Bihar News : विश्वविद्यालय में अंधेरा छाया, बिजली विभाग ने आपूर्ति पर लगाई रोक; बताया 15 करोड़ दस लाख का बकाया
Tilka Manjhi Bhagalpur University : बिजली विभाग ने टीएमबीयू की बिजली आपूर्ति पर रोक लगा दी है। बिजली विभाग ने विश्वविद्यालय प्रशासन को 15 करोड़ 10 लाख रुपये का बकाया बिल होने के बाद यह कार्रवाई की है।
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तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में अँधेरा कायम हो गया है। बिजली विभाग ने टीएमबीयू की बिजली आपूर्ति पर रोक लगा दी है। बिजली विभाग ने विश्वविद्यालय प्रशासन को 15 करोड़ 10 लाख रुपये का बकाया बिल होने के बाद यह कार्रवाई की है। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन, पुस्तकालय, सभी विभागों और शाखाओं की बिजली कट जाने से छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिजली विभाग का कहना है कि टीएमबीयू ने पिछले कई वर्षों से बिजली बिल का भुगतान नहीं किया है।
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कुलपति का आरोप पहले मिले जमीन का किराया
इस संबंध में टीएमबीयू के कुलपति प्रोफेसर जवाहरलाल का कहना है कि बिजली विभाग का पावर सब-स्टेशन नाथनगर में विश्वविद्यालय की जमीन पर स्थित है। कुलपति का आरोप है कि विभाग को पहले इस जमीन का 30 वर्षों का किराया चुकाना चाहिए, इसके बाद ही बिजली बिल का भुगतान किया जाएगा। कुलपति ने बिजली विभाग पर रंगदारी का आरोप लगाते हुए कहा कि परीक्षाओं, गर्मी के मौसम और आगामी महामहिम के कार्यक्रम के समय बिजली काटी गई है।
तीसरी बार बिजली कटौती, मामला कोर्ट में
टीएमबीयू के कर्मियों का कहना है कि डेढ़ साल में यह तीसरी बार है जब बिजली विभाग ने विश्वविद्यालय की बिजली आपूर्ति ठप कर दी है। बिजली कटौती के कारण विश्वविद्यालय के पुस्तकालय और विभागों में छात्रों की उपस्थिति काफी कम हो गई है। पानी की किल्लत और भीषण गर्मी से विद्यार्थियों को अतिरिक्त मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है और जल्द ही इस पर सुनवाई होनी है। इसके बावजूद विभाग द्वारा बिजली काटे जाने से छात्रों में आक्रोश देखा जा रहा है।
बिजली विभाग ने नहीं दिया जवाब
इस संबंध में पूछे जाने पर बिजली विभाग के अधिकारी मुकरने लगे। संबंधित अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई विभागीय आदेशों के तहत की गई है। अधीक्षण अभियंता ने भी भागलपुर से बाहर होने का हवाला देते हुए कुछ भी कहने से मना कर दिया।
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राजभवन के हस्तक्षेप की जरूरत
छात्र छात्राओं का कहना है कि विश्वविद्यालय और बिजली विभाग के बीच इस विवाद पर अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। ऐसे में छात्रों और कर्मचारियों की समस्याओं को देखते हुए राजभवन से मामले का संज्ञान लेने की जरूरत है।