Bihar News : नीतीश कुमार सरकार के पास सीटों से ज्यादा विधायकों का साथ, विपक्ष की जीतीं सीटें भी हाथ में नहीं
Bihar Cabinet Expansion : नए साल में बिहार की नीतीश कुमार सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की खबर के साथ यह भी जानना रोचक है कि राज्य में विपक्ष अपनी जीती सीटों से कम संख्या में है। सत्ता पक्ष के पास जीती सीटों से ज्यादा ताकत है।
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विस्तार
बिहार की नीतीश कुमार सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार हो रहा है। नए राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भाजपा के सात विधायकों को मंत्री के रूप में शपथ दिलाने वाले हैं। दरअसल, नीतीश सरकार जितनी ताकत से 2020 के विधानसभा चुनाव में आई थी, उससे भी ज्यादा मजबूत स्थिति में आज है। बिहार विधानसभा में मौजूदा विधायकों की दलगत संख्या 2020 चुनाव परिणाम के बाद से कई बार बदली। कभी विधायक के निधन से तो कभी किसी की विधायकी जाने के कारण और फिर निर्वाचित विधायक के सांसद बन जाने के कारण। इसके अलावा, फ्लोर टेस्ट के दौरान विपक्ष के साथ खेला हो जाना भी एक कारण है। मंत्रिमंडल विस्तार की खबर के साथ यह जानना बेहद रोचक है कि 2020 से अबतक क्या-कुछ हुआ कि जितना कागज पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन मजबूत है, उससे ज्यादा वास्तव में। यह भी एक कारण है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नीतीश कुमार सरकार खुद को ऊपर मान रही है।
- भाजपा ने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में 74 सीटें जीती थीं। फिर उसने उप चुनाव में राजद से कुढ़नी विधानसभा सीट छीन ली। भाजपा की संख्या 75 होती है, लेकिन उसने विकासशील इंसान पार्टी के तीनों विधायकों को साथ मिला लिया। तीन ही विधायक थे और इसलिए दल-बदल कानून लागू नहीं हुआ। इससे भाजपा के विधायकों की संख्या 78 हो गई थी। उपचुनाव 2024 में दो सीटें भाजपा ने अपने खाते में कर ली। रामगढ़ सीट राजद और तरारी भाकपा-माले के पास थी। दोनों के विधायक सांसद बन चुके हैं। इस तरह भाजपा अब कागज पर 80 विधायकों वाली पार्टी है।
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- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने 2020 के विधानसभा चुनाव में 43 सीटें जीती थीं। बाद में, जदयू ने बहुजन समाज पार्टी के एक और लोजपा के एक विधायक को अपने साथ कर लिया। अब उसके पास 45 विधायक हो गए थे। पिछले साल फरवरी में फ्लोर टेस्ट के बाद रूपौली की जदयू विधायक बीमा भारती ने इस्तीफा देकर राजद का दामन थाम लिया। तब जदयू विधायकों की संख्या 44 हो गई। बीमा भारती की छोड़ी रूपौली सीट जदयू नहीं जीत सकी, लेकिन वहां से निर्दलीय जीते शंकर सिंह नीतीश कुमार के प्रति आस्था जता चुके हैं। वह जदयू में नहीं, लेकिन सरकार के साथ हैं। उप चुनाव 2024 में बेलागंज सीट राजद से छीनकर जदयू ने अपनी संख्या 45 कर ली।
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- राजद ने 2020 के विधानसभा चुनाव में 75 सीटों पर जीती थी। बाद में वह कुढ़नी सीट उप चुनाव में हार गई। वीआईपी के विधायक के निधन से खाली बोचहां सीट उप चुनाव में राजद ने जीत ली। इस तरह उसके विधायकों की संख्या वापस 75 हो गई। राजद ने असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के पांच में से चार विधायकों को अपने साथ कर अपनी संख्या 79 कर ली। उपचुनाव 2024 में दो सीटें हारने से राजद विधायकों की कागज पर संख्या 77 रह गई। यह दो सीटें बेलागंज और रामगढ़ विधायक के सांसद बनने से खाली हुई थी।
- भाकपा माले ने 2020 के विधानसभा चुनाव में 12 सीटें जीती थीं। बाद में मनोज मंजिल की सदस्यता रद्द की गई थी। उनकी सीट के लिए उप चुनाव हुआ तो शिव प्रकाश रंजन ने भाकपा-माले की यह सीट कायम रखी। यह संख्या 12 ही थी, लेकिन लोकसभा चुनाव में तरारी सीट के विधायक सुदामा प्रसाद सांसद बने तो उनकी छोड़ी सीट को भाजपा ने अपने खाते में कर लिया। इस तरह भाकपा-माले की संख्या 11 रह गई।
- जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा- सेक्युलर के चार विधायक जीते थे। बाद में मांझी खुद सांसद बन गए। इमामगंज की उनकी विधानसभा सीट बहू दीपा मांझी ने वापस जीत ली। इस तरह विधानसभा में हम-से के चार विधायक थे भी और अब भी हैं।
- असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के चार विधायक जीते थे, जिनमें से तीन राजद के साथ चले गए। उसके पास अब एक विधायक हैं।
- मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी के चार विधायक 2020 के चुनाव में जीते थे। एक के निधन से खाली हुई सीट राजद के खाते में चली गई। शेष तीन भाजपा चले गए। अब VIP की सदस्यता शून्य है।
- विधानसभा चुनाव 2020 में कांग्रेस के 19 विधायक जीते थे। कागज पर आज भी उतने ही हैं।
- सीपीआई-एम के दो और सीपीआई के दो विधायक जैसे थे, अब भी हैं।
- बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में एक निर्दलीय जीते थे- सुमित सिंह। फिर रूपौली के उप चुनाव में बीमा भारती की सीट निर्दलीय शंकर सिंह ने हासिल कर ली। यह दोनों निर्दलीय हैं। इनमें सुमित सिंह मंत्री हैं, जबकि शंकर सिंह बाहर से साथ हैं।
बिहार विधानसभा में सबसे खराब स्थिति में लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल है। पिछले साल 12 फरवरी को नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को विश्वास मत में हराने की तैयारी करने वाले राजद को जोर का झटका लगा था। फ्लोर टेस्ट के समय तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के साथ खेला की आस लगाए बैठे थे, लेकिन खेल ही उलटा पड़ गया था। राजद के तीन विधायक चेतन आनंद, प्रह्लाद यादव और नीलम देवी जदयू, जबकि एक एमएलए संगीता कुमारी भाजपा के साथ बैठना मुनासिब समझा। राजद इनकी विधायकी छीनने के लिए देर से ही सही प्रयासरत हुआ, लेकिन मामला लटका है। नतीजा है कि चार विधायक कागज पर उसके और वास्तव में सरकार के साथ हैं।
कांग्रेस के खेमे से दो निकले, सत्ता के साथ
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में कांग्रेस के 19 विधायक चुनकर आए थे। इनमें से दो विधायकों सिद्धार्थ सौरव और मुरारी गौतम ने फ्लोर टेस्ट के समय सत्ता के साथ बैठ गए। मतलब, कांग्रेस के भी दो ने पाला बदला था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव से इन्हें अयोग्य ठहराने की मांग की थी, लेकिन आज तक यह दोनों कागज पर कांग्रेसी और मन से सत्ता के साथ हैं।
मतलब, बिहार विधानसभा में विपक्ष के पास विधायक तो 112 हैं, लेकिन साथ में 106 हैं। सत्ता के पास विधायक तो 131 हैं, लेकिन साथ में 137 हैं।