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Hindi News ›   Bihar ›   Bihar News: EOU Reveals Fraud in BPSC AEDO and BPSSC Daroga SI Recruitment: Satish-Birendra Bihar Exam Case

परीक्षा के बड़े 'खिलाड़ी' पकड़ाए: एईडीओ और दरोगा भर्ती में कैसे किया खेल? जानें सतीश-बिरेंद्र के बारे में

Wed, 23 Sep 2026 07:13 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Wed, 23 Sep 2026 07:13 PM IST
सार

BPSC-BPSSC Exam: बिहार लोक सेवा आयोग की सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी परीक्षा को लेकर राज्य में खूब हंगामा मचा था, क्योंकि यह भी कदाचार की भेंट चढ़ गई थी। अब कदाचार के उस खेल का बड़ा खिलाड़ी पटना में दबोचा गया है। इतना ही नहीं दरोगा भर्ती परीक्षा में सॉल्वर गैंग का खुलासा हुआ है। आइये जानते हैं पूरा खेल?

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Bihar News: EOU Reveals Fraud in BPSC AEDO and BPSSC Daroga SI Recruitment: Satish-Birendra Bihar Exam Case
सतीश और बिरेंद्र ने ईओयू के सामने कई खुलासे किए। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की ओर से आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (एईडीओ) परीक्षा और बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (बीपीएसएससी) की दरोगा भर्ती परीक्षा बड़े स्तर पर धांधली और अनियमितता हुई थी। इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने बड़ी कार्रवाई की है। आर्थिक अपराध इकाई की ओर से बताया गया कि बीपीएससी की ओर से ली गई एईडीओ की परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले मुख्य आरोपियों में शामिल सतीश कुमार यादव को गिरफ्तार किया है। ईओयू की विशेष टीम ने उसे 22 सितंबर 2026 को गर्दनीबाग थाना क्षेत्र में उसके डेरे के नजदीक शिवपुरी पार्क के पास से गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया। आरोपी की तलाश लगातार की जा रही थी। मामला सामने आने के बाद वह पहले नेपाल और फिर असम चला गया था।

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ईओयू के अनुसार, सतीश कुमार यादव ने पटना जिले के करीब 10 परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए मेसर्स साई एजुकेयर प्राइवेट लिमिटेड के वेंडरों से अपने हस्ताक्षर से करार किया था। इसके बाद उसने अपने लोगों को इन केंद्रों पर बायोमेट्रिक सुपरवाइजर और ऑपरेटर के रूप में तैनात कराया। चिन्हित परीक्षा केंद्रों पर तैनात कर्मियों के माध्यम से प्रश्नपत्र हासिल किए गए। इसके बाद सहयोगी सरोज महतो और सरफराज आलम की मदद से सॉल्वर के जरिए उत्तर कुंजियां तैयार कर पूर्व से सेट किए गए अभ्यर्थियों को अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर उपलब्ध कराई गईं।
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ईओयू का कहना है कि जांच में सामने आया है कि एईडीओ परीक्षा के प्रश्नों को पटना के 70 फीट रोड, बाइपास स्थित नामक ऑनलाइन परीक्षा केंद्र में सॉल्वर की मदद से हल कर उत्तर कुंजी तैयार की गई थी। यह ऑनलाइन परीक्षा केंद्र सतीश कुमार यादव के सहयोगी सरफराज आलम और रमेश कुमार द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जा रहा था। सतीश कुमार यादव का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है। वह उत्तर प्रदेश के इटावा थाना क्षेत्र में सिपाही भर्ती लीक मामले में वर्ष 2023 में गिरफ्तार होकर लंबे समय तक जेल में रहा था।
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दरोगा परीक्षा में भी सॉल्वर गैंग का खुलासा
ईओयू मामले में बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग की ओर से 27 मई को आयोजित पुलिस अवर निरीक्षक की मुख्य लिखित परीक्षा में सॉल्वर गैंग की भूमिका सामने आई है। गया जिले के रामपुर थाना कांड संख्या 307/26 में दर्ज मामले की जांच ईओयू की एसआईटी ने 28 अगस्त को अपने हाथ में ली थी। जांच के दौरान 22 सितंबर को आरोपी बिरेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया।

गया कॉलेज में कंप्यूटर टीचर के रूप में काम कर रहा था बिरेंद्र
जांच में पता चला कि बिरेंद्र कुमार वर्ष 2025 से गया कॉलेज में कंप्यूटर टीचर के रूप में अनुबंध पर काम कर रहा था और 27 मई की परीक्षा में कार्यालय कर्मी के रूप में ड्यूटी पर तैनात था। जांच के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए प्रश्नपत्र को ट्रेस करते हुए गया कॉलेज परीक्षा केंद्र तक पहुंचा गया। सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग से मिले दस्तावेजों के अध्ययन में पता चला कि वायरल प्रश्नपत्र गया कॉलेज के परीक्षा कक्ष संख्या-49 में आवंटित था और वहां का अभ्यर्थी अनुपस्थित था। ईओयू, 27 मई को दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर ढाई बजे शुरू हुई थी। परीक्षा शुरू होने के करीब 10 मिनट बाद बिरेंद्र कुमार ने अलग-अलग परीक्षा कक्षों से प्रश्नपत्र इकट्ठा किए और उसी केंद्र पर तैनात बायोमेट्रिक कर्मी की मदद से उनकी तस्वीरें खींचकर सॉल्वर गैंग को उपलब्ध कराईं। इसके बदले उसे पहले से तय साजिश के तहत एक लाख रुपये का पहला भुगतान किया जाना था।

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ऑनलाइन परीक्षा कराने वाली कंपनी से ही बिरेंद्र की थी सांठगांठ
ईओयू की जांच में यह भी सामने आया कि बिरेंद्र कुमार वर्ष 2021 से बाइट्स सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड नामक ऑनलाइन परीक्षा आयोजित कराने वाली कंपनी से जुड़ा था। कंपनी का मुख्यालय नई दिल्ली में है। आरोपी कई ऑनलाइन परीक्षाओं में चीफ इनविजिलेटर के तौर पर ड्यूटी कर चुका था और इन परीक्षाओं के दौरान अभ्यर्थियों की अनधिकृत सेटिंग कराने में भी उसकी भूमिका सामने आई है। डिजिटल साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई जारी है। ईओयू के अनुसार, दोनों मामलों की जांच अभी जारी है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर सॉल्वर गैंग से जुड़े अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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