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Bihar News : वित्त आयोग के सामने खुलकर आया बिहार का दर्द- केंद्र ने अपनी जेब भरी, राज्य को नहीं दिया हक

Thu, 20 Mar 2025 03:07 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Thu, 20 Mar 2025 03:07 PM IST
सार

Finance Commission : डबल इंजन सरकार दौड़ तो रही है साथ, लेकिन ईंधन का उचित हिस्सा दूसरे इंजन को नहीं मिल रहा है। सोलहवें वित्त आयोग के सामने बिहार का यह संकट खुलकर सामने आया। क्या अपील की आखिर बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने?

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Bihar News : central not sharing cess and surcharge issue before finance commission report for bihar
वित्त आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

सोलहवें वित्त आयोग के साथ बिहार सरकार की बैठक ने भी राज्य के विपक्षी दलों को बड़ा मुद्दा दे दिया था। यह मुद्दा पुराना है, लेकिन विपक्ष भी भूले बैठा था। राज्य की नीतीश कुमार सरकार ने वित्त आयोग से जो अपील की है, वह साफ-साफ बता रही है कि डबल इंजन सरकार के दोनों इंजन के बीच ईंधन (धन) का बंटवार सही तरीके से नहीं हो रहा है। राज्य सरकार ने साफ-साफ अपील की है कि केंद्र सरकार सेस और सरचार्ज के जरिए अपनी कमाई बढ़ा रही है, लेकिन उस राजस्व का हिस्सा राज्य को नहीं मिल रहा है। इन दोनों को विभाज्य पूल में शामिल करने की मांग के साथ सरकार ने केंद्रीय करों की शुद्ध आया के न्यूनतम 50 फीसदी को अपना हक बताया है। 

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अपनी पीठ थपथपाई, और प्रयास की जरूरत स्वीकारी
सोलहवें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया के सामे राज्य सरकार ने लिखित तौर पर प्रस्ताव के साथ अपनी मांग बताई है। सरकार ने मांगों की जानकारी से पहले दावा किया है कि बिहार ने पिछले लगभग दो दशकों में उच्च आर्थिक विकास दर को बनाए रखा है तथा विभिन्न सामाजिक-आर्थिक विकास संकेतकों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इसके साथ ही यह भी स्वीकार किया है कि विभिन्न संकेतकों में राष्ट्रीय औसत को प्राप्त करने के लिए और प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। इसके बाद राज्य सरकार ने इन जरूरतों के मद्देनजर अपनी मांगों की फेहरिस्त भी दी है।
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सोलहवें वित्त आयोग से अपेक्षाओं की सूची भी दी
राज्य सरकार ने लिखा कि बिहार के विकास को बढ़ावा देने के लिए राज्य की राजकोषीय क्षमता को बढ़ाने के लिए सोलहवें वित्त आयोग से अपेक्षा है कि वह विशेष वित्तीय प्रावधान करे। केंद्र सरकार से वित्तीय संसाधन के हस्तांतरण के लिए अधिक से अधिक फार्मूला-आधारित दृष्टिकोण अपनाए जाने की जरूरत बताते हुए लिखा गया है कि इसके अतिरिक्त सीमित राजकोषीय संसाधनों वाले राज्यों पर वित्तीय बोझ को कम करने के लिए राज्यों को अनुदान संबंधी व्यय के लिए अपने हिस्से से वित्तीय योगदान करने की आवश्यकता को नहीं रखा जाए। मतलब, केंद्र प्रायोजित योजनाओं में कमजोर राज्यों को धन लगाने के लिए न कहा जाए।
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सेस और सरचार्ज बढ़ाए जाने का फायदा भी मिले
राज्य सरकार ने वित्त आयोग का ध्यान आकृष्ट कराया है कि केंद्र सरकार द्वारा 'सेस' और 'सरचार्ज के माध्यम से राजस्व संग्रह में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। चूंकि, यह राजस्व राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाता है, इसलिए 'सेस' और 'सरचार्ज' से बढ़ते राजस्व संग्रह राज्य सरकारों के लिए राजस्व की हानि की तरह हैं। ऐसे में वर्तमान वित्त आयोग से अपेक्षा है कि 'सेस' और 'सरचार्ज को विभाज्य पूल में शामिल करने की अनुशंसा करे। इसके साथ यह भी मांग की गई है कि राज्यों की वित्तीय आवश्यकताओं को देखते हुए केंद्रीय करों की शुद्ध आय का कम से कम 50 प्रतिशत राज्य सरकारों के साथ साझा किया जाना चाहिए।

