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Bihar : चुनावी रणनीतिकार से जनसुराज के सूत्रधार बने प्रशांत किशोर के बारे में जानिए; अनशन पर क्यों बैठे?

Mon, 06 Jan 2025 12:11 PM IST
Aditya Anand आदित्य आनंद
Updated Mon, 06 Jan 2025 12:11 PM IST
सार

Prashant Kishor : जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में व्याप्त भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ अपनी मुहिम को और मजबूती से जारी रखेंगे। यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि यह बिहार की खराब व्यवस्था के खिलाफ है।

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Bihar: Know about Prashant Kishore who became the architect of Jansuraj: Demonstration, BPSC, Bihar News
आमरण अनशन पर बैठे प्रशांत किशोर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चुनावी रणनीतिकार से जनसुराज के सूत्रधार बने प्रशांत किशोर की चर्चा एक बार फिर से पूरे देश में हो रही है। चर्चा का कारण उनका गिरफ्तार होना है। पटना पुलिस ने सोमवार सुबह प्रतिबंधित क्षेत्र में धरना प्रदर्शन करने के आरोप प्रशांत किशोर को गिरफ्तार किया। प्रशांत किशोर पिछले कुछ दिनों से नीतीश सरकार और बिहार लोक सेवा आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। दो जनवरी को वह गांधी मैदान में आमरण अनशन पर बैठे थे। पांच जनवरी को उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद रविवार अहले सुबह करीब चार बजे पटना पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया तो सियासी गलियारे में हड़कंप मच गया। प्रशांत किशोर के समर्थक और जनसुराज पार्टी का आरोप है कि नीतीश सरकार ने आंदोलन से डर गई इसलिए ऐसा किया। पीके शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। इससे विधि व्यवस्था भी प्रभावित नहीं हुई थी। लेकिन, अचानक उन्हें गिरफ्तार किया गया। छह घंटे तक पटना जिले में घुमाया गया। इसके बाद उन्हें जेल भेजने के लिए कोर्ट में पेश किया जा रहा है। इन सब घटनाओं के बाद लोग प्रशांत किशोर के बारे में सुर्खियों में आ गये हैं। आइये जानते हैं प्रशांत किशोर के बारे में...

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प्रशांत किशोर ने राजनीति में ब्रांडिंग का दौर लाया
34 साल की उम्र में संयुक्त राष्ट्र की नौकरी छोड़कर भारत आये बक्सर निवासी प्रशांत किशोर जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े तब उन्हें आम जनता नहीं जानती थी। प्रशांत किशोर ने राजनीति में ब्रांडिंग का दौर लाया। जब नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताया तब प्रशांत किशोर अपने काम में जुट गये। लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने से पहले ही प्रचार का दौर शुरू हुआ। ऐसा प्रचार शायद ही कभी नहीं देखा गया था।  साल 2014 में प्रशांत किशोर ने सिटीजन फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (कैग) की स्थापना की थी। इसे भारत की पहली राजनीतिक एक्शन कमिटी माना जाता है। यह एक एनजीओ है जिसमें आईआईटी और आईआईएम में पढ़ने वाले युवा प्रोफेशनल्स शामिल थे। पीके को नरेंद्र मोदी की उन्नत मार्केटिंग और विज्ञापन अभियान जैसे कि चाय पर चर्चा, 3डी रैली, रन फॉर यूनिटी, मंथन का श्रेय दिया जाता है। 2014 में जब भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तब पहली बार प्रशांत किशोर सुर्खियों में आये। लोग कहने लगे पीएम मोदी की शानदार जीत में प्रशांत किशोर का अहम योगदान रहा। हालांकि कुछ दिन बाद ही प्रशांत किशोर और भाजपा के बीच की दूरी बढ़ने लगे। 

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जनसुराज के कार्यकारी अध्यक्ष मनोज भारती के साथ प्रशांत किशोर। - फोटो : अमर उजाला

