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असेंबली में विश्वासमत पर वोटिंग खत्म, नीतीश बोले- सत्ता भोग के लिए नहीं होती

Fri, 28 Jul 2017 02:14 PM IST
amarujala.com- presented by: मनीष कुमार
amarujala.com- presented by: मनीष कुमार Updated Fri, 28 Jul 2017 02:14 PM IST
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after cm nitish kumar joined NDA now floor test in bihar assembly will give final move

बिहार की राजनीति में आए तूफान के बीच विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए वोटिंग खत्म हो गई है। फ्लोर टेस्ट में बहुमत हासिल करने वाले सीएम नीतीश कुमार ने आरजेडी के तीखे हमलों का करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सत्ता सेवा के लिए होती है न कि भोग के लिए होती है।

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बिहार विधानसभा में जबरदस्त हंगामे के बीच सीएम नीतीश कुमार ने विश्वासमत का प्रस्ताव पेश कर दिया है और लालू के बेटे तेजस्वी यादव को नेता विपक्ष घोषित किया जा चुका है। नेता विपक्ष घोषित किए गए तेजस्वी ने सीएम नीतीश को 'बॉस' कह डाला और उनपर भड़कते हुए कहा कि अगर हिम्मत होती तो मुझे बर्खास्त करते।
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इतना ही नहीं मेरे आत्म विश्वास से नीतीश डर गए।तेजस्वी ने ये भी कहा कि नीतीश कुमार महात्मा गांधी के हत्यारों से मिल गए हैं, साथ ही उन्होंने तीखा विरोध जाहिर करते हुए कहा कि नीतीश को सुशील कुमार मोदी के साथ बैठन में शर्म नहीं आई।
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आरोपों का पलटवार करते हुए बीजेपी ने कहा कि तेजस्वी को सत्ता के जाने का दर्द है। वहीं हंगामे के बीच आरजेडी ने मांग की है कि गोपनीय ढंग में ये फ्लोर टेस्ट करवाया जाए।
 
बता दें कि लालू यादव का साथ छोड़कर नरेंद्र मोदी का हाथ थामने वाले नीतीश कुमार 16 घंटे में ही फिर मुख्यमंत्री बन गए। उन्होंने छठी बार यह कुर्सी संभाली है। राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने बृहस्पतिवार सुबह उन्हें पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने भी बतौर उप-मुख्यमंत्री शपथ ली।

नीतीश शुक्रवार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेंगे। विश्वास मत हासिल करने के बाद मंत्रिपरिषद का विस्तार किया जाएगा। जेडीयू ने कहा है कि सीएम नीतीश के पक्ष में क्रॉस वोटिंग हो सकती है। नीतीश के इस्तीफे के साथ आया सियासी भूचाल बुधवार देर रात तक चला। आधी रात 12 बजे के बाद नीतीश-सुशील ने राज्यपाल त्रिपाठी से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। तब तक

राज्यपाल लालू-तेजस्वी को सुबह 11 बजे मिलने का वक्त दे चुके थे। चूंकि नीतीश ने 132 विधायकों की लिस्ट सौंपी थी, राज्यपाल ने उन्हें सुबह 10 बजे ही शपथ दिलाने का फैसला सुना दिया। पहले शपथ का वक्त शाम 5 बजे तय किया गया था। ठीक सुबह 10 बजे राजभवन के राजेंद्र मंडप में राज्यपाल ने नीतीश एवं सुशील को शपथ दिलवाई और महज आठ मिनट में समारोह पूरा हो गया।

केंद्र में बनेंगे जदयू के दो मंत्री

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समारोह में केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा और भाजपा महामंत्री अनिल जैन भी शामिल हुए। शपथ के दौरान जय भारत और जय श्री राम के नारे लगे। सूत्रों का दावा है कि मोदी मंत्रिमंडल में जदयू के दो मंत्री बनेंगे। नीतीश की दोस्ती के फैसले के साथ ही यह बात तय हो गई थी।

इस बीच, शरद यादव की नाराजगी की खबरें भी आईं हैं। शरद शपथ ग्रहण में मौजूद नहीं थी। दोपहर में जदयू के महासचिव अरुण श्रीवास्तव ने मीडिया से कहा कि नीतीश ने फैसले से पहले किसी वरिष्ठ नेता से चर्चा नहीं की।

इस बीच, शरद बृहस्पतिवार को राहुल गांधी से भी मिले। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली से भी उनकी मुलाकात की खबर है। माना जा रहा है कि जेटली को उन्हें मनाने का जिम्मा दिया गया है। राजी होने पर मोदी सरकार में उन्हें भी जगह मिल सकती है।

लालू बोले-तेजस्वी बहाना था, भाजपा की गोद में जाना था, राज्यपाल के खिलाफ जाएंगे सुप्रीम कोर्ट

चारा घोटाले सुनवाई के लिए रांची पहुंचे लालू यादव ने नीतीश को भस्मासुर करार दिया। उन्होंने कहा, तेजस्वी बहाना था, असल में तो उन्हें भाजपा की गोद में जाना था। उन्होंने कहा, सबसे बड़े दल के रूप में राजद को सरकार बनाने का न्योता दिया जाना चाहिए था, राज्यपाल के फैसले के खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

नीतीश के कफन में जेब नहीं झोला है...लालू ने आरोप लगाया कि नीतीश के कफन में जेब नहीं, झोला है। नीतीश ने इस्तीफे के बाद लालू पर तंज किया था कि लोग इतना लालच क्यों करते हैं, कफन में जेब नहीं होती। लालू का अब भी आरोप था कि नीतीश ने ही ईडी-सीबीआई में फर्जी केस दर्ज करवाए हैं।

राहुल ने कहा-नीतीश ने बड़ा धोखा दिया

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि नीतीश ने पूरे बिहार को बड़ा धोखा दिया है। देश की राजनीति का यही दुर्भाग्य है कि सत्ता और स्वार्थ के लिए लोग कुछ भी कर सकते हैं।

सवाल, क्या सबसे बड़े दल को बुलाना जरूरी है?

बिहार में लालू का राजद सबसे बड़ी पार्टी है। परंपरा है कि विधानसभा में सबसे पहले सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाना चाहिए। राजद ने बुधवार को यह मांग भी की थी। लेकिन, बाद में कई मामलों में व्यवस्था आई कि किसी को साफ बहुमत न मिलने पर महज सबसे बडे़ दल को बुलाना जरूरी नहीं है, राज्यपाल को सरकार का स्थायित्व देखना चाहिए। राज्यपाल विवेकाधिकार से तय करेंगे कि स्थायित्व कौन दे सकता है। इसीलिए राज्यपाल के विवेकाधिकार को लेकर खासी बहस होती रहीं हैं।

जानकारों का कहना है कि नीतीश ने 132 विधायकों के समर्थन का दावा किया है, जो बहुमत से 10 ज्यादा हैं। इसलिए राज्यपाल का उन्हें न्योता देना सही है। कर्नाटक के चर्चित एसआर बोम्मई केस में चूंकि सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि बहुमत का फैसला विधानमंडल में होना चाहिए। लिहाजा, शपथ के अगले दिन ही शुक्रवार को नीतीश बहुमत साबित करेंगे। इससे सारे विवादों पर विराम लग जाएगा।

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