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Hindi News ›   Bihar ›   Bihar: First train runs on new ₹2,400-crore rail bridge; Kosi Express becomes the first to cross the Ganga.

बिहार: 2400 करोड़ के नए रेल पुल पर दौड़ी पहली ट्रेन, कोशी एक्सप्रेस ने सबसे पहले पार की गंगा

Mon, 05 Oct 2026 07:00 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय Published by: शबाहत हुसैन Updated Mon, 05 Oct 2026 07:00 PM IST
सार

सिमरिया-मोकामा के बीच करीब 2400 करोड़ रुपये की लागत से बने नए डबल ट्रैक रेल पुल पर नियमित परिचालन शुरू हो गया। पहली ट्रेन पूर्णिया-हटिया कोशी एक्सप्रेस रही। नए पुल से रेलखंड पर तीन लाइनों की उपलब्धता और यातायात क्षमता बढ़ेगी।

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Bihar: First train runs on new ₹2,400-crore rail bridge; Kosi Express becomes the first to cross the Ganga.
कोशी एक्सप्रेस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले रेल नेटवर्क के लिए सोमवार का दिन महत्वपूर्ण रहा। गंगा नदी पर सिमरिया और मोकामा के बीच करीब 2400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार नए डबल ट्रैक रेल पुल पर नियमित ट्रेन परिचालन शुरू हो गया। रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) की अनुमति मिलने के बाद नवनिर्मित पुल से सबसे पहले 18625 पूर्णिया-हटिया कोशी एक्सप्रेस गुजरी। ट्रेन के नए पुल से गुजरते ही यात्रियों और स्थानीय लोगों में उत्साह देखने को मिला।

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दशकों पुराने राजेंद्र सेतु के समानांतर बने इस आधुनिक रेल पुल के शुरू होने से सिमरिया-मोकामा रेलखंड की क्षमता बढ़ेगी। पुराने राजेंद्र सेतु पर रेल परिचालन जारी रहने के साथ नए पुल पर दोहरी रेल लाइन उपलब्ध हो गई है। इससे यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों के परिचालन में भी राहत मिलने की उम्मीद है।

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कोशी एक्सप्रेस ने सबसे पहले पार किया गंगा
सोमवार को नए पुल से गुजरने वाली पहली ट्रेन पूर्णिया-हटिया कोशी एक्सप्रेस रही। ट्रेन ने राजेंद्र पुल स्टेशन से हाथीदह स्टेशन तक की दूरी करीब 13 मिनट में तय की। नए पुल से पहली ट्रेन गुजरते देख यात्रियों ने मोबाइल फोन से तस्वीरें और वीडियो बनाए। नए पुल से पहली ट्रेन का परिचालन उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच रेल संपर्क को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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1959 में बना था राजेंद्र सेतु
सिमरिया-मोकामा के बीच वर्ष 1959 में तत्कालीन भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने देश के पहले रेल-सह-सड़क पुल का उद्घाटन किया था। छह दशक से अधिक समय तक राजेंद्र सेतु उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच महत्वपूर्ण संपर्क का माध्यम रहा। समय के साथ पुल पुराना होने और रेल यातायात तथा मालगाड़ियों का दबाव बढ़ने के कारण समानांतर नए रेल पुल की जरूरत महसूस की जा रही थी। नए डबल ट्रैक पुल के शुरू होने से इस रेलखंड को अतिरिक्त क्षमता मिल गई है।

2018 में शुरू हुआ था निर्माण
नए रेल पुल और इससे जुड़ी परियोजना का निर्माण वर्ष 2018 में शुरू हुआ था। निर्माण की जिम्मेदारी इरकॉन की ओर से एजेंसी को दी गई थी। वर्ष 2020 के बाद काम में तेजी आई और जनवरी 2026 में पुल का निर्माण पूरा कर लिया गया। इसके बाद परियोजना रेलवे को सौंप दी गई। सीआरएस निरीक्षण के बाद नियमित परिचालन की अनुमति मिली। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी नए पुल को बिहार में निर्बाध रेल यात्रा और उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना बताया है।

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15.5 किलोमीटर लंबी है पूरी परियोजना
पूरी परियोजना करीब 15.5 किलोमीटर लंबी है। इसमें गंगा नदी पर लगभग 1.9 किलोमीटर लंबा मुख्य रेल पुल शामिल है। पुल में कुल 17 स्टील स्पैन हैं। इसके अलावा करीब 3.6 किलोमीटर रेल वायडक्ट, आठ लघु पुल, दो रोड ओवरब्रिज और तीन रेल ओवर रेल का निर्माण किया गया है। नया पुल मौजूदा राजेंद्र सेतु के समानांतर पटना छोर की ओर करीब 50 मीटर की दूरी पर बनाया गया है। निर्माण के दौरान इस बात का ध्यान रखा गया कि पुराने राजेंद्र सेतु के एप्रोच में न्यूनतम बदलाव करना पड़े।

तीन रेल लाइनों से बढ़ेगी परिचालन क्षमता
नए पुल के चालू होने के बाद पुराने राजेंद्र सेतु पर भी रेलवे परिचालन जारी रहेगा। इस तरह सिमरिया-मोकामा रेलखंड पर कुल तीन रेल लाइनों की उपलब्धता हो गई है। इससे ट्रेनों को पास कराने, मालगाड़ियों के संचालन और व्यस्त समय में रेल यातायात नियंत्रित करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। उत्तर बिहार में हाथीदह, टाल और रामपुर डुमरा तथा दक्षिण दिशा में राजेंद्र पुल और बरौनी सहित आसपास के रेल नेटवर्क को इसका सीधा लाभ मिलने की संभावना है।

रेल यातायात 2.5 गुना तक बढ़ने का अनुमान
रेलवे के अनुसार, नए पुल के शुरू होने से उत्तर-दक्षिण बिहार के साथ पूर्वोत्तर भारत की रेल कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। यात्री और मालगाड़ियों की क्षमता बढ़ने के साथ रेलवे ट्रैफिक में करीब 2.5 गुना वृद्धि होने का अनुमान है। माल ढुलाई का समय और लागत घटने से कारोबारियों, उद्योगों और जरूरी सामान की आवाजाही को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे बिहार की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है।

65 से 70 मीटर गहराई तक मजबूत नींव
नए पुल को आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक से तैयार किया गया है। इसके पाए जमीन के भीतर करीब 65 से 70 मीटर की गहराई तक ले जाए गए हैं, ताकि बाढ़ और भूकंप जैसी परिस्थितियों में पुल की मजबूती बरकरार रहे। पुल में 32 मीटर के दो, 123 मीटर के 13 और 110 मीटर का एक स्पैन शामिल है। 123 मीटर वाले स्पैन की क्षमता करीब 1450 मीट्रिक टन बताई गई है।

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