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Train Accident : बालासोर से 32 हजार देकर आए बिहार; घायल बोले- लाशों के लिए और बड़ा हो रहा था खेल

Sun, 04 Jun 2023 09:48 AM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण Updated Sun, 04 Jun 2023 09:48 AM IST
सार

Train Accident : 32 हजार एम्बुलेंस को देकर अपने घर तक पहुंचे हैं। घायलों के लिए 50 हजार से 32 हजार तक जबकि लाश लाने के लिए एक लाख से 80 हजार तक की मांग की जा रही थी। यह किसी एक की नहीं है बल्कि कई लोगों की जुबानी है जो अमर उजाला आपके सामने ला रहा है।

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Ambulance rate in balasore : After train accident in odisha central and bihar government claim failed, helplin
अस्पताल में इलाजरत घायल ने बताया आपबीती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हमलोग खुद का पैसा लगाकर अपने घर तक पहुंचे हैं। 32 हजार एम्बुलेंस को देना पड़ा। हम घायलों के लिए 50 हजार से 32 हजार तक कीमत बताई जा रही थी जबकि लाश लाने के लिए एक लाख से 80 हजार तक की मांग की जा रही थी। इतना ही नहीं जैसी लाश वैसी कीमत बताई जा रही थी। आलम यह हुआ कि लोग अपने घर से गांव से लोगों को चंदा करके किसी तरह रुपया मंगवाना पड़ा। यह कहना है उन घायलों का जो बालासोर रेल दुर्घटना के शिकार हुए हैं और वापस अपने घर लौट रहे हैं। यह किसी एक की कहानी नहीं है बल्कि ऐसे हजारों लोगों की जुबानी है जो अमर उजाला आपके सामने ला रहा है।

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32 हजार रुपये चुकाने पड़े
बालासोर रेल दुर्घटना में घायल बिहार के लोग अपनी जान बचाने के लिए किसी तरह अपने घर पहुंच रहे हैं। घर लौटे मजदूरों का कहना है कि उन्हें अपने घर आने में एम्बुलेंस को 32 हजार रुपये चुकाने पड़े हैं। यह बात बता रहे हैं बेगूसराय में इलाज करा रहे लोग। दरअसल बेगूसराय से मजदूरी करने गए 6 मजदूर भी बालासोर में भीषण रेल हादसे में शिकार होकर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायल मोहम्मद अली का कहना है कि वहां समुचित इलाज नहीं हो पा रहा था। इसलिए हमलोगों ने एक एम्बुलेंस किया जिसके लिए हमें 36 हजार रुपये चुकाने पड़े। वहां स्थिति इतनी भयावह है कि सही से लोगों का इलाज नहीं हो पा रहा है। हमलोग किसी तरह वहां से निकले। मोहम्मद अली का कहना है कि हादसा होने के बाद हमलोग वहां से बाहर निकले। हमलोगों ने देखा कि बहुत सा शव इधर उधर पड़ा हुआ था। तब तक स्थानीय लोग भी पहुंचा गए और किसी तरह अस्पताल लेजाकर प्राथमिक उपचार कराये। फिर वहां के लोगों ने एम्बुलेंस से सम्पर्क कराया और 32 हजार में तय कर के हमलोग बेगूसराय पहुंचे।
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जैसी लाश वैसी कीमत 
मोहम्मद अली का कहना है कि एम्बुलेंस वाले कह रहे थे कि आपके साथ अगर लाश है तो उसकी अलग कीमत देनी होगी। इस संबंध में उन्होंने बताया कि एक लाख रुपये तक की मांग की जा रही थी। उन्होंने कहा कि उस लाश में भी उनलोगों ने कैटेगरी बना लिया था। जैसी लाश होगी वैसी कीमत बताई जा रही थी।

जिन्दा लोगों को भी लाश में फेंके जा रहे थे 
घायल मोहम्मद ने तो यहां तक कहा कि जो लोग बहुत ज्यादा गंभीर थे उनकी गिनती भी लाशों में की जा रही थी। हलांकि इस बात में कितनी सच्चाई है यह जांच का विषय है लेकिन घायलों ने यह जरुर कहा कि वहां स्थिति काफी गंभीर है। बिहार सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। 

यह हैं घायल 
बेगूसराय में इलाजरत घायलों में मुफस्सिल थाना क्षेत्र के चिलमिल पंचायत के हरदिया गांव निवासी मो. आफताब का 18 वर्षीय पुत्र मो. नसरूल्लाह, मो. हारूण का 23 वर्षीय पुत्र मो. हैदर व मो. कौशर का 18 वर्षीय पुत्र मो. आलिया के अलावा चिलमिल गांव निवासी मो. अख्तर का पुत्र मो. रहमुल्लाह व मो. रुस्तम का पुत्र मोहम्मद अखलाक शामिल है। 

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पोस्टमार्टम का इंतजार करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
16 रुपये प्रति किलोमीटर में तय किया मधुबनी तक का सफर लेकिन पोस्टमार्टम का इंतजार 
 मधुबनी जिला के गंधवारी निवासी राम उदगार यादव के पुत्र राजेश कुमार यादव की बालासोर ट्रेन दुर्घटना में मौत हो गई है। उन्होंने 16 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से एम्बुलेंस भाड़ा पर किया है। मृतक के साले विकास यादव व अर्जुन यादव ने बताया कि उड़ीसा में पोस्टमार्टम के लिए जगह नहीं मिलने के कारण इनके शव सहित कई लाशों को बंगाल के खरगपुर जिला अंतर्गत फरदाहपुर स्थित चारमारी हॉस्पिटल में भेज दिया गया है। यहां इस हॉस्पिटल में करीब 50 से 60 शव पड़े हुए हैं। हमलोग एंबुलेंस का भाड़ा 16 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से बालासोर गए थे। लेकिन चूँकि लाश का पोस्टमार्टम बंगाल में होना है इसलिए हमलोग बंगाल के खड़गपुर जा रहे हैं। अभी तक लगभग 450 किलामीटर एम्बुलेंस चल चुका है। पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर मधुबनी जिला लौटेंगे जो बंगाल से लगभग 800 से 900 किलोमीटर दूर है।

दरभंगा से 35 हजार में जा रहे हैं बालासोर 
दरभंगा जिला के बेनीपुर निवासी दयाराम यादव ने बताया कि उनके पुत्र राकेश कुमार का ट्रेन दुर्घटना में दोनों पैर और हाथ टूट गया है। वहां किसी हॉस्पिटल में उसका इलाज चल रहा है। सूचना मिलते ही वे दरभंगा से एक स्कार्पियो 35000 में भाड़ा पर लेकर जा रहे हैं। 
 

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चंदा करने के लिए विचार करते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
परिवार के लिए गांव कर रहा चंदा 
बालासोर रेल दुर्घटना में मधुबनी के सुंदर सदाय और दिलीप सदाय की भी मौत हुई है। परिजनों का कहना है कि गांव से 8 लोग जा रहे थे जिसमें 2 की दर्दनाक मौत हुई है बाकी 6 लोग घायल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वहां के स्थानीय प्रशासन और रेल प्रशासन के द्वारा कहा गया है कि शव आने में अभी काफी समय लगेगा। इसलिए ग्रामीणों के सहयोग से 2 निजी एंबुलेंस भाड़े पर लिया गया है जिसमें शव को लाया जा रहा है। ग्रामीण रितेश कुमार राय ने बताया कि पूरे गांव में शव लाने के लिए चंदा किया जा रहा है। स्थानीय विधायक के द्वारा भी मदद की जा रही है। इसके माध्यम से 55 से ₹60 हजार रुपये की मांग की गई है। 
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