जनसंख्या को लेकर तर्क देकर मांग को जायज बताया
राज्य सरकार ने वित्त आयोग से केवल मांग ही नहीं रखी, उसके साथ तर्क भी दिया। बताया गया कि वित्त आयोग राज्यों के बीच केंद्र सरकार से मिलने वाले राजस्व को वितरित करने के तरीके का निर्धारण करते समय दो मुख्य मानदंडों जनसंख्या और क्षेत्र का उपयोग करता है। उच्च जनसंख्या घनत्व वाले राज्यों को एक तरफ काफी राजस्व हानि का सामना करना पड़ता है तो दूसरी तरफ घनी आबादी वाले कम विकसित क्षेत्रों को अपने विकास के लिए अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सरकार ने मांग रखी कि संसाधन हस्तांतरण के फॉर्मूले में जनसंख्या घनत्त्व को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह समायोजन सामाजिक और भौतिक बुनियादी ढांचे दोनों पर जनसंख्या के प्रभाव को कम करने में मदद करेगा। राज्य सरकार ने अपील की कि "वित्त आयोग केंद्र सरकार के कर राजस्व के विभाज्य पूल में प्रत्येक राज्य की हिस्सेदारी निर्धारित करने के लिए 'मल्टी डायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (एमपीआई) को एक प्रमुख मानदंड के रूप में शामिल करने पर विचार करे। वित्त आयोग ऐसी अनुशंसा करे, जिससे राज्य सरकारों पर अतिरिक्त वित्तीय शर्तें लगाए बिना स्थानीय निकायों को उनके कामकाज को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन आवंटित हो सके। सीमित वित्तीय संसाधनों वाले राज्य के लिए अक्सर सशर्त वित्तपोषण की मांगों को पूरा करना कठिन होता है।"

राज्य सरकार ने 16वें वित्त आयोग से कितना अनुदान मांगा
राज्य सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने के लिए 16वें वित्त आयोग से 24,206.68 करोड़ रुपये का अनुदान मांगा है। शहरी निकायों के विकास के लिए 35,025.77 करोड़ रुपये का अनुदान मांगा गया है। इसके अलावा, राज्य के विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्काल वित्तीय सहायता के तहत वित्त आयोग से 1,00,079 करोड़ रुपये के अनुदान की मांग की गई है। विशेष रूप से, राज्य में क्लाइमेट रेसिलिएंट कृषि प्रथाओं की तैयारियों के लिए 703.03 करोड़ रुपये का अनुदान मांगा गया है। बिहार को 'देश का जैविक कटोरा' बनाने के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे को विकसित करने के लिए 430.37 करोड़ रुपये का अतिरिक्त अनुदान मांगा गया है। राज्य में नहर प्रणाली को विकसित करने के लिए 13,800 करोड़ रुपये का अनुदान मांगा गया है। कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए बिहार में सूक्ष्म सिंचाई बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 3,577 करोड़ रुपये के अनुदान की मांग की गई है।


प्रखंडों के लिए राशि आवंटन की जरूरत बताई, मांग भी रखा
सरकार ने लिखा है कि अभी केंद्र सरकार वर्तमान में चयनित महत्वाकांक्षी (Aspirational) जिलों और प्रखंडों को सहायता प्रदान करती है। राज्य सरकार को बिहार भर में सामाजिक-आर्थिक संकेतकों को बेहतर बनाने के लिए सभी प्रखंडों को राशि आवंटित करने की जरूरत है। इस उद्देश्य के लिए 13,500 करोड़ रुपये का वित्तीय अनुदान की मांग की गई है। शिक्षा क्षेत्र में आवश्यक बुनियादी ढाँचे को विकसित करने के लिए 18,532.10 करोड़ रुपये के अनुदान की मांग की गई है। बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और कलात्मक विरासत को देखते हुए, राज्य में एक विश्व स्तरीय फिल्म सिटी की स्थापना के लिए 200 करोड रुपये का अनुदान मांगा गया है। 

25 प्रतिशत अंशदान की जगह 10 फीसदी करने की मांग
राज्य सरकार ने अपनी ओर से दिए प्रस्ताव में लिखा है कि पिछले वित्त आयोग ने राज्य स्तर पर आपदा प्रबंधन हेतु आवंटन के लिए केंद्र और राज्यों के बीच 75:25 के अंशदान अनुपात की सिफारिश की थी। हालांकि, राजकोषीय सीमाओं के कारण राज्य सरकार के लिए अपने 25 प्रतिशत हिस्से के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन जुटाना चुनौतीपूर्ण रहता है। इसलिए, बिहार को पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए किये गए प्रावधानों के समान केवल 10 प्रतिशत अंशदान करने की व्यवस्था की जाए। आपदा प्रबंधन एक जटिल कार्य है, और पूरे देश में समान रूप से एक समान सख्त दिशा-निर्देशों का पालन करना हमेशा संभव नहीं होता है। अतः, वित्त आयोग से अनुरोध है कि ऐसे प्रावधान किये जाए जिससे कि प्रत्येक राज्य के भीतर बदलती स्थानीय परिस्थितियों को समायोजित करने के लिए दिशा-निर्देशों में पर्याप्त लचीलापन रखा जा सके।

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