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बिहार चुनाव: भाजपा की सीटें तो बढ़ीं, लेकिन घट गया वोट शेयर, राजद-कांग्रेस-लोजपा को हुआ यह फायदा

Wed, 11 Nov 2020 06:57 PM IST
कुमार संभव कुमार सम्भव जैन, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
कुमार सम्भव जैन, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार संभव Updated Wed, 11 Nov 2020 06:57 PM IST
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बिहार विधानसभा चुनाव 2020 - फोटो : अमर उजाला

बिहार का राजनीतिक भविष्य तय हो चुका है। 243 विधानसभा सीटों के नतीजे आ गए हैं और जनादेश ने भाजपा-जदयू की जोड़ी पर भरोसा जताया। साथ ही, नीतीश कुमार को एक और मौका दे दिया। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो भाजपा 74 सीटें जीतकर राज्य में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी तो बनी, लेकिन उसका वोट शेयर करीब 5 प्रतिशत घट गया। वहीं, 75 सीटें जीतने वाली राजद वोट शेयर में भी सबसे आगे रही, लेकिन उसे पिछले चुनाव के मुकाबले 5 सीटों का नुकसान हो गया। वैसे बिहार में साल 2005 से अब तक लगातार चुनाव दर चुनाव वोटिंग पर्सेंटेज बढ़ा है। मतलब यह है कि बिहार में 2005 में करीब 45 फीसदी मतदान हुआ था, जबकि 2020 में कुल 57 प्रतिशत वोटिंग हुई। यानी पिछले 15 साल में करीब 12 प्रतिशत वोटिंग पर्सेंटेज बढ़ा। इसके अलावा एक आंकड़ा यह भी सामने आया कि पिछले 15 साल से बिहार में महिलाएं ही सत्ता का दावेदार तय कर रही हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में यह फॉर्मूला एनडीए के काम आया। इस रिपोर्ट में जानते हैं कि इस चुनाव में किस राजनीतिक दल को कितने प्रतिशत वोट मिले और किसका आधार कितना खिसका?

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बिहार का राजनीतिक भविष्य तय हो चुका है। 243 विधानसभा सीटों के नतीजे आ गए हैं और जनादेश ने भाजपा-जदयू की जोड़ी पर भरोसा जताया। साथ ही, नीतीश कुमार को एक और मौका दे दिया। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो भाजपा 74 सीटें जीतकर राज्य में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी तो बनी, लेकिन उसका वोट शेयर करीब 5 प्रतिशत घट गया। वहीं, 75 सीटें जीतने वाली राजद वोट शेयर में भी सबसे आगे रही, लेकिन उसे पिछले चुनाव के मुकाबले 5 सीटों का नुकसान हो गया। वैसे बिहार में साल 2005 से अब तक लगातार चुनाव दर चुनाव वोटिंग पर्सेंटेज बढ़ा है। मतलब यह है कि बिहार में 2005 में करीब 45 फीसदी मतदान हुआ था, जबकि 2020 में कुल 57 प्रतिशत वोटिंग हुई। यानी पिछले 15 साल में करीब 12 प्रतिशत वोटिंग पर्सेंटेज बढ़ा। इसके अलावा एक आंकड़ा यह भी सामने आया कि पिछले 15 साल से बिहार में महिलाएं ही सत्ता का दावेदार तय कर रही हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में यह फॉर्मूला एनडीए के काम आया। इस रिपोर्ट में जानते हैं कि इस चुनाव में किस राजनीतिक दल को कितने प्रतिशत वोट मिले और किसका आधार कितना खिसका?

वोट शेयर में किसने मारी बाजी?

Bihar Election Result 2020
Bihar Election Result 2020 - फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से 125 एनडीए के खाते में गईं, जबकि महागठबंधन ने 110 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, एआईएमआईएम ने पांच और लोजपा-बसपा ने एक-एक सीट जीती। इसके अलावा एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी ने कब्जा जमाया। अगर हम वोट शेयर की बात करें तो एनडीए और महागठबंधन का वोट शेयर लगभग बराबर रहा। एनडीए के पक्ष में कुल 35.3 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि महागठबंधन को 35.2 प्रतिशत वोट मिले। वहीं, एआईएमआईएम, लोजपा, बसपा और रालोसपा समेत अन्य दलों का वोट शेयर 29.5 प्रतिशत रहा। 
 
पार्टी सीटें वोट शेयर
एनडीए 125 35.3%
महागठबंधन 110 35.2%
अन्य दल 08 29.5%
       
        
        

राजनीतिक दलों का क्या रहा हाल?

