बिहार की अफसर बिटिया ने मुंबई में लगाई फांसी, सुसाइड नोट में लिखा- मासूम बेटे को न्याय मिले
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पति और ससुराल वालों की प्रताड़ना से तंग आकर एक बीमा कंपनी की अधिकारी ज्योति बाला ने मुंबई के वसई में खुदकुशी कर ली। बिहार की यह अफसर बिटिया ज्योति पटना के चौक शिकारपुर की रहनेवाली थी। नवंबर 2017 में उसकी शादी सालिमपुर अहरा निवासी विमल वर्मा से हुई थी, जो कि बैंक ऑफ बड़ौदा में मैनेजर है और फिलहाल उसकी पोस्टिंग उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में है। ज्योति अपनी बहन के यहां गई हुई थी, जहां उसने फांसी लगा ली।
नौ जून को ज्योति के आत्महत्या करने के बाद से ससुराल वाले फरार हैं। महाराष्ट्र पुलिस ने सुसाइड नाेट के आधार पर ज्योति के पति विमल वर्मा, ससुर विजय वर्मा, सास मीरा शरण और अन्य संबंधियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। सुसाइड नोट में ज्योति ने अपने पति और ससुराल की प्रताड़ना को खुदकुशी की वजह बताया था। सभी पर घरेलू हिंसा, प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। घटना के बाद से सभी फरार हैं।
पुलिस ने जब आरोपियों की तलाश में सालिमपुर अहरा स्थित ससुराल पहुंची तो सभी गायब थे। वहीं पीएचईडी विभाग में कार्यरत ज्योति के ननदोई और इलाहाबाद बैंक में कार्यरत ननद के घर पर भी कोई नहीं मिला। सभी ने अपने कार्यालयों में छुट्टी का आवेदन डाल रखा है। ज्योति अपने पीछे तीन माह का बच्चा छोड़ गई है। उसने अपने सुसाइड नोट में अपने मासूम बेटे के लिए न्याय की गुहार लगाई है।
पति नहीं चाहता था बच्चा, मायके जाकर ज्योति ने दिया जन्म
ज्याेति बाला के परिवार वालों के अनुसार, शादी के कुछ दिन बाद से ही पति और ससुराल वाले ज्योति को प्रताड़ित करने लगे थे। ससुराल वालों के कहने पर पति विमल भी उससे बात नहीं करता था।पिछले साल पहले जब ज्योति गर्भवती थी, तो विमल यह बच्चा नहीं चाहता था। गर्भवती होने के बाद से वह गर्भपात कराना चाहता था और ज्योति पर दबाव बना रहा था। इस प्रताड़ना के बीच ज्योति अपने मायके आ गई और तीन महीने पहले एक बेटे को जन्म दिया।
गर्भवती होने के बाद से अपने ससुराल वालों की प्रताड़ना सहते-सहते ज्योति बहुत ज्यादा तनाव में रहने लगी थी। कुछ दिन पहले ज्योति को महाराष्ट्र में रहने वाली उसकी बहन अपने साथ ले गई थी, ताकि उसका मन थोड़ा बहल जाए। बहन को क्या पता था कि ज्योति इतना बड़ा और घातक कदम उठा लेगी।
प्रतिभाशाली थी ज्योति, अपने बूते बनाया था मुकाम
ज्योति पढ़ने में काफी तेज थी और अपने बूते उसने प्रतियोगी परीक्षा में बाजी मारी थी। द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी में जॉब लगने के बाद वह विभागीय परीक्षा देती रही और उसका प्रमोशन होता रहा। वह कंपनी में प्रशासनिक पदाधिकारी थी। उसकी मौत से परिवार के लोगों के अलावा उसके साथ काम करने वाले सहकर्मी भी दुखी हैं।