{"_id":"5abb07b94f1c1be73f8b548d","slug":"bihar-assembly-adjourned-over-communal-violence","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिहार में सांप्रदायिक हिंसा को लेकर सियासी वार जारी, हंगामे के बीच विधानसभा स्थगित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिहार में सांप्रदायिक हिंसा को लेकर सियासी वार जारी, हंगामे के बीच विधानसभा स्थगित
एजेंसी, पटना
Updated Wed, 28 Mar 2018 08:54 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिहार के कुछ हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हो रही हैं। लगातार बढ़ती हुई हिंसाओं के कारण विपक्ष ने विधानसभा में जमकर विरोध किया। विपक्ष का हंगामा इतना जोरदार था कि कार्यवाही शुरू होने कुछ मिनटों बाद विधानसभा की कार्यवाही को दोपहर तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
विज्ञापन
विधानसभा स्पीकर विजय कुमार चौधरी ने जैसे कार्यवाही का संचालन शुरू किया वैसे ही राजद विधायक समीर कुमार महासेठ और शक्ति सिंह यादव ने स्थगन प्रस्ताव पेश कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द के वातावरण को दूषित किया जा रहा है। एक खास संगठन एक खास समुदाय के सदस्यों के खिलाफ नफरत का बीज बो रहा है।
विज्ञापन
स्पीकर ने उनसे कहा कि इस मामले को वे निर्धारित समय पर उठाएं और फिर उन्होंने प्रश्नकाल की मंजूरी दे दी। इस पर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि जो मुद्दा उठाया गया है वह बहुत ही जरूरी है। इस पर भाजपा के नेता भी राजद पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। अनेक विपक्षी नेता संविधान की प्रति लहराते हुए वेल में आ गए। इसके बाद चौधरी ने दोपहर दो बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी।
विज्ञापन
वहीं विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य में भाजपा-आरएसएस के बढ़ते दबदबे के कारण सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। उसने कहा कि उनके सामने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार असहाय नजर आ रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने ये भी कहा कि उन्होंने औरंगाबाद का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जो कहा उससे वह खुश भी हुए और असंतुष्ट भी। तेजस्वी ने कहा कि वह खुश इसलिए हुए क्योंकि नीतीश ने उन्हें बाबू कहकर संबोधित किया था, पर दुखी इसलिए हुए क्योंकि उन्होंने औरंगाबाद की सांप्रदायिक हिंसा पर जो चिंता जताई उसे नीतीश कुमार ने नकार दिया।