Bihar News : दिवंगत शहाबुद्दीन के सबसे बड़े विरोधी ओम प्रकाश यादव की तबीयत बिगड़ी, ट्रेन में हो गए थे बेहोश
Siwan News : परिजनों ने कहना है कि पूर्व सांसद ओमप्रकाश यादव दिल्ली किसी काम से गए हुए थे। शुक्रवार को 1:45 बजे संपर्क क्रांति एक्सप्रेस पकड़ कर सीवान आ रहे थे। रास्ते में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। देवरिया में वह ट्रेन में ही बेहोश हो गए।
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सीवान के पूर्व सांसद और भाजपा नेता ओमप्रकाश यादव की तबीयत बिगड़ गई। आननफानन परिजनों ने सीवान सदर अस्पताल पहुंचाया। यहां डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर देखते हुए पटना रेफर कर दिया है। उनकी हालत गंभीर है। पटन में उनका इलाज चल रहा है। परिजनों ने कहना है कि ओमप्रकाश यादव दिल्ली किसी काम से गए हुए थे। शुक्रवार को 1:45 बजे संपर्क क्रांति एक्सप्रेस पकड़ कर सीवान आ रहे थे। रास्ते में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। देवरिया में वह ट्रेन में ही बेहोश हो गए। ट्रेन जैसे ही सीवान पहुंची, उन्हें फौरन सदर अस्पताल भर्ती कराया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया है।
इन मामलों में शहाबुद्दीन के विरोधी के तौर पर सामने आए
परिजनों का कहना है कि ओम प्रकाश यादव बार-बार बेहोश हो रहे हैं। उनका पहले हार्ट का ऑपरेशन भी हो चुका है। इसकी वजह से पिछले वह कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे।
यह वही ओमप्रकाश यादव हैं, जिन्होंने सीवान के चंदा बाबू की दोनों बेटों की हत्या और पत्रकार राजदेव रंजन मर्डर केस में खुलकर बाहुबली पूर्व सांसद और दिवंगत मो. शहाबुद्दीन का विरोध किया था। सीवान में इन्हें शहाबुद्दीन का सबसे बड़ा विरोधी कहा जाता था। ओम प्रकाश यादव 2009 में अपने दम पर सीवान लोकसभा सीट से जीत हासिल की थी। उस समय वो निर्दलीय खड़े हुए थे। इसके बाद 2014 में भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की। हालांकि, 2019 में एनडीए गठबंधन की वजह से जदयू की उम्मीदवार कविता सिंह को टिकट मिला था। फिलहाल कविता सिंह ही सीवान से सांसद है। ओम प्रकाश यादव ने भी कविता सिंह का समर्थन किया था।
पिछले साल यह बयान देकर चर्चा में आए थे ओमप्रकाश यादव
हालांकि, पिछले साल यानी 2022 में ओमप्रकाश यादव ने तब फिर चर्चा में आए थे, जब उन्होंने MLC चुनाव में एनडीए की ओर से मनोज सिंह या उनकी पत्नी को टिकट देने की बात चल रही थी। इसके बाद पूर्व सांसद ने इसका विरोध किया था। कहा था कि मनोज सिंह को अपराधी करार दे दिया था। इतना ही यह आरोप लगाया था कि दिवंगत मो. शहाबुद्दीन के साथ मनोज सिंह AK 47 लेकर चलते थे। इसलिए मनोज सिंह को अगर टिकट मिला तो विरोध होगा।