Bihar Bridge Collapse: अमर उजाला ने सीमेंट-सरिया को बताया था खराब, मंत्री बोले- IIT जांच में भी गड़बड़ी मिली
Bihar News : बिहार के अररिया में निर्माणाधीन पुल गिरने के बाद 'अमर उजाला' ने दिखाया था कि उसी नदी के उजले बालू से बनाए जाने के कारण पुल गिरा था। सरिया की क्वालिटी भी घटिया दिखी थी। अब सरकार ने आईआईटी रिपोर्ट के आधार पर इसे मान लिया है।
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मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि अररिया में पुल गिरने का वीडियो काफी वायरल हुआ था। इसमें फौरन जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी। आईआईटी की जांच में पता चला कि पुल निर्माण में गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा गया था। इसके बाद हमलोगों ने निगरानी विभाग को जांच का जिम्मा सौंपा। हमलोग किसी भी कीमत पर गुणवत्ता से समझौता नहीं कर सकते है। हमारे यहां अबतक 70 फीसदी ही ऑनलाइन व्यवस्था लागू थी। इससे टेंडर प्रकिया में समय लगता था। अब इसे 100 फीसदी कर दिया गया है। इससे कार्यों का शीघ्र निष्पादन हो सकेगा।
हर हाल में पांच साल तक सड़कों का मेंटेनेंस करना है
मंत्री ने कहा कि ग्रामीण कार्य विभाग की जांच में यह पाया गया है कि कई सड़कें बनने के दो या तीन के अंदर ही खराब हो जाती है। जबकि पांच साल तक मेंटेनेंस करना होता है। इसके लिए विभाग एआई तकनीक के माध्यम से निगरानी करेगी। कई टेंडर जनवरी और फरवरी में पास हुए थे लेकिन चुनाव के कारण तब लंबित हो चुके थे। अब टेंडर का निष्पादन जल्दी हो सके, इसके लिए एक टीम का गठन किया गया है। इस टेंडर के माध्यम से करीब 10 हजार किमी सड़कें बनाई जाएंगी। आने वाले समय में नए पुलों के निर्माण पर भी सरकार निर्णय लेने जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए सड़क और पुल निर्माण हमारी पहली प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण कार्य विभाग को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
नेता प्रतिपक्ष ने बिहार को बदनाम किया
मुख्यमंत्री के कार्यकाल में करीब दो लाख पुल बनाए गए हैं। एक भी पुल नहीं गिरा। 15 साल पुराने पुल गिरे। इनमें से कई संसद फंड से बनाए गाएं। तेजस्वी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आप भी तो 1.5 साल मंत्री थी तो अपने क्यों नहीं जांच किया। वह पुल गिरने के मामले को मुद्दा बनाकर पूरे देश में बिहार को बदनाम करने की साजिश करते रहे। हमारे नेता नीतीश कुमार पुल के हेल्थ कार्ड बनाने का आदेश दिया। 15 अगस्त से पहले सभी अधिकारियों को पुलों के हेल्थ कार्ड जारी करने का निर्देश दिया गया है।
सवाल: अररिया में पिछले 13 साल 3 बार पुल बनाए गए लेकिन तीनों बात टूट गया। सरकार नदी की प्रकृति पर क्यों नहीं विचार करती है?
जवाब: सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। इसीलिए एप के माध्यम से इसकी निगरानी की जाएगी। सीमांचल की नदिया अत्यधिक सिल्ट के कारण अपनी धारा बदलती है। इसलिए पुल निर्माण से पहले नदियों की प्रकृति की भी जांच की जाएगी।