मिथिला पेंटिंग के लिए बिहार की बौआ देवी को मिला पद्मश्री सम्मान
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मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में अहम योगदान के लिए बौआ देवी को पद्मश्री सम्मान 2017 से नवाजा गया है। बौआ देवी बिहार राज्य के मधुबनी जिले के जितवारपुर गांव के निवासी हैं। इससे पहले इनको राज्य और राष्ट्र स्तरीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
जानकारी के मुताबिक, बौआ देवी मधुबनी की तीसरी महिला हैं जिन्हें मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में यह सम्मान मिला है। जबकि इससे पहले मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में सीता देवी और महासुन्दरी देवी को भी पद्मश्री सम्मान मिल चुका है।
गौरतलब है कि, बौआ देवी के द्वारा बनाया गया मिथिला पेंटिंग प्रधानमंत्री मोदी अपने विदेश यात्रा के दौरान हैनोवर के मेयर स्टीवन स्कॉस्टक को भेंट स्वरुप दिया था।
मिथिला पेंटिंग मधुबनी की सबसे खास पेंटिंग है, और इस पेंटिंग को पूरे विश्वभर में विख्यात माना जाता है।
क्या है मिथिला पेंटिंग
मधुबनी या मिथिला पेंटिंग उत्तर भारत की सबसे पारंपरिक पेंटिंग मानी जाती है। बता दें कि मिथिला पेंटिंग प्रकृति और पौराणिक कथाओं के आधार पर बनायी जाती है। मिथिला पेंटिंग की शुरुआत तब से मानी जाती है जब विदेह (जनकपुर) के राजा जनक ने अपनी बेटी जानकी सीता की शादी भगवान राम के साथ होने पर पूरे जनकपुर शहर सजाने का आदेश दिया था। प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर इस पेंटिंग को बनाया जाता है।
इस पेंटिंग को बाकी चित्रकारी अपेक्षा काफी कठिन माना गया है। इसे बनाने के लिए ज्यामितीय पैटर्न की विशेष आवश्यकता होती है। मधुबनी या मिथिला पेंटिंग बिहार के मधुबनी ही नहीं बल्कि नेपाल में इस पेंटिंग का चलन है। अब मधुबनी या मिथिला पेंटिंग को व्यावसायिक तौर पर भी तैयार किया जाने लगा है।