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Bihar Temperature : नीतीश कुमार या केके पाठक मेरा बच्चा लौटा सकते हैं? स्कूल जाने में लू का शिकार हुआ था दीपक

Krishan Ballabh Narayan कृष्ण बल्लभ नारायण
Updated Thu, 30 May 2024 04:08 PM IST
सार

Bihar School News : पिछले 10 दिनों से गर्मी प्रचंड है। सीएम नीतीश कुमार चुप बैठे थे। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के डर से डीएम स्कूलों की छुट्टी नहीं करा रहे थे। नतीजा, हम आज इस घर के गम में शरीक हुए। यहां 10वीं के छात्र दीपक का श्राद्ध चल रहा था।

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Bihar News : High School student Deepak lost life in heat wave, bihar school closed KK Pathak nitish kumar
परिजनों ने सरकार और सिस्टम पर लगाया आरोप - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

एक खबर दबी हुई थी। बुधवार को प्रचंड गर्मी के बीच 'अमर उजाला' की टीम पटना के एक स्कूल पहुंची तो वह दबाई गई खबर सकुचाते हुए सामने आयी। शिक्षकों को पता था, लेकिन शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के डर से मुंह नहीं खोल रहे थे। पता करते-करते पता चला कि 10वीं के छात्र की लू के कारण मौत हो गई थी, उसी की शोकसभा थी। प्रचंड गर्मी में स्कूल खोले रखने के सरकारी आदेश को चुनौती देते हुए हमने उसके बाद दिनभर अभियान चलाए रखा। शाम तक शिक्षा विभाग जागा भी तो आठवीं कक्षा तक के लिए। कुछ देर बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को गंभीरता समझ में आयी और आठ जून तक स्कूलों को पूर्णत: बंद रखने का आदेश दिया। काश! सरकारी सिस्टम को जगाने के लिए हम यह प्रयास 10 दिन पहले करते। प्राइवेट स्कूलों की तरह सरकारी भी बंद हो गया होता तो आज दीपक का श्राद्ध नहीं हो रहा होता। वह स्कूल से लौटा तो लू लगने के बाद बुखार आया और अगली सुबह सूर्योदय से पहले उसकी मौत हो गई थी।

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Bihar News : High School student Deepak lost life in heat wave, bihar school closed KK Pathak nitish kumar
दीपक के पिता मुन्ना कुमार - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

सारी उम्मीदें दीपक की चिता के साथ ही जलकर राख हो गई
दीपक के पिता मुन्ना कुमार आज असहाय दिख रहे थे। जब 'अमर उजाला' की टीम उनके घर पर पहुंची तो वह दीपक के श्राद्ध कर्म में व्यस्त थे। उन्होंने कहा कि मेरे तीन बेटे थे, अब बस दो बचे हैं। एक वही था जिसपर मुझे नाज था, क्यों कि वह पढ़ने में बहुत तेज था। घर के सभी लोगों को भी उससे काफी उम्मीदें थी, लेकिन अब वह सारी उम्मीदें दीपक की चिता के साथ ही जलकर राख हो गई। मुन्ना कुमार ने बताया कि मेरे घर में एक वही थी जिसे शिक्षा से बहुत प्रेम था। मैं अपने बेटे को एक बड़ा आदमी बनाना चाहता था लेकिन अब वह उत्साह ही समाप्त हो गया।

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दीपक की मां- सरकार और सिस्टम मेरे बेटे को लौटा देगा क्या ? - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

छात्र के श्राद्ध पर शांति पाठ के बाद मां ने कही यह बात
शुक्रवार को स्कूल गया था। स्कूल से लौटने के बाद अगले दिन यानी शनिवार को उसकी तबीयत खराब हो गई, इस वजह से वह शनिवार को स्कूल नहीं जा सका। फिर उसे पास के दवा दूकान से दवा लाकर उसको खिलाया लेकिन रविवार की सुबह उसकी मौत हो गई। हमलोग समझ नहीं सके कि अचानक यह क्या हो गया। दवा दुकानदार से दवा लेने के दौरान हमने कहा कि उसे बुखार लगा है, शरीर कांप रहा है, ऐसा हो सकता है कि उसे लू लग गई है। मां ने रोते हुए कहा कि मेरे घर का दीपक बुझ गया। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर स्कूल बंद हो गया रहता तो आज मेरा दीपक मेरे साथ मेरे पास होता लेकिन सरकार, शिक्षा विभाग और सिस्टम के फ़रमान की वजह से  मेरे घर का दीपक आज बुझ गया। 'अमर उजाला' ने उस मां से पूछा कि सरकार से क्या चाहती हैं? तो दीपक की मां की आँखें यह कहते कहते भर आई कि सरकार और सिस्टम मेरे बेटे को लौटा देगा क्या ?

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मुझ गया मेरे घर का दीपक- महावीर प्रसाद।  - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

दादा बोले- न स्कूल खुला होता, न हमारा दीपक बुझा होता
दीपक के दादा महावीर प्रसाद दिल के मरीज हैं। 'अमर उजाला' की टीम जब दीपक के घर पर पहुंची तो देखा कि महावीर प्रसाद खुद में कुछ कुछ बोल रहे थे। खुद सवाल भी कर रहे थे और खुद जवाब भी दे रहे थे। हमने घर वालों से पूछा कि यह कौन हैं तो पता चला दीपक के सबसे अधिक पास रहने वाले उसके दादा हैं। हमने उनसे बात करने की कोशिश की तो पहले वह इंकार कर दिए लेकिन फिर दो-चार बार कहने पर मान गये। उन्होंने कहा कि मैंने उसे मना किया था कि इस प्रचंड गर्मी में घर से बाहर मत निकलो, लेकिन दीपक को स्कूल जाना अच्छा लगता था। दीपक उस दिन जिद कर के स्कूल गया था, और जब लौटा तब उसकी तबीयत खराब हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि मेरे पोते की मौत की वजह स्कूल खुलना है, अगर कुछ दिन पहले विद्यालय बंद हो गया रहता तो मेरा दीपक मेरे घर में होता, मेरे पास होता। मेरे घर का दीपक आज नहीं बुझता। 

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