फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Bihar New Government Number of ministers of JDU decreased but Cm Nitish Kumar status remains intact

बिहार : मंत्रियों की संख्या घटी, मगर नीतीश का रुतबा बरकरार

Wed, 18 Nov 2020 04:06 AM IST
देव कश्यप हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 18 Nov 2020 04:06 AM IST
विज्ञापन
सार
  • गृह समेत पुराने सभी भारी भरकम मंत्रालय जदयू के पास।
  • उद्योग-वित्त दे कर नीतीश ने भाजपा पर डाला अपेक्षाएं पूरी करने का बोझ।
loader
Bihar New Government Number of ministers of JDU decreased but Cm Nitish Kumar status remains intact
नीतीश कुमार (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

विस्तार

बिहार की नई सरकार में भले ही जदयू के मंत्रियों की संख्या घट गई, मगर नीतीश कुमार अपना रुतबा बरकरार रखने में कामयाब रहे। नीतीश पहले की तरह भारी भरकम मंत्रालय पर जदयू का कब्जा बरकरार रखने में कामयाब रहे, जबकि वित्त के साथ उद्योग मंत्रालय भाजपा को देकर लोगों की अपेक्षाएं पूरी करने का बोझ भी भाजपा पर डाल दिया। नई सरकार में भाजपा नए मंत्रालयों के नाम पर उद्योग और पंचायती राज जैसे अहम मंत्रालय ही हासिल कर पाई।



नीतीश मंत्रिमंडल की पहली बैठक मंगलवार को हुई। नई सरकार के पहले दिन में विभागों का बंटवारा हो गया। गृह मंत्रालय को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पास रखा है। वहीं, उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद को वित्त, वाणिज्य समेत वे पांच विभाग दिए गए हैं जो पहले सुशील कुमार मोदी के पास थे। दूसरी, उपमुख्यमंत्री रेणु देवी को पिछड़ा कल्याण विभाग, पंचायती राज और उद्योग विभाग दिया गया है। सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में तय हुआ है कि नवगठित विधानसभा का सत्र 23 से 27 नवंबर तक बुलाया जाएगा। इसी के साथ हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतन राम मांझी को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है।



दरअसल, नतीजे के बाद जदयू के छोटा भाई बनने के बाद एकबारगी ऐसा लगा था कि नई सरकार में नीतीश का रुतबा घटेगा। हालांकि, विभागों के बंटवारे के बाद ऐसा लग नहीं रहा। जदयू पहले की तरह अहम मंत्रालय अपने पास रखने में कामयाब रही, जबकि एक-दो मंत्रालयों को छोड़ कर भाजपा को पुराने मंत्रालय ही हासिल हुए। मसलन पहले की सरकार की तरह ही जदयू ऊर्जा, संसदीय कार्य, भवन निर्माण, गृह, शिक्षा, समाज कल्याण, परिवहन, खाद्य-उपभोक्ता जैसे मंत्रालय अपने पास रखने में कामयाब रही। भाजपा की कोशिश सबसे अहम गृह मंत्रालय को अपने पास रखने की थी। हालांकि पहले की तरह ही इस बार भी यह मंत्रालय सीएम नीतीश के ही पास है।

बेरोजगारी और उद्योग के मुद्दे पर खरा उतरने का जिम्मा भाजपा पर डाला
इस चुनाव में बेरोजगारी और राज्य में उद्योग न लगना अहम मुद्दे थे। नई सरकार में पहले की तरह वित्त और राजस्व मंत्रालय भाजपा के पास है। नए मंत्रालय के तौर पर भाजपा को उद्योग मिला है। इसका सीधा सा अर्थ है कि इन मुद्दों पर लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की मुख्य जिम्मेदारी अब भाजपा को निभानी होगी। खासतौर पर राज्य में उन्नीस लाख नए रोजगार सृजित करने के साथ राज्य का राजस्व बढ़ाने की जिम्मेदारी भाजपा की होगी। गौरतलब है कि इन्हीं मुद्दों ने इस चुनाव में नीतीश और जदयू को बैकफुट पर धकेल दिया था।

भाजपा की तरह पिछड़ा-अति पिछड़ा-महादलित पर दांव
नीतीश ने भाजपा की तरह ही पिछड़ा और अतिपिछड़ा के साथ महादलित वर्ग पर दांव लगाया है। पार्टी के सभी मंत्री इन्हीं वर्गों से है। साफ है कि जदयू की भी भाजपा की तरह अपने पुराने वोट बैंक को सहेजकर आगे बढऩे की रणनीति है। गृह विभाग को पहले की तरह अपने पास रख कर नीतीश ने कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी खुद उठाते रहने का संदेश दिया है।

इस बार मंत्रिमंडल में अल्पसंख्यक नहीं
बिहार के राजनीति के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी मुस्लिम को कैबिनेट में प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। बीते चुनाव में खुर्शीद आलम अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री थे। इस बार भाजपा ने एक भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया था, जबकि जदयू के सभी 11 उम्मीदवार चुनाव हार गए। हालांकि, विधानपरिषद में जदयू के करीब आधा दर्जन मुसलमान विधायक हैं। ऐसे में भविष्य में होने वाले कैबिनेट विस्तार में मुसलमानों के प्रतिनिधित्व का विकल्प बंद नहीं हुआ है।

भाजपा के पास ज्यादातर पुराने विभाग
नई सरकार में भाजपा के हिस्से ज्यादातर पुराने विभाग आए हैं। मसलन उपमुख्यमंत्री बनाए गए तारकिशोर प्रसाद को निवर्तमान उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के वित्त समेत अन्य विभाग मिले हैं। पार्टी को पहले की तरह सड़क निर्माण, स्वास्थ्य, पिछड़ा-अति पिछड़ा, कृषि, पर्यटन, नगर विकास, कला-संस्कृति जैसे विभाग मिले हैं। भाजपा के मंगल पांडेय को स्वास्थ्य, कला एवं संस्कृति एवं पथ निर्माण विभाग दिया गया है। वह इससे पहले भी स्वास्थ्य मंत्री थे। अमरेंद्र प्रताप सिंह को कृषि, सहकारी और गन्ना विभाग  की जिम्मेदारी दी गई है। रामप्रीत पासवान को पीएचईडी विभाग, जीवेश कुमार को पर्यटन, श्रम एवं खनन विभाग और रामसूरत कुमार को राजस्व एवं विधि विभाग की जिम्मेदारी मिली है।

जदयू, हम और वीआईपी के इन लोगों को मिला मंत्री पद
नवगठित मंत्रियों में जदयू कोटे से मंत्री बने अशोक चौधरी को भवन निर्माण, समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण और विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग मिला है। जदयू के ही मेवा लाल चौधरी को शिक्षा विभाग का जिम्मा दिया गया है। शीला कुमारी को परिवहन विभाग, विजेंद्र यादव को ऊर्जा विभाग, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन, विजय चौधरी को ग्रामीण विकास विभाग, जल संसाधन, सूचना एवं जनसंपर्क, रामसूरत राय को राजस्व और कानून मंत्री की जिम्मेदारी मिली है। हम के संतोष कुमार सुमन को लघु जल संसाधन एवं अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री बनाया गया है। वहीं, वीआईपी से मुकेश साहनी को मत्स्य पालन और पशुपालन विभाग का मंत्री पद दिया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed