फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Bihar Election 2020 hunger dominates on Democracy in Seemanchal Area

Bihar Election 2020: सीमांचल में लोकतंत्र पर हावी भूख

Tue, 27 Oct 2020 02:23 AM IST
देव कश्यप हिमांशु मिश्र, कटिहार।
हिमांशु मिश्र, कटिहार। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 27 Oct 2020 02:23 AM IST
सार

  • भुखमरी-बेरोजगारी से हार प्रवासी मजदूरों ने वापस महानगरों की ओर किया कूच
  • ज्यादातर गांवों में महिलाओं-बच्चों और बुजुर्गों का ही डेरा
  • चुनाव के बीच कई राज्यों से हजारों बसें भेज बुलाए गए प्रवासी मजदूर

विज्ञापन
Bihar Election 2020 hunger dominates on Democracy in Seemanchal Area
Bihar Election - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

जिले के बलरामपुर थाने के गढ़ी गांव के बुजुर्ग शंभु शर्मा के दोनों बेटे अप्रैल में लॉकडाउन के दौरान बेहद अमानवीय परिस्थितियों में अपने घर लौटे थे। वापस लौट कर भविष्य में महानगर न जाने की कसमें खाई थीं। हालांकि, बीते हफ्ते ही उनके दोनों बेटे सबकुछ भूल कर वापस पुणे लौट गए। कारण गांव में रोजगार नहीं।

विज्ञापन


रही-सही कसर अगस्त महीने में आई भीषण बाढ़ ने पूरी कर दी। पलायन का सर्वाधिक सामना करने वाले सीमांचल में यह महज एक गांव की कहानी नहीं है। कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया जैसे सभी जिलों के लगभग ज्यादातर गांवों की यही कहानी है। लोकतंत्र के महापर्व के बीच गांव के गांव सूने पड़े हैं। नजर आती हैं तो औरतें, छोटे बच्चे और बुजुर्ग।
विज्ञापन



लॉकडाउन के दौरान जिस तेजी से लाखों प्रवासी मजबूर महानगरों से लौटे थे, बीते एक महीने में उसी तेजी से वापस महानगरों में लौट गए। गांव में खड़ी और राजमार्गों पर दौड़ती दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब की बसें बताती हैं कि अगले कुछ दिनों में गांवों में बेहद कम संख्या में बचे प्रवासी मजदूर भी महानगरों का रुख कर लेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


अग्रिम राशि और मुफ्त यात्रा लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों के पलायन से उद्योग-धंधे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था। इन मजदूरों को वापस लाने के लिए इनके परिवारों को बतौर अग्रिम पांच से दस हजार रुपये दिए जा रहे हैं। गांव से ही बस के जरिए इन्हें महानगर बुलाया जा रहा है। किशनगंज के कोचाधामन इलाके के कई मजदूरों को सूरत के एक व्यापारी ने अग्रिम राशि के साथ हवाई टिकट भी उपलब्ध कराया। चूंकि क्षेत्र में काम नहीं है। इसलिए प्रवासी मजदूरों ने फिर महानगरों को लौटने का मन बनाया।

पलायन विपक्ष का सबसे अहम मुद्दा
यह स्थिति तब है जब विपक्ष के अलग-अलग महागठबंधनों ने प्रवासी मजदूरों के पलायन को अपना सबसे अहम मुद्दा बनाया है। दिलचस्प तथ्य यह है कि जिन प्रवासी मजदूरों के पलायन को विपक्ष ने मुद्दा बनाया है, उनमें से ज्यादातर महानगर लौट जाने के कारण मतदान ही नहीं करेंगे। सीमांचल में अंतिम चरण में सात नवंबर को मतदान होना है।

प्रशासन के साथ सियासी दल भी मौन
बीते एक महीने में लाखों मजदूरों को मतदान तक रोकने के लिए न ही प्रशासन ने दिलचस्पी दिखाई और न ही सियासी दलों ने। विपक्ष की ओर से हालांकि कुछ जगहों पर रोकने की कोशिश जरूर हुई, मगर मजदूर माने नहीं। पूर्णिया जिले के बायसी के राजद नेता मनसूर आलम कहते हैं कि कोरोना के बीच बाढ़ के प्रकोप से स्थिति बिगड़ गई। रोजगार नहीं होने से आर्थिक स्थिति बेहद खराब होने के कारण हमारी कोशिशें बेकार गईं।


विपक्ष को नुकसान
जाहिर तौर पर मजदूरों के वापस महानगरों में लौटने से नुकसान विपक्ष को होगा, क्योंकि पलायन को राजद, एआईएआईएम और जाप ने अहम मुद्दा बनाया है। चूंकि कोरोना के दौरान पलायन कर वापस लौटे मजदूर फिर से महानगर चले गए हैं, ऐसे में यह वर्ग मतदान ही नहीं कर पाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed