फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   association with sangh will make color in bjp?

'संघ के संग' होने से बीजेपी में रंग आएगा?

Fri, 06 Nov 2015 03:43 PM IST
Updated Fri, 06 Nov 2015 03:43 PM IST
विज्ञापन
association with sangh will make color in bjp?

माना जाता है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानी हाल के दिनों में हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की सबसे बड़ी ताकत। एक बड़े संगठन के तौर पर इसकी पैठ से शायद ही किसी को इनकार होगा लेकिन उत्तर प्रदेश से अलग बिहार में आरएसएस कितना कमाल दिखा पाएगी, इस पर अभी से अटकलबाजियों का दौर जारी है।

विज्ञापन


बीबीसी को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आरएसएस स्वयंसेवकों ने बिहार में घर-घर जाकर अभियान चलाया ये बताकर कि बीजेपी के बिना बिहार और हिंदुत्व का क्या होगा। आखिरी दौर के मतदान से पहले संघ के अभियान में फिर से तेजी आई। बीच में, मोहन भागवत के आरक्षण वाले बयान के बाद संघ बैकफुट पर था।
विज्ञापन


भागवत के बयान ने संघ को स्पष्टीकरण देने पर मजबूर कर दिया। भाजपा और बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भागवत के बयान से हुए नुकसान को संभालने की कोशिश की।पटना में संघ के कार्यालय में मैं बिहार और झारखंड़ के क्षेत्रीय कार्यवाह, ड़ॉक्टर मोहन सिंह से मिला।

विज्ञापन
विज्ञापन

ये उनका नैतिक दायित्व है

association with sangh will make color in bjp?

मोहन सिंह कहते हैं, "सरसंघचालक जी ने जो बात कही है, वो देश के सर्वाधिक बुद्धिजीवियों को समझ में आने वाली बात है। उन्होंने अलग से कोई बात नहीं की है। बाबा साहब आंबेड़कर ने भी समय-समय पर आरक्षण की व्यवस्था की समीक्षा की बात कही थी। लेकिन दूसरे लोगों ने गुमराह करने की नजर से तोड़ने का प्रयास किया।"लेकिन संघ थोड़े ही समय बैकफुट पर रहा, लेकिन बाद में कैड़र को फिर से जोर-शोर से काम में लगाया गया।

पीटीआई के संजय कुमार सिन्हा कहते हैं कि भागवत के बयान से भाजपा को,नुकसान जरूर हुआ। लालू यादव को बहुत बड़ा मुद्दा मिल गया। उन्हें पिछड़ों को गोलबंद करने का मौका मिल गया। वे अपने हर चुनावी सभा में दो तिहाई बात आरक्षण पर करते थे।"बिहार को लेकर संघ और अमित शाह के बीच दरार की खबरें भी आती रहीं।

लेकिन नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर प्रदेश बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि हर शाम संघ के अधिकारियों के साथ उनकी बैठक होती है और रणनीति की समीक्षा की जाती है।अमित शाह के मुद्दे पर मोहन सिंह कहते हैं, "भाजपा में संघ के कई लोग हैं अमित शाह भी उनमें से एक हैं। वे एक बड़े राष्ट्रीय दल के अध्यक्ष हैं। किसी को ड़्यूटी थोड़े ही देना है। ये उनका नैतिक दायित्व है। उत्तर प्रदेश हो या बिहार, चुनाव में वे अपनी भूमिका निभाते हैं।"

मैं तो खुद स्वयंसेवक हूं

association with sangh will make color in bjp?

बिहार के मामले में हालांकि संघ कभी तेज तो कभी सुस्त हुआ।संघ कार्यकर्ताओं को जाति में बंटे बिहार में राष्ट्रवाद के नाम पर वोटरों को एकजुट करने में मुश्किलें आ रही हैं। उत्तर प्रदेश की तरह बिहार में हिंदुत्व जगाने की कोशिशें उतनी सफल नहीं हो पाई है।

वरिष्ठ पत्रकार सुरूर अहमद कहते हैं, "बिहार के कुछ हिस्सों में भी सामाजिक तनाव हुए, सांप्रदायिक तनाव हुए। लेकिन यूपी की तरह नहीं हो पाया। सीमांचल में जरूर संघ जोर-शोर से लगा हुआ है और आतंकवाद और घुसपैठ का मामला उठा रहा है।"

बिहार में बनते-बिगड़ते समीकरण के बावजूद संघ के पास भाजपा को सपोर्ट करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह कहते हैं, "मैं तो खुद संघ का स्वयंसेवक हूँ, इसलिए उनके साथ मिलकर काम करने के सवाल का मैं क्या जवाब दे सकता हूँ। संघ से निकला हुआ व्यक्ति कहीं भी हो, वो हमेशा से राष्ट्रवादी ताकतों को बनाने का काम करता है।"

यूपी से इतर बिहार में रंग फीका रहेगा!

association with sangh will make color in bjp?

संजय कुमार सिन्हा के अनुसार, "आरएसएस बाहर से दिख तो नहीं आ रहा है। लेकिन भाजपा जीत का दावा कर रही है। उससे यही लगता है कि संघ पूरा सक्रिय है। उसके कैड़र ने गाँव-गाँव में लोगों तक पहुँचने की कोशिश की और इसी कारण भाजपा बिहार में जीत का दम भी भर रही है।"

कुछ लोग आतंकवाद, पाकिस्तान, घुसपैठ, सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण, जैसे हाल में उठे मुद्दों को भी आरएसएस से जोड़कर देख रहे हैं।

हालांकि जदयू के श्याम रजक को लगता है कि बिहार में संघ की नहीं चलेगी।वे कहते हैं, "संघ का कैड़र दिल्ली में कहाँ गया था? उनका कैड़र बिहार में कहाँ काम कर रहा है? वो सब भोंपू पार्टी है। वो नीतियों से लैस नहीं है। वो मुद्दे से लैस नहीं हैं। वे लोगों के जहन में धार्मिकता लाते हैं। लेकिन धार्मिक लड़ाई लंबी नहीं चलती।

"बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक, हर बूथ पर संघ के 10 कार्यकर्ताओं और भाजपा के 10 कार्यकर्ताओं को ये जिम्मेदारी दी गई है कि वे मिलकर लोगों को भाजपा के पक्ष में मतदान करने के लिए उत्साहित करने का काम करें।

मतदान से पहले संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठकें हुईं और जिला, विधानसभा, पंचायत और बूथ स्तर पर संघ कार्यकर्ताओं की नियुक्ति का फैसला लिया गया।इंतजार रविवार तक का, जब मालूम हो जाएगा कि बीजेपी और संघ की रणनीति बिहार में रंग दिखाती है, या यूपी से इतर बिहार में रंग फीका रहेगा!

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed