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पकौड़े बेचने वाला शख्स अब तक कर चुका है 2091 शवों का अंतिम संस्कार

Fri, 16 Feb 2018 04:43 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर Updated Fri, 16 Feb 2018 04:43 PM IST
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A person who sells pakoda has Funeral of 2091 dead bodies in Munger
पकौड़े

पूरे देश में पकौड़े पर राजनीति हो रही है। इसे लेकर राजनीतिक रोटियां भी सेकीं जा रही हैं। लेकिन बिहार में एक ऐसा पकौड़े बेचने वाला भी है जो न केवल इससे अपनी गुजर कर रहा है बल्कि लावारिश शवों की इज्जत के साथ अंत्येष्टि भी करवाता है।

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इनका नाम है निसार अहमद आसी और ये बिहार के मुंगेर जिले में पकौड़े बेचने का काम करते हैं। इन्होंने अपने जीवन को लाशों के लिए समर्पित कर दिया है। बेशक ये खबर आपको चौंकाने वाली लग सकती है क्योंकि आमतौर पर लोग सड़क पर पड़ी किसी लावारिस लाश से मुंह मोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन निसार साहब ऐसा नहीं करते, बल्कि वो शव को सुपुर्द-ए-खाक भी करते हैं।

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पूरी जिंदगी खर्च कर दी

A person who sells pakoda has Funeral of 2091 dead bodies in Munger

निसार साहब की उम्र 84 साल हो चुकी है। लेकिन मदद के लिए ये किसी नौजवान से ज्यादा फुर्तीले हो जाते हैं। वह बताते हैं कि लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता मो. हाफिज अब्दुल माजिद से मिली। उन्होंने 1958 में अंजुमन मोफीदुल इस्लामनामा संस्था की स्थापना की। इसका उद्घाटन उस समय के विधानसभा अध्यक्ष गुलाम सरवर ने किया था।

1967-68 में शहर के सुतूरखाना में एक समारोह में भोजन में जहर मिले होने की वजह से चार लोग मौत हो गई थी। इनका अंतिम संस्कार निसार ने ही किया था। बता दें कि निसार अहमद ने 1972 में पूरबसराय में नेशनल उर्दू गर्ल्स कॉलेज की स्थापना की। निसार ने औरंगजेब द्वारा बनवाई गई जामा मस्जिद के एक कोने में बैठकखाना बना रखा है, जहां पर किसी और की नहीं, बल्कि लावारिस शवों की तस्वीरें लगी हैं।

निसार की मानें तो एक शव के अंतिम संस्कार में दो से तीन हजार रुपये का खर्च आता है। इस राशि का इंतजाम वह चंदा और वृद्धा पेंशन से मिलने वाली रकम से यह काम करते हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक इंटरव्यू के दौरान युवाओं को रोजगार देने के सवाल पर कहा था कि सरकारी नौकरी सभी को नहीं दी जा सकती है, लोग चाय- पकौड़े की दुकान चलाकर भी पैसा कमा सकते हैं।

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