बिहार चुनाव 2020
बिहार चुनाव 2020 - फोटो : अमर उजाला
वोट शेयर के मामले में एनडीए और महागठबंधन लगभग बराबर हों, लेकिन एनडीए सीटों के मामले में बाजी मारने में कामयाब रहा। हालांकि, अगर पार्टी के हिसाब से वोट शेयर देखें तो इसमें राजद और लोजपा को फायदा हुआ, जबकि भाजपा व जदयू को 2015 के मुकाबले काफी नुकसान उठाना पड़ा। गौरतलब है कि 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सिर्फ 53 सीटें जीत पाई थी, जबकि उसका वोट शेयर 24.4 प्रतिशत था। अब 2020 में भाजपा ने 74 सीटें जीतीं, लेकिन उसका वोट शेयर 19.46 प्रतिशत रह गया। वहीं, राजद ने 2015 में 80 सीटें जीती थीं और उसका वोट शेयर 18.4 प्रतिशत था। अब 2020 में राजद ने पिछले चुनाव के मुकाबले 5 सीटें कम जीतीं, लेकिन उसका वोट शेयर बढ़कर 23.11 प्रतिशत हो गया। हालांकि, जदयू को वोट शेयर और सीट दोनों ही मामलों में नुकसान उठाना पड़ा। पार्टी ने 2015 में 71 सीटें जीती थीं और वोट शेयर 16.8 था। इस बार जदयू को 28 सीटों का नुकसान हुआ और उसका वोट शेयर घटकर 15.39 प्रतिशत रह गया। 2020 के चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर करीब 3 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन सीटों की संख्या 19 ही रह गई।
 
पार्टी सीटें (2020) वोट शेयर (2020) सीटें (2015) वोट शेयर (2015)
राजद 75 23.11% 80 18.4%
भाजपा 74 19.46% 53 24.4%
जदयू 43 15.39%  71  16.8%
कांग्रेस 19 9.48% 27 6.7%
अन्य दल 32 30.31% 12 33.7%
नोटा - 1.68% - 2.5

 नोट: अन्य दलों में लोजपा, रालोसपा, एआईएमआईएम, भाकपा, माकपा, भाकपा (माले), हम और वीआईपी आदि शामिल हैं।

2005 से अब तक इतना बढ़ा वोटिंग पर्सेंटेज

बिहार चुनाव
बिहार चुनाव - फोटो : सांकेतिक
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2005 के दौरान बिहार में दो बार फरवरी और अक्टूबर में विधानसभा चुनाव हुए थे। फरवरी के दौरान किसी भी राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। फरवरी 2005 में कुल मतदान प्रतिशत 46.50% रहा और 75 सीटें जीतकर राजद सबसे बड़ा राजनीतिक दल था, जबकि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जदयू की झोली में 55 सीटें गई थीं। भाजपा ने 37 सीटों पर जीत हासिल की थी। गौर करने वाली बात यह है कि उस चुनाव में निर्दलीयों ने 17 सीटें जीती थीं, लेकिन 16 पर्सेंट से ज्यादा मतदान शेयर निर्दलीयों के पक्ष में था, जिससे सभी राजनीतिक दलों का चुनावी समीकरण बिगड़ गया।

साल 2005  (फरवरी) का चुनावी लेखा-जोखा
 
राजनीतिक दल सीटें वोटिंग पर्सेंटेज
राजद 75 25.07%
निर्दलीय 17 16.16%
जदयू 55 14.55%
लोजपा 29 12.62%
भाजपा 37 10.97%

अक्टूबर 2005 में हुआ सत्ता परिवर्तन

मतदान (प्रतीकात्मक तस्वीर)
मतदान (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
फरवरी 2005 में कोई भी राजनीतिक दल बहुमत के करीब नहीं पहुंच सका और 8 महीने तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा रहा। अक्टूबर 2005 के दौरान बिहार में दोबारा चुनाव हुए। उस दौरान कुल मतदान प्रतिशत तो घट गया, लेकिन राज्य में सत्ता परिवर्तन की बयार चल गई। अक्टूबर 2005 के दौरान बिहार में कुल मतदान प्रतिशत 45.85% रहा। उस दौरान 88 सीटें जीतकर जदयू ने बाजी मारी और 55 सीटें जीतने वाली भाजपा के साथ गठबंधन कर सरकार बना ली। अक्टूबर 2005 के दौरान राजद सिर्फ 54 सीटों पर सिमट गई थी। अहम बात यह थी कि उस दौरान राजद का वोट शेयर महज 2 प्रतिशत कम हुआ था, लेकिन उनकी 21 सीटें कम हो गई थीं।

साल 2005 (अक्टूबर) का चुनावी लेखा-जोखा
 
राजनीतिक दल सीटें वोटिंग पर्सेंटेज
राजद 54 23.45%
जदयू 88 20.46%
भाजपा 55 15.65%
लोजपा 10 11.10%
निर्दलीय 10 8.77%

2010 में और मजबूत हुआ एनडीए

Bihar election 2020
Bihar election 2020 - फोटो : पीटीआई
अक्टूबर 2005 के दौरान बिहार की सत्ता में काबिज होने वाला एनडीए महागठबंधन 2010 के विधानसभा चुनाव में और मजबूत हो गया। लोगों को नीतीश कुमार का विकास मॉडल पसंद आया और उन्हें लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री चुन लिया। उस दौरान जदयू ने 115 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा के खाते में 91 सीटें गईं। वहीं, राजद सिर्फ 22 सीटों पर सिमट गई और उसका वोट शेयर भी काफी कम हो गया। अहम बात यह है कि 2010 में कुल मतदान प्रतिशत 52.73% रहा था, जो अक्टूबर 2005 से करीब 7 प्रतिशत ज्यादा था।