प्रशांत किशोर और नीतीश कुमार के बीच भी दूरियां बढ़ने लगी
2015 में प्रशांत किशोर ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए नीतीश कुमार- लालू यादव के महागठबंधन का साथ थामा था। उन्हें सफलता मिली। इसके बाद 2017 में वह वाईएसआर कांग्रेस से जुड़ गए। पार्टी के प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने किशोर की मुलाकात पार्टी के बड़े नेताओं से करवाई थी। हालांकि बिहार में जिस रणनीति ने काम किया था वह आंध्र प्रदेश में कामयाबी हासिल नहीं कर पाई।  उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर काम किया था लेकिन यहां भी पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद वह राजनीति में आये। सीएम नीतीश कुमार की पार्टी में शामिल हुए। पीके को बड़ा पद भी दिया गया। कुछ दिन बाद ही प्रशांत किशोर और नीतीश कुमार के बीच भी दूरियां बढ़ने लगी। चुनावी राजनीति में अपनी महारत दिखाने वाले प्रशांत किशोर पांडेय को जदयू से निकाल दिया गया है। 

गांधी जयंती के दिन जनसुराज पार्टी बनाई, चुनाव लड़ने का किया एलान
इसके बाद 2021 में तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी ने उन्हें पश्चिम बंगाल में विधानसभा सभा की जिम्मेदारी सौंपी। पीके ने भी इस चुनाव में पीएम मोदी और भाजपा के खिलाफ पूरी ताकत झोंक दी। ममता बनर्जी फिर से मुख्यमंत्री बन गई। इस बार फिर से पीके की चर्चा पूरे देश में हुई। कुछ लोगों ने तो उन्हें चुनाव जीताने तक का श्रेय दे दिया। इसके बाद पीके में बिहार में सक्रिया राजनीति करने का फैसला किया। वह बिहार लौटकर आये। दो अक्टूबर 2022 को गांधी जयंती के अवसर पर उन्होंने चंपारण से अपनी पदयात्रा शुरू की। दो साल तक बिहार के गांव-गांव घूमे और लोगों से मिले। दो साल बाद यानी दो अक्टूबर 2024 को गांधी जयंती के ही दिन अपनी नई पार्टी बनाई। इनका नाम रखा जनसुराज। पार्टी में शिक्षा, चिकित्सा, प्रशासन समेत कई क्षेत्रों के दिग्गज जुड़े। प्रशांत किशोर ने 2025 विधानसभा चुनाव में जनसुराज पार्टी के लड़ने का एलान तो किया ही साथ ही 220 से अधिक सीटों पर जीत का दावा भी कर दिया। लेकिन, विधानसभा चुनाव से पहले चार सीटों पर उपचुनाव हुआ। इसमें पीके की पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। 

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प्रशांत किशोर आमरण अनशन पर बैठे थे। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

अनशन पर बैठकर तेजस्वी और राहुल से की यह अपील
2025 की शुरुआत उन्होंने छात्र आंदोलन से की। बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं प्रारंभिक परीक्षा दे चुके अभ्यर्थी एग्जाम रद्द कराने की मांग लेकर पिछले 15 दिनों से गर्दनीबाग में धरना प्रदर्शन कर रहे थे। विपक्ष के नेताओं की तरह प्रशांत किशोर भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। छात्रों से मिलने गर्दनीबाग धरनास्थल भी गये। उन्होंने बीपीएससी से परीक्षा रद्द कराने की मांग की। बात नहीं बनी तो आमरण अनशन का एलान किया। इसके बाद दो जनवरी से वह अनशन पर बैठे थे। प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में व्याप्त भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ अपनी मुहिम को और मजबूती से जारी रखेंगे। यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि यह बिहार की खराब व्यवस्था के खिलाफ है। मैं तमाम राजनीतिक पार्टी से ये अपील करता हूं कि चाहे वो तेजस्वी यादव हों, राहुल गांधी हों, या कोई और नेता, वे हमारे साथ आएं। मैं उनके पीछे बैठकर इस आंदोलन का समर्थन करूंगा। अगर युवा तय कर लें कि वे नेता इसका नेतृत्व करेंगे, तो मैं पीछे हटने के लिए तैयार हूं। प्रशांत किशोर ने साफ़ कहा, हमारा संघर्ष एक युवा नेतृत्व वाली जन शक्ति के रूप में जारी रहेगा। सरकार चाहे कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, जन बल से अधिक कोई बल नहीं है। इन युवाओं की कमिटमेंट मेरी अपेक्षा से कहीं ज्यादा मजबूत है। उन्होंने बिहार के लोगों से आह्वान करते हुए कहा, यह लड़ाई सिर्फ बीपीएससी की नहीं, यह बिहार की व्यवस्था को सुधारने की है। युवाओं का इस संघर्ष में साथ देना आवश्यक है। हम सिर्फ गांधी मैदान में बैठकर नहीं, बल्कि सत्याग्रह के मार्ग पर चलकर बिहार के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 

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