बिहार में बाढ़ का कहर: 14 जिलों के 43.64 लाख लोग प्रभावित, 951 सामुदायिक किचन में मिल रहा भोजन
बिहार में गंगा, पुनपुन समेत कई नदियों का जलस्तर को घट रहा है। लेकिन, खतरा बढ़ने लगा है। लोग परेशान हैं। बीमार पड़ रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इधर, सरकार का कहना है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों तक मदद पहुंचाई जा रही है।
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बिहार के कई जिलों में बाढ़ के हालात के बीच राज्य सरकार की ओर से राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, अब तक 33.88 लाख बाढ़ प्रभावित लोगों को दो समय का भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके लिए राज्य में 951 कम्युनिटी किचन संचालित किए जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में 15 राहत शिविर चलाए जा रहे हैं। इनमें 11,255 बाढ़ प्रभावित लोगों के रहने, भोजन और चिकित्सा समेत अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रभावित परिवारों के बीच करीब 2.57 लाख पॉलीथीन शीट और 40,600 ड्राई राशन पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।
1,932 नावें लोगों की आवाजाही में जुटीं
बाढ़ के कारण प्रभावित इलाकों में आवागमन को आसान बनाने के लिए 1,932 नावों का परिचालन किया जा रहा है। वहीं, मवेशियों के लिए अब तक 6,692 क्विंटल पशुचारा वितरित किया गया है। राहत एवं बचाव अभियान को मजबूत करने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में एसडीआरएफ की 27 और एनडीआरएफ की 10 टीमें तैनात हैं।
14 जिलों के 85 प्रखंडों में बाढ़ का असर
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बिहार के 14 जिलों के 85 प्रखंडों की 527 ग्राम पंचायतों में करीब 43.64 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया और अरवल शामिल हैं।
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कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर
गंडक, कोसी, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा समेत कई प्रमुख नदियां विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। हालांकि, गंडक और कोसी का जलस्राव फिलहाल स्थिर बताया गया है। प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
अगले दो दिनों में बारिश की संभावना
मौसम केंद्र के अनुसार, अगले दो दिनों में राज्य के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। ऐसे में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। राहत और बचाव कार्यों को जरूरत के अनुसार आगे बढ़ाया जा रहा है।