Bihar News: बिहार की नीतीश कुमार सरकार में ईडी के नाम पर पहली बार खलबली; बड़े अफसर पर आई आफत, होगा बड़ा हंगामा
IAS Office : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कभी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है। लेकिन, संभव है कि बहुत जल्द उनके करीबी आईएएस अफसर के घिरने पर विपक्ष सीएम को घेरे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गतिविधि से आईएएस खेमे में हड़कंप है और आंच सरकार तक पहुंच रही।
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विस्तार
बिहार में बहुत बड़ा हंगामा होने वाला है। केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के महत्वपूर्ण घटक जनता दल यूनाईटेड को केंद्र की एक एजेंसी के कारण असहजता हो रही है। यह असहजता बहुत तेजी से आकार बढ़ा रही है। एजेंसी ने पहले बलात्कार के आरोपी भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी संजीव हंस के घर दबिश दी। फिर उनसे जुड़े कई लोगों तक। एजेंसी को इस दबिश में कुछ ऐसा हाथ लगा कि इसमें संजीव हंस से भी ज्यादा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी आईएएस अधिकारी तक मामला पहुंच गया। संजीव हंस को अगर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के केस में दबोच लिया तो सीएम नीतीश कुमार के उस करीबी आईएएस अधिकारी का भी नाम सामने आ जाएगा, यह पक्का है। ईडी ने वैसे उस आईएएस अधिकारी के रिश्तेदार को पूछताछ के लिए बुला जरूर भेजा है। इस कारण आईएएस खेमे में हड़कंप है और इसकी आग बिहार की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की सेहत पर भी असर डाल सकती है।
क्या है मामला और कैसे जुड़ रहा कनेक्शन
राष्ट्रीय जनता दल के नेता आईएएस संजीव हंस के मामले में इसलिए चुप हैं, क्योंकि केस की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल के विधायक रहे गुलाब यादव से हुई थी। जब बिहार में महागठबंधन सरकार- 1 थी, तब गुलाब यादव विधायक थे। एक महिला अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि गुलाब यादव ने राज्य महिला आयोग की सदस्य बनाने के झांसे में पटना बुलाकर उनके साथ बलात्कार किया। महिला के अनुसार जब उसने पुलिस में शिकायत करने की बात कही तो शादी का झांसा देकर मांग में सिंदूर भी डाल दिया। फिर लंबे समय तक जब इस रिश्ते को मान्यता नहीं दी तो पुणे और दिल्ली के होटल में बुलाकर फिर संबंध स्थापित किया। इस बार आईएएस संजीव हंस ने भी महिला से बलात्कार किया। यह केस काफी जद्दोजहद के बाद पटना में दर्ज हुआ और प्राथमिक जांच में महिला अधिवक्ता के कई आरोप सही साबित हुए।
इसमें जब करीब एक करोड़ रुपये केस दबाने के लिए लेन-देन की बात आई तो ईडी की एंट्री हुई। महिला अधिवक्ता ने ईडी को बताया कि चुप रहने के एवज में उसके बैंक खाते में इन दोनों ने 90 लाख रुपये और एक लग्जरी गाड़ी गिफ्ट की। इसी केस में संजीव हंस के ठिकानों पर छापेमारी और उनसे पूछताछ शुरू हुई तो उनके सरकारी पदों पर रहते हुए कंपनियों को फायदा पहुंचाने और इसके एवज में रुपये लेनदेन के दस्तावेज हाथ लगे हैं। इन्हीं दस्तावेजों में से एक कागज सीएम नीतीश कुमार के बेहद करीबी आईएएस अधिकारी के बेटे की कंपनी का है। इस कंपनी को कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबलिटी के नाम पर भारी राशि देने की बात सामने आ रही है। ईडी ने इसी आधार पर आईएएस के बेटे को बुलावा भेजा है। पहला नोटिस मिल चुका है। नहीं जाने के कारण अब दूसरा जारी होने वाला है, हालांकि ईडी औपचारिक तौर पर इस बारे में कुछ भी कहने को तैयार नहीं है।
अब क्या संभावनाएं-आशंकाएं हैं, यह भी देखें
आईएएस संजीव हंस का हिसाब-किताब देखने वाले से लेकर रिश्तेदारों तक से ईडी ने पूछताछ कर ली है। हर तरह से दस्तावेज जुटाने के बाद सीएम नीतीश कुमार के करीबी सीनियर आईएएस के बेटे को नोटिस दिया है। आईएएस अधिकारी को सीएम रिटायर नहीं होने देते, यह बिहार में कई बार दिख चुका है। मतलब, उन्हें कोई न कोई बड़ी जिम्मेदारी दे देते हैं। ऐसे भी किसी अधिकारी तक इस तरह की जांच की आंच आती है तो सीएम नीतीश कुमार का असहज होना पक्का रहता है। इस कारण आईएएस खेमे में हड़कंप मचा है। खबर ताे यह भी आई कि भाजपा कोटे के एक डिप्टी सीएम के जरिए केंद्र और उनके जरिए ईडी को हाथ हल्का करने का संदेश सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड की ओर से दिया जा चुका है। इस कथित संदेश के बावजूद कुछ संभलता नहीं दिख रहा है। तो अब...
1. अगर इस आईएएस अधिकारी के बेटे को ईडी बुलाने में कामयाब रहा तो सीएम नीतीश कुमार तक आंच आएगी। ऐसे में संभव है कि सीएम अपनी छवि को देखते हुए पहले ही आईएएस से खुद को दूर कर लें या फिर भाजपा पर दबाव बनाएं।
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2. इस आईएएस अधिकारी के बेटे को ईडी बुलाने में नाकामयाब रही तो संभव है कि वह इन तथ्यों को ही नकार दे। आईएएस संजीव हंस को भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति हासिल करने के मामलों से भी किसी तरह राहत मिल जाएगी।