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सुराख में सुराग : इंसान ने नार्को टेस्ट को ठग लिया, ईंट ने खून पीने का जुर्म स्वीकारा; ऐसे सुलझी मौत की गुत्थी

Wed, 20 Dec 2023 11:06 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Wed, 20 Dec 2023 11:06 AM IST
सार

Murder Case : अपराधी कितना भी शातिर हो, जुर्म करने पर कुछ-न-कुछ सुराग छोड़ जाता है। इस केस में भी वही हुआ। अपराधी ने तो घटनास्थल को चकाचक कर दिया था। नार्को टेस्ट में भी खुद को बचा लिया। मगर, अब पकड़ा गया क्योंकि सुराख में सुराग मिल गया।
 

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Bihar News : Bihar police solved wife murder case in crime patrol style after narco test in patna husband wife
पुलिस ने डीएनए जांच से किया हत्याकांड का खुलासा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुराख में भी सुराग हो सकता है, यह अपराधी ने नहीं सोचा था। पत्नी की हत्या कर उसके गायब होने की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने के पहले पति ने सबकुछ धो-पोछ कर साफ कर दिया था। जहां हत्या की थी, उस जगह को भी और अपनी कार को भी। हर तरह से सबूत मिटाने के आत्मविश्वास के बाद उसने पुलिस को खबर दी कि उसकी पत्नी घर से भाग गई है। पुलिस ने पहले उसकी शिकायत पर महिला को खोजना शुरू किया, लेकिन फिर उसके पिता की जताई आशंका पर हत्या का अनुसंधान शुरू किया। नार्को टेस्ट तक कराया गया, लेकिन झूठ पकड़ने वाली मशीन को वह छकाने में सफल रहा। तब ईंट ने खून पीने का जुर्म स्वीकार किया। डोरमैट के धागों ने भी ईंट का साथ दिया।

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फरवरी 2022 का केस, पिता ने दिए सुराग
छह फरवरी 2022 को पटना के हवाई अड्डा थाने में मुरलीचक जगदेव पथ निवासी धीरज कुमार ने प्राथमिकी दर्ज कराई कि उसकी पत्नी खुशी कुमारी तीन फरवरी से गायब है। खोजने के बाद भी नहीं मिलने पर उसने पुलिस को लिखित शिकायत देने की बात कही। पुलिस भी इसे भाग जाने या गायब होने वाला ही मामला समझती, अगर खुशी के पिता मिथिलेश सिंह ने उसके साथ पहले मारपीट किए जाने की जानकारी देते हुए हत्या की आशंका नहीं जताई होती। इसके साथ ही पिता ने अपनी बातों को लेकर एक अहम जानकारी यह दी कि धीरज ने खुशी के गायब होने की जानकारी थाने को देने के पहले पूरे बेडरूम को धो डाला और कार की भी सफाई करा चुका है।
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मर्डर की तैयारी थी, सबूत भी मिटाए; मगर...
थानाध्यक्ष विनोद कुमार के अनुसार धीरज ने हत्या की साजिश भी रची और खुद इसे अंजाम भी दिया। इसके लिए उसने अपने तीन साल के बेटे को उसकी दादी के साथ किसी रिश्तेदार के पास भेज दिया। हत्या के बाद कमरे और कार की सफाई की। सबकुछ सामान्य होकर सूख गया, तब पुलिस के पास खुशी के गायब होने की जानकारी दी। पिता की बातों पर जांच आगे बढ़ी तो शक गहराया। खुशी के मोबाइल नंबर की जानकारी धीरज ने थाने को दी थी। उसकी जांच में सामने आया कि वह पारिवारिक मित्र से बात करती थी। पूछताछ में सामने आया कि इस बात से धीरज नाराज रहता था और उसके साथ मारपीट भी कर चुका था। अनुसंधान आगे बढ़ा तो पुलिस ने धीरज को पटना एम्स में ले जाकर नार्को टेस्ट भी कराया। यह बेकार गया, क्योंकि वह जांच को छकाने में कामयाब रहा। पिता ने पुलिस पर भरोसा भी नहीं छोड़ा और हत्या के खुलासे का दबाव भी बनाए रखा। हत्या के करीब पांच महीने बाद पुलिस ने फॉरेंसिक टीम को बुलाकर धीरज-खुशी के बेडरूम की जांच की। पलंग के नीचे रखी ईंट और फुटमैच को बतौर सैंपल ले जाया गया। ईंट के अंदर सुराखों में खून मिले। फुटमैट के रेशों में भी इसी तरह के सबूत मिले। इसके सैंपल को खुशी के माता-पिता के डीएनए से मिलाया गया तो सामने आया कि पिता का शक सही था। 18 दिसंबर को पुलिस ने पत्नी की हत्या के जुर्म में धीरज कुमार को गिरफ्तार कर लिया।

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