Bihar News : पत्नी को तलवार से काट जिंदा जला दिया; कातिल पति को कोर्ट ने दी सश्रम उम्रकैद की सजा
उप परामर्शदाता एलएडीसीएस अधिवक्ता मुकेश कुमार ने कोर्ट में अभियुक्त के बचाव में पक्ष रखते हुए कम से कम सजा की मांग की। इधर, अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी देवेंद्र कुमार शर्मा ने अभियुक्त को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की।
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तलवार से पत्नी को काटकर लहुलूहान करने के बाद जिंदा जला देने के 10 साल पुराने मामले में सरकारी अधिवक्ता ने जघन्य अपराध के लिए अभियुक्त को कोर्ट से फांसी की सजा दिए जाने की मांग की। वही बचाव पक्ष के वकील ने कम से कम सजा की मांग की, जिसके बाद कोर्ट ने आरोपी को सश्रम आजीवन कारावास और जुर्माना की सजा सुनाई। दरअसल यह सजा गुरूवार को औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश(एडीजे)-2 धनंजय कुमार मिश्रा की अदालत ने सुनाई। आरोपी लालबहादुर चौधरी गोह थाना के गम्हरी गांव का निवासी है।
कोर्ट ने इन धाराओं में सुनाई सजा
अपर लोक अभियोजक (एपीपी) देवेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि कोर्ट ने गोह थाना कांड संख्या-10/19, एसटीआर-188/19 में सज़ा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए मामले के एकमात्र काराधीन आरोपी को भादंवि की धारा-302 के तहत आजीवन कारावास और 25 हजार के जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना नही देने देने पर कोर्ट ने एक साल के अतिरिक्त साधारण कारावास का प्रावधान किया। साथ ही कोर्ट ने अभियुक्त को भादंवि की धारा-201 के तहत पांच साल सश्रम कैद और 10 हजार का जुर्माना लगाया है। जुर्माना नही देने पर अभियुक्त के लिए एक साल का अतिरिक्त कारावास निर्धारित किया गया है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेगी।
11 जनवरी 2019 को प्राथमिकी दर्ज
अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि मामले की प्राथमिकी बतौर सूचक गया जिले के बाराचट्टी थाना के भेलवा निवासी पवन चौधरी ने 11 जनवरी 2019 को गोह थाना में दर्ज कराई थी। कहा था कि उनकी बहन रिंकू देवी की शादी 2013 में लालबहादुर चौधरी से हुई थी। अभियुक्त ने गलत नियत से षड्यंत्र कर उसकी बहन को रात में तलवार से हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया। हाथ काटा और किरासन तेल से जलाकर मार दिया। लाश को छिपा दिया। उसे मामले की जानकारी गम्हरी गांव के ग्रामीणो से मिली। इसके बाद वह घटनास्थल पर पहुंचा। घटना सत्य जानकर उसने न्याय के लिए थाना में आवेदन दिया।
गिरफ्तारी के बाद से जेल में बंद है आरोपी
मामले की प्राथमिकी के बाद पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, तब से वह जेल में ही बंद हैं। अधिवक्ता ने बताया कि मामले में अभियुक्त के पास बचाव के लिए कोई अधिवक्ता नहीं होने की स्थिति में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद की ओर से उसे पैरवी के लिए नि:शुल्क अधिवक्ता मुहैया कराया गया था।
सरकारी पक्ष ने कोर्ट से मांगी फांसी की सजा
मामले में उप परामर्शदाता एलएडीसीएस अधिवक्ता मुकेश कुमार ने कोर्ट में अभियुक्त के बचाव में पक्ष रखते हुए कम से कम सज़ा की मांग की। वही अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी देवेंद्र कुमार शर्मा ने अभियुक्त को जधन्य अपराध के लिए फांसी की सजा दिए जाने की मांग की। मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायधीश ने यह सज़ा सुनाई। कहा कि मृतका के दो नाबालिग बच्चों के देखभाल के लिए उचित प्रतिकर के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद को पत्र लिखा जाए।