साल 2010 का चुनावी लेखा-जोखा
 
राजनीतिक दल सीटें वोटिंग पर्सेंटेज
जदयू 115 22.61%
भाजपा 91 16.46%
राजद 22 18.84%
लोजपा 03 6.75%


 

2015 में बना महागठबंधन, तीसरी बार सीएम बने नीतीश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार - फोटो : पीटीआई
2010 के विधानसभा चुनाव में बिहार ने काफी बड़ा राजनीतिक परिवर्तन देखा। उस दौरान एनडीए के खिलाफ बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन बना, जिसमें जदयू और राजद जैसे धुर-विरोधियों ने हाथ मिला लिया। वहीं, कांग्रेस भी इस महागठबंधन में शामिल हो गई। इस चुनाव में जदयू को निजी तौर पर सीटों का नुकसान हुआ, लेकिन वह सरकार बनाने में कामयाब रही। अहम बात यह थी कि साल 2000 के बाद 2010 के दौरान बिहार में दूसरी बार सबसे ज्यादा मतदान हुआ था। उस वक्त वोट शेयर के मामले में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन उसके खाते में सिर्फ 53 सीटें ही गई थीं। हालांकि, बिहार की राजनीति में राजद ने एक बार फिर कमबैक किया था। लगातार दो चुनाव में घटते जा रहे राजद ने कुल 80 सीटें जीतकर दमदार वापसी की थी।

साल 2015 का चुनावी लेखा-जोखा
 
राजनीतिक दल सीटें वोटिंग पर्सेंटेज
भाजपा 53 24.4%
राजद 80 18.4%
जदयू 71 16.8%
लोजपा 02 4.8%

चुनाव दर चुनाव बढ़ा भाजपा का वोट शेयर

गौर करने वाली बात यह है कि बिहार में चुनाव दर चुनाव भाजपा का वोट बैंक मजबूत हुआ है। फरवरी 2005 के भाजपा का वोट शेयर महज 10.97% था, जो 2015 के विधानसभा चुनाव में करारी हार के बावजूद करीब 15 प्रतिशत बढ़कर 24.4% पहुंच गया, लेकिन अब 2020 में भाजपा का वोट शेयर कम हुआ है। हालांकि, बाकी राजनीतिक दलों के ग्राफ में काफी उलटफेर हुआ है। दरअसल, पिछले 15-20 साल के दौरान लोजपा लगातार अपना आधार खोती जा रही है। चुनाव दर चुनाव उसके वोट शेयर में काफी कमी आई है। 

भाजपा का बढ़ता ग्राफ
 
साल सीटें वोट शेयर
फरवरी 2005 37 10.97%
अक्टूबर 2005 55 15.65%
2010 91 16.46%
2015 53 24.4%
2020 74  19.46%

जदयू का चुनावी ग्राफ
 
साल सीटें वोट शेयर
फरवरी 2005 55 14.55%
अक्टूबर 2005 88 20.46%
2010 115 22.61%
2015 71 16.8%
2020 43  15.39%    


राजद का चुनावी सफर
 
साल सीटें वोट शेयर
फरवरी 2005 75 25.07%
अक्टूबर 2005 54 23.45%
2010 22 18.84%
2015 80 18.4%
2020 75 23.11%

लोजपा का लगातार घटा आधार
 
साल सीटें वोट शेयर
फरवरी 2005 29 12.62%
अक्टूबर 2005 10 11.10%
2010 03 6.75%
2015 02 4.8%
2020 01 5.66%

10 साल से महिलाएं तय कर रहीं विजेता

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
बिहार के चुनावी नतीजों पर गौर फरमाएं तो साल 2010 के बाद से यहां महिलाओं का वोटिंग पर्सेंटेज बढ़ा है और वो लगातार विजेता तय कर रही हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2005 में महिलाओं का वोट शेयर पुरुषों के मुकाबले कम था, लेकिन उसके बाद इसमें लगातार इजाफा हो रहा है।

महिलाओं का वोटिंग पर्सेंटेज
 
साल वोटिंग पर्सेंटेज
फरवरी 2005 42.48%
अक्टूबर 2005 44.99%
2010 54.49%
2015 60.48%
2020 59.69%

15 साल में करीब 12 पर्सेंट बढ़ा वोटिंग पर्सेंटेज

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में मतदान के प्रति लोगों में जागरूकता चुनाव-दर-चुनाव बढ़ी है। राज्य में अब तक सबसे ज्यादा मतदान साल 2000 के चुनाव में हुआ था, जो 2005 में काफी ज्यादा गिर गया। हालांकि, अब इसमें लगातार इजाफा हो रहा है।

लगातार बढ़ रहा वोटिंग पर्सेंटेज
 
साल वोटिंग पर्सेंटेज
फरवरी 2005 46.50%
अक्टूबर 2005 45.85%
2010 52.67%
2015 56.66%
2020 57.05%
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