Bihar: कोसी निगल रही है जमीन, उजड़ने लगे सैकड़ों घर; सालाना 50 लाख खर्च के बाद भी विस्थापित हो रहे हैं लोग
कोसी और बागमती नदी में हो रहे कटाव के कारण प्रत्येक दिन दो से तीन फीट जमीन नदी के आगोश में समा रही है। इस वर्ष भी कोसी नदी किनारे हो रहे कटाव की रफ्तार तेज हो गई है। इसके कारण ग्रामीण डरे सहमे हैं और पलायन करने पर मजबूर हैं।
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सात नदियों से घिरे खगड़िया जिले के तीन ऐसे प्रखंड हैं, जहां के लोग नदियों के दंश झेल रहे। इन जगहों पर कटाव के कारण हर वर्ष सैकड़ो परिवार विस्थापित होते हैं, जो अपने घर को छोड़कर खेती-बाड़ी से भी दूर हो जा रहे हैं। दरअसल, खगड़िया जिले के बेलदौर प्रखंड के 4 पंचायत तेलीहार, डुमरी, बलैठा, इतमादि, पचाठ एवं गोगरी प्रखंड के 2 पंचायत सहरौन और बिरबास सहित चौथम प्रखंड के सिसवा आदि जगहों में हर वर्ष कोसी और बागमती नदी अपना रौद्र रूप धारणधारण करती है। इसके कारण इन इलाकों के उपजाऊ जमीन और लोगों के घर नदी में समा रहे हैं। जो हर वर्ष दर्जनों परिवार को बेघर कर रहा है।
प्रत्येक दिन 2 से 3 फीट का कटाव, भयभीत हैं ग्रामीण
कोसी और बागमती नदी में हो रहे कटाव के कारण प्रत्येक दिन दो से तीन फीट जमीन नदी के आगोश में समा रही है। इस वर्ष भी कोसी नदी किनारे हो रहे कटाव की रफ्तार तेज हो गई है। इसके कारण ग्रामीण डरे सहमे हैं और पलायन करने पर मजबूर हैं। हालांकि बाढ़ प्रमंडल-2 की मानें तो प्रत्येक वर्ष कटावनिरोधक कार्य किया जाता है। इस बार भी कटाव स्थल का चयन कर वहां पर बचाव कर किया जा रहा है।
बीपी मंडल सेतु भी बना है अभिशाप
कोसी और बागमती नदी पर बने बीपी मंडल सेतु (डुमरी पुल) भी इन इलाकों के लिए अभिशाप बना है। यह पुल एक तरफ जहां लोगों के लिए सुख सुविधा का साधन बना है। वहीं ये पुल बेलदौर प्रखंड के तेलीहार, डुमरी, बलैठा, इतमादि एवं गोगरी प्रखंड के सहरौन और बिरबास के लिए प्रत्येक वर्ष मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। बताया जा रहा कि सालाें पहले सोनवर्षा घाट के समीप जिंदा बागमती नदी को सील कर उसकी बहाव धारा को बदल दिया गया था। इसके कारण कोसी में पानी का बहाव तीव्र होता गया। जानकारों का कहना है अगर बागमती की प्राकृतिक धारा से छेड़छाड़ नहीं किया जाता तो आज सैकड़ों लोगों के आशियाने नहीं उजड़ते।
सालाना 50 लाख खर्च के बाद भी स्थिति भयावह
विभाग की मानें तो खगड़िया में कोसी नदी और बागवती नदी के कटाव की रोकथाम के लिए प्रत्येक वर्ष करीब 50 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। बावजूद कटाव की स्थिति जस की तस बनी हुई है। कोसी कटाव के रोकथाम को लेकर हर वर्ष कटाव निरोधात्मक कार्य या फिर फ्लड फाइटिंग के नाम पर सरकारी रकम खर्च करना ढाक के तीन पात साबित हो रहा है। बाढ़ प्रमंडल-2 के जूनियर इंजीनियर मनिकांत पटेल बताते हैं कि कटाव निरोधक कार्य तेजी से किया जा रहा है। पचाठ, मुनिटोला, गाँधी नगर और इत्मादी में कटाव हो रहा है। जिसपर विभाग नजर बनाए हुए है। इधर जानकारों की माने तो जबतक इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है तबतक इन इलाकों के लोग ऐसे ही बेघर होते रहेंगे।