होंगे। ब्राह्मण मनोज झा राजद में दिखने वाले अगड़ा चेहरा हैं। कहने को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी भी पार्टी में बड़े ओहदे पर हैं, लेकिन मौजूदा हालत में एक किनारे ही हैं। ब्राह्मण के नाम पर इन्हें फिर भी जोड़ा जाना चाहिए। इधर, राजपूतों पर आएं तो राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई सुनील कुमार सिंह विधान पार्षद और राजद के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष हैं। वह मंच पर थे, हालांकि पीछे की कतार में। बाकी, राजद के दिखने वाले चेहरों में प्रवक्ताओं की बात भी करें तो मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव हैं। प्रवक्ताओं में चितरंजन गगन और मृत्युंजय तिवारी ब्राह्मण हैं।
गुरुवार को राजद की राज्य परिषद् की बैठक में नए प्रदेश अध्यक्ष का औपचारिक एलान हुआ। इसमें मंच पर क्या नजर आया, यह पढ़ चुके हैं। आगे इसकी प्रेस विज्ञप्ति में शामिल नाम को देखें तो भी इस बात की तसदीक साफ-साफ हो जाती है कि तेजस्वी यादव को बिहार चुनाव में 'भूरा बाल' को लेकर फैसला करना होगा कि साथ लेकर चलना है या किनारे रखकर। विज्ञप्ति में लिखा गया- "बैठक को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व राजद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, राष्ट्रीय प्रधान महासचिव व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल बारी सिद्दीकी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामचन्द्र पूर्वे, पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांति सिंह, पूर्व मंत्री अनिता देवी, सांसद अभय कुशवाहा ने भी संबोधित किया। पूर्व मंत्री शिवचन्द्र राम ने धन्यवाद ज्ञापित किया। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव द्वारा राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के मनोनयन एवं राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार सिंह ने राज्य कार्यकारिणी के सदस्यों के मनोनयन हेतु पार्टी नेतृत्व को अधिकृत करने सम्बन्धी प्रस्ताव पेश किया। बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी, जय प्रकाश नारायण यादव, सांसद डॉ. मीसा भारती, संजय यादव, सुधाकर सिंह, पूर्व मंत्री आलोक कुमार मेहता, पूर्व मंत्री ललित यादव, शिवचन्द्र राम, डॉ. शमीम, बीनू यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह, भाई बीरेंद्र, प्रदेश के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव, राष्ट्रीय सहायक निर्वाचन पदाधिकारी चित्तरंजन गगन, प्रदेश कोषाध्यक्ष मो. कामरान, पूर्व विधायक सतीश कुमार आदि मंचासीन थे।"