Holi 2025 : बिहार में आज हुई ब्रज वाली होली, अलग-अलग रूपों में मनाई खुशियां
Happy Holi : आज पूरे बिहार में होलिका दहन है, लेकिन बिहार के एक जिले में आज ही होली मनाई जा रही है। यहां की होली ब्रज की होली की तरह मनाई जाती है।
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कौन है हिंदु, कौन है मुस्लिम, हजारों की भीड़ में एक-दूसरे के कंधे पर सवार होकर रंग का जश्न मनाते लोगों की टोली दिन भर आनंदित होती रही। गुरुवार को पूरे दिन जिला मुख्यालय से मात्र आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित बनगांव की होली ब्रज की होली की तरह मनायी गयी। बूढे, जवान या बच्चे, भेद कोई नहीं था, न रंग का, न वर्ण का और न ही उम्र का। रंगीन पानी के फव्वारे के नीचे एक दूसरे को पछाड़ने की होड़ में सभी व्यस्त थे लेकिन इस पछाड़ में भी प्यार था।
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अलग-अलग चौक चौराहों पर लोगों की टोली जमा होती गयी और कारवां बढता गया, जो शाम होने से पहले देवी स्थान पर जमा हुआ और रात तक रंग व होली की मस्ती में सब सरोबार होते रहे। इससे पूर्व गांव के सभी लोग अपने से बड़े को प्रणाम कर तो सामान्य उम्र के लोग गले मिल वर्षों से चली आ रही रंगों के इस त्योहार की सार्थकता को निभा रहे थे। बनगांव का भगवती स्थान हो या ललित झा बंगला, सभी जगहों का जीवन्त दृश्य पूरे सूबे में मनायी जाने वाली होली और बनगांव के फगुआ को विशिष्ट बना रही थी।
बनगांव में धार्मिक रूप से होली मनाई जाती है, जिसमें संत लक्ष्मीनाथ कुटी, विषहरी स्थान, भगवती स्थान, ठाकुड़बारी में लोगों के हूजूम का पहुंचना काफी महत्वपूर्ण है। बनगांव में होली की शुरुआत में सुबह से दोपहर के 12 बजे तक सभी एक दूसरे को धूल व मिट्टी लगाकर होली की शुभकामना दे रहे थे। वहीं दोपहर बाद गांव के रामचंद्र खां हो या मो अब्दुल सभी एक ही रंग में रंगे नजर आये। कोई एक दूसरे को रंग तो कोई गुलाल लगा फगुआ की शुभकामना दे रहा था। होली में दिल मिल जातें हैं.... दुश्मन भी गले मिल जाते है... इन्हीं बातों को मान निकले हजारों लोग भगवती स्थान में जमा होकर बनने वाली मानव श्रृंखला का अद्भुत नजारा एवं उसमें शामिल लोगों का उत्साह ब्रज की होली की तरह ही बनगांव की होली को स्थापित कर रही थी। भगवती स्थान में जुटने से पहले गांव के पछवारी टोला एवं दक्षिणवारी टोला का मिलन राजा मनसाराम खां के दरवाजे से विषहरी स्थान के बीच होता है। उसी तरह पुवारी टोला एवं रामपुर बंगला के बीच भी लोगों का मिलन होता है।