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बीजेपी के नजदीक आ रहे हैं नीतीश, नोटबंदी के समर्थन के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म
हिमांशु मिश्र
Updated Sat, 19 Nov 2016 05:23 AM IST
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फाइल फोटो
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क्या भाजपा और जदयू के बीच नजदीकी बढ़ रही है? बीते दो महीने में सियासी हलके में दूसरी बार यह सवाल चर्चा का विषय बना है। पहली बार यह सवाल चर्चा का विषय तब बना था जब पार्टी ने अपने राष्ट्रीय परिषद में घोषित की गई दीनदयाल जन्म शताब्दी वर्ष संबंधी समिति में नीतीश कुमार को इकलौते मुख्यमंत्री के रूप में जगह दी थी।
दूसरी बार इस पर चर्चा शुरू होने का कारण तमाम विपक्षी दलों के विरोध के बीच नीतीश का मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के समर्थन में खड़ा होना है। चर्चा यह भी है कि बीते एक नवंबर को नीतीश कुमार ने भाजपा के एक शीर्ष नेता से मुलाकात भी की थी, मगर इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई। गौरतलब है कि जदयू करीब दो दशक तक भाजपानीत राजग का हिस्सा रहा है। बिहार में आठ साल तक दोनों दलों की गठबंधन सरकार थी।
दरअसल, लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद सत्ता बचाने के लिए नीतीश ने अपने धुर विरोधी राजद के मुखिया लालू प्रसाद यादव से हाथ मिला कर विधानसभा चुनाव में भाजपा को पटखनी तो दे दी, मगर साझा सरकार बनाने के बाद दोनों दलों के बीच कई मुद्दों पर तीखे मतभेद हैं। मतभेद की शुरुआत बाहुबली पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को जमानत दिए जाने के बाद हुई राजनीति से शुरू हुई।
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दूसरी बार इस पर चर्चा शुरू होने का कारण तमाम विपक्षी दलों के विरोध के बीच नीतीश का मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के समर्थन में खड़ा होना है। चर्चा यह भी है कि बीते एक नवंबर को नीतीश कुमार ने भाजपा के एक शीर्ष नेता से मुलाकात भी की थी, मगर इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई। गौरतलब है कि जदयू करीब दो दशक तक भाजपानीत राजग का हिस्सा रहा है। बिहार में आठ साल तक दोनों दलों की गठबंधन सरकार थी।
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दरअसल, लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद सत्ता बचाने के लिए नीतीश ने अपने धुर विरोधी राजद के मुखिया लालू प्रसाद यादव से हाथ मिला कर विधानसभा चुनाव में भाजपा को पटखनी तो दे दी, मगर साझा सरकार बनाने के बाद दोनों दलों के बीच कई मुद्दों पर तीखे मतभेद हैं। मतभेद की शुरुआत बाहुबली पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को जमानत दिए जाने के बाद हुई राजनीति से शुरू हुई।
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चर्चाओं का बाजार गर्म
पीएम के गढ़ में नीतीश 6
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
इसके अलावा राज्य में शराबबंदी कानून को ले कर भी दोनों दलों के बीच अंदरखाने गहरे मतभेद हैं। मतभेद की खबरों के बीच जब भाजपा ने केरल के कोझिकोड में आयोजित राष्ट्रीय परिषद की बैठक में उपाध्याय जन्म शताब्दी समिति में नीतीश और वरिष्ठ नेता शरद यादव को जगह दी, तो चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।
इन चर्चाओं को तब और मजबूती मिली जब नीतीश ने मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले का खुल कर समर्थन कर दिया। वह भी तब जब इस फैसले से लोगों के परेशान होने को एकजुट विपक्ष ने बड़ा मुद्दा बना लिया है।
निजी बातचीत में जदयू और राजद दोनों दलों के नेता मतभेद की बात स्वीकार करते हैं। जदयू सूत्रों का कहना है कि राजद के साथ सरकार बनाने के बाद से ही नीतीश सहज नहीं हैं। सहज न होने का कारण राजद के वरिष्ठ नेताओं का सार्वजनिक हमला भी है। फिर कानून व्यवस्था बिगड़ने जैसे मुद्दे पर नीतीश को अपनी छवि को धक्का लगने का डर सता रहा है।
इन चर्चाओं को तब और मजबूती मिली जब नीतीश ने मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले का खुल कर समर्थन कर दिया। वह भी तब जब इस फैसले से लोगों के परेशान होने को एकजुट विपक्ष ने बड़ा मुद्दा बना लिया है।
निजी बातचीत में जदयू और राजद दोनों दलों के नेता मतभेद की बात स्वीकार करते हैं। जदयू सूत्रों का कहना है कि राजद के साथ सरकार बनाने के बाद से ही नीतीश सहज नहीं हैं। सहज न होने का कारण राजद के वरिष्ठ नेताओं का सार्वजनिक हमला भी है। फिर कानून व्यवस्था बिगड़ने जैसे मुद्दे पर नीतीश को अपनी छवि को धक्का लगने का डर सता रहा है।