भाजपा-जदयू खोलेंगे एक दूसरे के अतीत के पन्ने
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बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा और जदयू की अगुवाई वाला गठबंधन एक दूसरे को घेरने केलिए अतीत के पन्ने खोलेंगे।
भाजपा गठबंधन जहां अतीत में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के बीच एक दूसरे को ले कर की गई सख्त टिप्पणियों की याद दिला कर विरोधी गठबंधन पर निशाना साधेगा।
वहीं जदयू की अगुवाई वाला गठबंधन गुजरात में वर्ष 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान लोजपा प्रमुख राम विलास पासवान की सूबे केतत्कालीन सीएम और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई कठोर टिप्पणियों की याद दिला कर इस गठबंधन को बेमेल दलों का जमावड़ा करार देगी।
भाजपा नीतीश-लालू के तो जदयू पासवान के पर उठाएगा सवाल
दरअसल बिहार विधानसभा चुनाव से पूर्व जहां सालों तक एक दूसरे पर सियासी निशाना साधने वाले लालू और नीतीश एक हो गए हैं, वहीं पासवान लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मोदी का नेतृत्व स्वीकार कर चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि पासवान ने उस दौरान इस दंगे के विरोध में वाजपेयी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। भाजपा के रणनीतिकारों को लगता है कि इस नए मिलन पर मतदाताओं को लालू के कार्यकाल के दौरान के कथित जंगलराज की याद दिला कर एक बड़े वर्ग को अपने साथ जोड़ा जा सकता है।
वहीं जदयू के रणनीतिकारों को लगता है कि पासवान की गुजरात दंगे के दौरान मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणियों के आधार पर अल्पसंख्यक मतदाताओं को राजग के खिलाफ गोलबंद किया जा सकता है। इस दृष्टि से दोनों ही गठबंधन ने एक दूसरे केखिलाफ आक्रामक प्रचार की रणनीति तैयार की है।
निशाने पर नीतीश-लालू
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा गठबंधन ने नीतीश-लालू के विरोधी मोर्चे कई मुद्दों पर घेरने की रणनीति बनाई है। इसमें सबसे प्रमुख मुद्दा नीतीश का कथित जंगलराज के प्रतीक लालू के साथ हाथ मिलाना है।
पार्टी इसे अवसरवादिता का जामा पहनाएगी और यह भी याद दिलाएगी कि सत्तारूढ़ गठबंधन के भाजपा के हटने के बाद सूबे की न केवल कानून व्यवस्था चरमराई है, बल्कि विकास भी अवरुद्घ हुआ है। इसके अलावा पार्टी जातिगत समीकरण को साधने पर भी ध्यान दे रही है।
इसके तहत जहां उसकी निगाहें राजद केमजबूत वोट बैंक यादव बिरादरी में सेंध लगाने और पासवान-जीतन राम मांझी के सहारे दलित वोट बैंक पर कब्जा करने पर है। उधर भाजपा विरोधी गठबंधन में नीतीश अपनी अलग पहचान के प्रति खास सतर्कता बरत रहे हैं।
इस क्रम में उनका सारा ध्यान अपनी सरकार की नौ साल की उपलब्धियों को गिनाने के साथ-साथ अपना सियासी ब्रांड वैल्यु कायम रखने की है।
यही कारण है कि जदयू ने नीतीश के लिए अपने प्रचार का अलग से खाका तैयार किया है। इसके तहत न केवल सभी नारों में नीतीश के नेतृत्व की बात की जानी है, वहीं इस क्रम में उनेकी उपलब्धियां गिनाने की भी योजना है।