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बिहार चुनाव: किसका होगा तीसरा चरण, किसका खेल बिगाड़ेंगे मुस्लिम, यादव और ब्राह्मण वोट बैंक?
Fri, 06 Nov 2020 01:53 PM IST
कुमार संभव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार संभव
Updated Fri, 06 Nov 2020 01:53 PM IST
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बिहार विधानसभा चुनाव 2020
- फोटो : अमर उजाला
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बिहार में 7 नवंबर को तीसरे और अंतिम चरण के तहत 15 जिलों की 78 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। बता दें कि इस चरण में 1208 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। दरअसल, तीसरे चरण में प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला मुस्लिम बहुल सीमांचल, यादव बहुल कोसी और ब्राह्मण बहुल मिथिलांचल में होना है। इस चरण में अपने अगड़े वोट बैंक को साधे रखने की एनडीए की प्रतिष्ठा दांव पर है तो महागठबंधन अपने कोर वोट बैंक यादव और मुस्लिम को मजबूती से जोड़े रखने की चुनौती से जूझ रहा है। दरअसल, असदुद्दीन ओवैसी से लेकर पप्पू यादव तक की नजर यादव और मुस्लिम समुदाय के वोटरों पर है। इसके अलावा लोजपा प्रमुख चिराग पासवान ने इस चरण में भाजपा के अच्छे-खासे बागी नेताओं को मैदान में उतारकर मुकाबला कड़ा कर दिया है।
मुस्लिम तय करेंगे सीमांचल का भविष्य
गौरतलब है कि सीमांचल में 4 जिले किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया आते हैं, जिनके अंतर्गत 24 विधानसभा सीटों पर चुनाव होता है। इनमें नरपतगंज, रानीगंज, फारबिसगंज, अररिया, सिकटी, जोकीहाट, कटिहार, कदवा, बलरामपुर, प्राणपुर, मनिहारी, बरारी, कोढा, हादुरगंज, ठाकुरगंज, किशनगंज, कोचाधामन, कस्बा, बनमनखी, रुपौली, धमदाहा, पूर्णिया, अमौर और बैसी सीट शामिल हैं। इन सभी सीटों पर मुस्लिम मतदाता अहम भूमिका निभाते हैं। किशनगंज में करीब 70 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है, जबकि अररिया में इनकी संख्या 42 प्रतिशत से ज्यादा है। कटिहार में मुस्लिम वोटर्स की संख्या 43 प्रतिशत और पूर्णिया में 38 प्रतिशत है। सीमांचल के मुस्लिमों मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए एआईएमआईएम 14 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि महागठबंधन के लिए राजद ने 11, कांग्रेस ने 11, भाकपा-माले ने 1 और सीपीएम ने 1 सीट पर प्रत्याशी उतारे हैं। उधर, एनडीए के लिए बीजेपी के 12 प्रत्याशी, जदयू के 11 उम्मीदवार और हम का एक कैंडिडेट किस्मत आजमा रहे हैं।
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2015 में ऐसे थे हालात
2015 में कांग्रेस ने यहां अकेले 9 सीटें जीती थीं, जबकि जदूय ने 6 और राजद ने 3 सीटों पर जीत हासिल की थी। इसके अलावा 6 सीटें भाजपा और एक सीट भाकपा माले के खाते में गई थी। हालांकि, इस बार समीकरण बदल गए हैं। जदयू और भाजपा एक साथ मैदान में हैं। वहीं, ओवैसी की एंट्री ने महागठबंधन की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा लोजपा के टिकट पर लड़ रहे भाजपा के बागी एनडीए की टेंशन बढ़ा रहे हैं।
बाढ़ से तबाह कोसी किसे देगा आसरा?
बता दें कि तीसरे चरण में बिहार के कोसी की किस्मत भी तय होगी। दरअसल, यह इलाका लगभग हर साल बाढ़ से जूझता है। इसके बावजूद राजनीतिक दल लगातार यहां अपनी सियासत चमका रहे हैं और कोसी के हालात जस के तस हैं। कोसी में न तो बाढ़ की तबाही रुकी और न ही यहां के लोगों का पलायन। यह इलाका यादव बहुल माना जाता है, जो जदयू और राजद के लिए काफी मुफीद रहा है। ऐसे में एनडीए की ओर से जदयू और महागठबंधन की ओर से राजद ही यहां ताल ठोंक रही है। कोसी इलाके में तीन जिले मधेपुरा, सहरसा और सुपौल आते हैं। यहां कुल 13 विधानसभा सीटें हैं।
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मिथिलांचल में किंगमेकर हैं ब्राह्मण
तीसरे चरण में मिथिलांचल में भी मतदान होगा। यहां 5 जिले सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर हैं। मिथिलांचल में 25 से 35 प्रतिशत मैथिल ब्राह्मण हैं। इसके अलावा मुस्लिम और यादव मतदाता भी यहां ट्रेंड सेट करते हैं, जो जीत हार में अहम भूमिका निभाते हैं। मिथिलांचल में राजद को मुस्लिम और यादव वोटों का भरोसा है तो कांग्रेस ब्राह्मण और मुस्लिम समीकरण के जरिए जीत हासिल करने के मकसद में है। ऐसे में एनडीए अगड़ों के भरोसे महागठबंधन को मात देने की कोशिश में है। इसके अलावा पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण जिले के साथ वैशाली की दो विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। चंपारण बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है, जहां उसकी सीधी लड़ाई कांग्रेस से है।
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मुस्लिम तय करेंगे सीमांचल का भविष्य
गौरतलब है कि सीमांचल में 4 जिले किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया आते हैं, जिनके अंतर्गत 24 विधानसभा सीटों पर चुनाव होता है। इनमें नरपतगंज, रानीगंज, फारबिसगंज, अररिया, सिकटी, जोकीहाट, कटिहार, कदवा, बलरामपुर, प्राणपुर, मनिहारी, बरारी, कोढा, हादुरगंज, ठाकुरगंज, किशनगंज, कोचाधामन, कस्बा, बनमनखी, रुपौली, धमदाहा, पूर्णिया, अमौर और बैसी सीट शामिल हैं। इन सभी सीटों पर मुस्लिम मतदाता अहम भूमिका निभाते हैं। किशनगंज में करीब 70 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है, जबकि अररिया में इनकी संख्या 42 प्रतिशत से ज्यादा है। कटिहार में मुस्लिम वोटर्स की संख्या 43 प्रतिशत और पूर्णिया में 38 प्रतिशत है। सीमांचल के मुस्लिमों मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए एआईएमआईएम 14 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि महागठबंधन के लिए राजद ने 11, कांग्रेस ने 11, भाकपा-माले ने 1 और सीपीएम ने 1 सीट पर प्रत्याशी उतारे हैं। उधर, एनडीए के लिए बीजेपी के 12 प्रत्याशी, जदयू के 11 उम्मीदवार और हम का एक कैंडिडेट किस्मत आजमा रहे हैं।
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2015 में ऐसे थे हालात
2015 में कांग्रेस ने यहां अकेले 9 सीटें जीती थीं, जबकि जदूय ने 6 और राजद ने 3 सीटों पर जीत हासिल की थी। इसके अलावा 6 सीटें भाजपा और एक सीट भाकपा माले के खाते में गई थी। हालांकि, इस बार समीकरण बदल गए हैं। जदयू और भाजपा एक साथ मैदान में हैं। वहीं, ओवैसी की एंट्री ने महागठबंधन की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा लोजपा के टिकट पर लड़ रहे भाजपा के बागी एनडीए की टेंशन बढ़ा रहे हैं।
बाढ़ से तबाह कोसी किसे देगा आसरा?
बता दें कि तीसरे चरण में बिहार के कोसी की किस्मत भी तय होगी। दरअसल, यह इलाका लगभग हर साल बाढ़ से जूझता है। इसके बावजूद राजनीतिक दल लगातार यहां अपनी सियासत चमका रहे हैं और कोसी के हालात जस के तस हैं। कोसी में न तो बाढ़ की तबाही रुकी और न ही यहां के लोगों का पलायन। यह इलाका यादव बहुल माना जाता है, जो जदयू और राजद के लिए काफी मुफीद रहा है। ऐसे में एनडीए की ओर से जदयू और महागठबंधन की ओर से राजद ही यहां ताल ठोंक रही है। कोसी इलाके में तीन जिले मधेपुरा, सहरसा और सुपौल आते हैं। यहां कुल 13 विधानसभा सीटें हैं।
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मिथिलांचल में किंगमेकर हैं ब्राह्मण
तीसरे चरण में मिथिलांचल में भी मतदान होगा। यहां 5 जिले सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर हैं। मिथिलांचल में 25 से 35 प्रतिशत मैथिल ब्राह्मण हैं। इसके अलावा मुस्लिम और यादव मतदाता भी यहां ट्रेंड सेट करते हैं, जो जीत हार में अहम भूमिका निभाते हैं। मिथिलांचल में राजद को मुस्लिम और यादव वोटों का भरोसा है तो कांग्रेस ब्राह्मण और मुस्लिम समीकरण के जरिए जीत हासिल करने के मकसद में है। ऐसे में एनडीए अगड़ों के भरोसे महागठबंधन को मात देने की कोशिश में है। इसके अलावा पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण जिले के साथ वैशाली की दो विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। चंपारण बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है, जहां उसकी सीधी लड़ाई कांग्रेस से है।