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Bihar : फौजी को कागज पर बताया था डेड, अब 9 साल पहले मृत महिला को कर दिया जिंदा; इसे देख प्रशासन भी है हैरान

Thu, 01 Jan 2026 10:20 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण Updated Thu, 01 Jan 2026 10:20 PM IST
सार

Bihar : समस्तीपुर में भू माफियाओं ने एक सेवा निवृत फौजी को फर्जी तरीके से कागजों में मृत घोषित कर उनकी जमीन हड़पने की कोशिश की थी। अब एक दूसरे शहर में 9 साल पहले मृत महिला को कागज में जिंदा कर दिया। इस कहानी में भी मकसद कुछ ऐसा ही है। 

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Bihar News : Land was mutated by claiming dead woman was alive bhagalpur bihar police samastipur news
भागलपुर एसडीएम विकास कुमार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री बनते ही विभागीय सिस्टम को सुधारने में भ्रष्टाचार की जमीन खोदने लगे। लिहाजा भ्रष्ट अधिकारी और भूमाफियाओं के बीच हड़कंप मच गया। लेकिन इसके बाद भी समस्तीपुर में भू माफियाओं के द्वारा रिटायर्ड फौजी को फर्जी तरीके से कागजों में मृत घोषित कर उनकी जमीन हड़पने की कोशिश करने का मामला सामने आया। यहां तक कि वह सीमा पर दुश्मन देश से लड़ने वाला फौजी अपने ही प्रदेश में सीने पर “साहेब मैं जिंदा हूँ” लिखी तख्ती लगाकर सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पर मजबूर हो गया। अब ऐसा ही मामला भागलपुर से सामने आया है, जहां भू-माफियाओं ने करीब 9 साल पहले मर चुकी एक महिला को सरकारी दस्तावेजों में 'जिंदा' कर दिया और फिर फर्जी शपथपत्र के जरिए जमीन का दाखिल-खारिज भी करा लिया। मामला संज्ञान में आने के बाद प्रशासनिक अधिकारी भी हैरान हो रहे हैं। 

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ऐसे खुला फर्जीवाड़े का खेल 
पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब पीड़ित पक्ष सैयद ऐनाम उद्दीन ने साक्ष्यों के साथ सदर एसडीओ के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान जब एसडीओ ने कार्यालय की पंजी से दस्तावेजों का मिलान किया, तो जालसाजी की पूरी कहानी सामने आ गई। जांच में सामने आया कि स्वर्गीय मो. शर्फ उद्दीन की वैध रैयत हशमुन निशा की मृत्यु 6 अप्रैल 2015 को ही हो गई थी, जिसका गर निगम द्वारा निर्गत मृत्यु प्रमाण पत्र भी घर वालों के पास है। इसके बावजूद कार्यपालक दंडाधिकारी, सदर भागलपुर के नाम से शपथपत्र संख्या 3526, दिनांक 13 मई 2024 दिखाया गया, जिसमें हशमुन निशा को जीवित बताया गया। वहीं जब इसकी जांच की गई तो कार्यालय पंजी के मिलान में यह शपथपत्र एक अन्य व्यक्ति अभयकांत आर्य के नाम से दर्ज पाया गया। इस आधार पर दाखिल-खारिज वाद संख्या 1188/2024-25 को फर्जी करार दिया गया। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि गणीचक निवासी स्व. जलीस उद्दीन के पुत्र मो. इस्लाम के द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के शपथपत्र में कूटरचना कर अवैध रूप से नामांतरण कराया गया। इस मामले में शपथ पहचानकर्ता अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह (निबंधन संख्या 1064/99) को भी नोटिस जारी किया गया था।
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एसडीएम ने कहा- करेंगे कार्रवाई 
इस संबंध में सदर एसडीओ विकास कुमार ने 'अमर उजाला' को बताया कि यह एक गंभीर और गैर-कानूनी कार्य है। मामला संज्ञान में आने के बाद उन्होंने इस मामले को लेकर अपने न्यायालय में केस दर्ज किया  है। उन्होंने बताया कि जगदीशपुर के अंचलाधिकारी व मोजाहिदपुर थाना अध्यक्ष को निर्देश दिया कि मो. इस्लाम सहित इस प्रकरण में संलिप्त सभी लोगों के खिलाफ जांच पड़ताल कर विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करें।
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