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जदयू की महिला प्रवक्ताओं का राबड़ी देवी को खुला खत, बेटों के संस्कारों पर उठाए सवाल
भाषा, पटना
Updated Sat, 04 Aug 2018 07:35 PM IST
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बिहार में सत्तारूढ़ जदयू की तीन महिला प्रवक्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को एक खुला पत्र लिखकर असामाजिक और अनैतिक कृत्यों में लिप्त लोगों को उनकी पार्टी से निष्कासित करने की मांग की है। जदयू की महिला प्रवक्ताओं ने राबड़ी देवी को खुला पत्र उस वक्त लिखा है जब विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव सरकारी आश्रय गृह में बच्चियों से यौन उत्पीड़न के खिलाफ शाम में दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना देंगे।
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तेजस्वी यादव ने (मुजफ्फरपुर) के संस्थान में बच्चियों से ‘‘सामूहिक बलात्कार की विश्व की सबसे भयानक घटनों में से एक पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आपराधिक चुप्पी’’ पर उन्हें कल एक पत्र खुला पत्र लिखा था। जदयू की प्रवक्ताओं अंजुम आरा, श्वेता विश्वास और भारती महेता ने राबड़ी देवी से मणि प्रकाश यादव को अपने घर में प्रवेश नहीं देने को कहा जो तेजस्वी यादव के उपमुख्यमंत्री रहने के दौरान उनके पीए थे और अब जेल में हैं और उसके खिलाफ अनैतिक देह व्यापार मामले में आरोप पत्र दायर किया गया है।
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उन्होंने गांधी मैदान थाने में मणि प्रकाश यादव के खिलाफ अनैतिक देह व्यापार मामले के आरोप में दर्ज मामले का हवाला दिया। पत्र में कहा गया, ‘‘ मणि प्रकाश के खिलाफ न सिर्फ मामले में आरोप पत्र दायर किया गया है बल्कि वह मामले में जेल में भी है।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘ आप एक महिला है और आपने मुख्यमंत्री के तौर पर सेवा भी दी है। आप न सिर्फ एक लड़की/महिला की पीड़ा ही समझ सकती हैं बल्कि आप एक मां के कर्तव्य को भी बोध हैं।’’
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जदयू की प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि वह अपने बेटों--तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव-- को अच्छे संस्कार देने का कर्तव्य पूरा करने में नाकाम रही हैं। पत्र के मुताबिक, ‘‘ वास्तविकता यह कि आप अपने बेटों को राजनीतिक संस्कार नहीं दे पाईं हैं और चरित्र निर्माण की शिक्षा देने में भी चूक गई हैं।’’
खुले पत्र में कहा गया है कि घर के माहौल के अलावा आसपास का माहौल भी बच्चों की परवरिश पर असर डालता है। इसमें कहा गया है कि एक जनवरी 2008 को नववर्ष की दावत के दौरान दिल्ली के अशोक होटल और कनॉट प्लेस और महरौली के फार्म हाउस पर लड़कियों पर फब्तियां कसने पर अज्ञात व्यक्तियों ने तेजस्वी और तेज प्रताप पर हमला कर दिया था, लेकिन आपने अपने बेटों पर अंकुश नहीं लगाया।