Bihar election result 2020 : एग्जिट पोल के दावे बिहार में फिर फेल, कांटे की टक्कर, फिर एनडीए सरकार
- एग्जिट पोल के दावे बिहार में फिर फेल, एकतरफा नहीं रही लड़ाई।
- लोजपा ने जदयू और एआईएमआईएम ने महागठबंधन को नुकसान पहुंचाया।
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विस्तार
बिहार की सियासी पिच पर टी-20 की तर्ज पर हुए सांस रोक देने वाले मुकाबले में एक बार फिर बाजी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के हाथ लगी। बिहार के मतदाताओं ने तेजस्वी के युवा नेतृत्व वाले विपक्षी महागठबंधन की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुआई वाले एनडीए के अनुभवी नेतृत्व को वरीयता दी।
मंगलवार देर रात आए नतीजों में एनडीए ने 125 सीटें जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। राजद के नेतृत्व वाला महागठबंधन 110 सीटों पर सिमट गया। वहीं, एग्जिट पोल फिर बिहार की जनता का मन भांपने में नाकाम साबित हुए।
कोरोना संक्रमण के चलते अभूतपूर्व परिस्थिति में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम की तस्वीर आधी रात के बाद साफ हो सकी। एनडीए ने भले नीतीश की अगुवाई में चुनाव लड़ा लेकिन उनकी खुद की पार्टी जदयू को पिछले विधानसभा चुनाव से कम सीटें मिली हैं। जबकि वोट प्रतिशत घटने के बावजूद भाजपा की सीटें बढ़ी हैं। वहीं, राजद 75 सीटों पर जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है।
राजद के सहयोगी वामदलों को फायदा हुआ जबकि कांग्रेस नुकसान में रही। कोरोनाकाल के पहले विधानसभा चुनाव में रोमांच से भरे मुकाबले में एआईएमआईएम ने विपक्षी महागठबंधन के जीत के सपने को चूर कर दिया। वहीं, एनडीए की पुरानी सहयोगी लोजपा ने खुद को ‘शहीद’ कर जदयू को तीसरे नंबर पर धकेलकर भाजपा का ‘छोटा भाई’ बनने पर मजबूर कर दिया। नतीजे पर संशय देर रात तक जारी रहा। सत्ता की चाबी कभी एनडीए के हाथ जाती दिखी तो कभी महागठबंधन के।
एग्जिट पोल के नतीजे फिर गलत
15 साल सरकार में रहने और कोरोनाकाल की कठिन परिस्थितियों के बावजूद नीतीश की अगुवाई में एनडीए को वैसा नुकसान नहीं उठाना पड़ा, जैसा एग्जिट पोल में दिखाया जा रहा था। जदयू और नीतीश के खिलाफ नाराजगी के बावजूद सरकार विरोधी वोट बांटने की रणनीति कामयाब रही। चुनाव प्रबंधन और सियासी समीकरण ऐसे बने कि बिहार में करीब 20 साल बाद भाजपा बड़े भाई की भूमिका में आ गई। वहीं, चुनाव से ठीक पहले जीतनराम मांझी की हम और मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी के महागठबंधन से अलग होने का नुकसान राजद को उठाना पड़ा।
कोरोना के चलते मतगणना में देरी
कोरोना के चलते नए तौर-तरीके से हो रही मतगणना में नतीजे आने में आधी रात हो गई। सुबह आठ बजे से शुरू मतगणना के शुरुआती रुझान में एनडीए आगे दिखा, लेकिन शाम ढलने के बाद तस्वीर बदल गई। रात आठ बजे तक एनडीए 134 से घटकर 122 के आसपास टिका रहा। रात आठ बजे तक 18-20 सीटें ऐसी थीं जहां वोटों का अंतर एक हजार से कम था। वहीं, 40 सीटों पर अंतर 4,000 से कम था।
सक्रिय हुए एनडीए के नेता
एग्जिट पोल के नतीजों से निराश एनडीए के नेता परिणाम की तस्वीर साफ होने साथ ही सक्रिय हो गए। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नीतीश से फोन पर बात की। वहीं, भाजपा के बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव, डिप्टी सीएम सुशील मोदी सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता नीतीश के आवास पहुंचे।
सीमांचल में ओवैसी ने बिगाड़ा महागठबंधन का खेल
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने सीमांचल में महागठबंधन का नुकसान किया है। एआईएमआईएम बसपा और रालोसपा के साथ चुनाव लड़ी और 20 सीटों पर प्रत्याशी उतारे। इनमें पांच सीटों पर उसके प्रत्याशी जीते हैं। पार्टी को करीब सवा फीसदी वोट मिले, इनमें ज्यादातर मुस्लिम बहुल क्षेत्र के हैं। इसका सीधा नुकसान राजद और कांग्रेस को माना जा रहा है।
भाजपा के वोट घटे, सीटें बढ़ी
2019 लोकसभा चुनाव के मुकाबले भाजपा का वोट शेयर करीब पांच फीसदी कम हुआ है। भाजपा को आम चुनाव में 24.06 फीसदी वोट मिले थे। जबकि, इस बार 19.3 फीसदी वोट मिले हैं। वहीं, 2015 के विस चुनाव के मुकाबले उसका वोट 5.12 फीसदी कम हुआ है, लेकिन सीटें बढ़ी हैं।
बड़े चेहरे जीते
बिहार चुनाव में बड़े चेहरे के रूप में तेज प्रताप यादव, तेजस्वी यादव, जीतनराम मांझी, श्रेयसी सिंह, अनंत सिंह, नंदकिशोर यादव ने जीत दर्ज की है।
बड़े चेहरे हारे
वहीं पुष्पम प्रिया, लव सिन्हा, सुभाषिनी बुंदेला, मंजू वर्मा, अब्दुल बारी सिद्दीकी, चंद्रिका राय, पप्पू यादव, लवली आनंद चुनाव हार गए हैं।
महिलाओं का ज्यादा मतदान निर्णायक
इस बार 57.05 फीसदी वोटिंग हुई, जबकि 2015 में 56.6 फीसदी लोगों ने वोट दिया था। 11 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां महिलाओं का मतदान 70 फीसदी से ज्यादा रहा और 141 सीटों पर 60 फीसदी से ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया। वहीं, पुरुष मतदाता पीछे रहे। शराबबंदी और केंद्र की उज्ज्वला जैसी योजनाओं से एनडीए को फायदा मिला।
| मतदाता | 2020 | 2015 | 2010 |
| महिला | 59.4 | 60.5 | 54.5 |
| पुरुष | 54.7 | 53.3 | 51.1 |
(आंकड़े प्रतिशत में)
महिलाओं के मतदान का प्रतिशत 70 फीसदी पार, पुरुष वोटर पिछडे़
दिलचस्प तथ्य यह है कि 2020 के बिहार चुनाव में तीनों चरणों में कुल वोटिंग 57.05 फीसदी हुई, जबकि 2015 में कुल वोटिंग 56.6 फीसदी रही थी। 2020 में 11 विधानसभा सीटें ऐसी रहीं, जहां महिलाओं के मतदान का प्रतिशत 70 फीसदी से ज्यादा रहा और 141 सीटें ऐसी थीं, जहां पर 60 फीसदी से ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया। वहीं, पुरुष मतदाता महिलाओं से इस मामले में पीछे रहे। सिर्फ 37 विधानसभा सीटें ही ऐसी रहीं, जहां पुरुष मतदान 60 फीसदी से ज्यादा रहा। किसी सीट पर पुरुष मतदान 70 फीसदी पार नहीं जा पाया।
एनडीए को बढ़त : मोदी पर भरोसा, जंगलराज का डर
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जनता का भरोसा
- युवा तेजस्वी के मुकाबले अनुभवी मोदी-नीतीश पर यकीन
- उज्ज्वला, मुफ्त शौचालय, नकदी राहत जैसी केंद्रीय योजनाएं
- 15 साल पूर्व लालू-राबड़ी के समय के जंगलराज का भय
- महिलाओं और मौन मतदाताओं का समर्थन
गठबंधन पिछड़ा : अनुभव की कमी, कोई रोडमैप नहीं
- लालू की गैरमौजूदगी और तेजस्वी में अनुभव की कमी
- आधार न होने के बावजूद कांग्रेस को जरूरत से ज्यादा सीटें
- सहयोगी दलों को जाना, विपक्ष को एकजुट न कर पाना
- अनुभवी नेताओं की कमी, सरकार विरोधी मत बांध नहीं सके
- कई विपक्षी दलों का अलग-अलग मोर्चा