फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   a bridge where mp and mla are not allowed to cross

पुल जिससे विधायकों-सांसदों का गुजरना मना है!

Sat, 28 Dec 2013 12:58 PM IST
Updated Sat, 28 Dec 2013 12:58 PM IST
विज्ञापन
a bridge where mp and mla are not allowed to cross

अगले साल होने वाले आम चुनावों के लिए मतदान की तारीखों की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन पिडरी पंचायत के कमलपुर गांव के लोगों ने वोट बहिष्कार की घोषणा कर दी है।

विज्ञापन


ग्रामीणों ने पुल निर्माण की अपनी दशकों पुरानी मांग पूरी न होने के विरोध में यह घोषणा की है।

बिहार के दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड का कमलपुर कमला नदी के किनारे बसा है। स्थायी पुल की मांग पूरी न होते देख लोगों ने एक जून को खुद ही एक चचरी यानी लकडी और बांस का पुल बनाने का निर्णय किया, जिससे होकर दोपहिया और तिपहिया वाहन गुजर सकें।
विज्ञापन


तीन महीने में पुल
ग्रामीणों ने अपने संसाधनों यानी लकडी, बांस और चंदे के पैसे से 25 जून को पुल बनाना शुरू किया। 25 सितंबर को बाकायदा शिलापट्ट के साथ इस पुल का उद्घाटन हो गया। ग्रामीण शिवशंकर साव के अनुसार लगभग बीस पंचायत के हजारों लोगों की आबादी इसका उपयोग कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यहां के रहने वाले महेश्वर राम चंदे के हिसाब-किताब का रजिस्टर दिखाते हुए बताते हैं कि पुल निर्माण के लिए लगभग सवा लाख रुपए चंदे के रूप में मिले। व्यक्तिगत चंदे की बात करें, तो सबसे ज्यादा चंदा पांच हजार का मिला।

वह बताते हैं कि अगर पुल के लिए जरूरी बांस और लकडी खरीदनी पडती, तो पूरा खर्च पांच लाख से अधिक का आता। पुल के रखरखाव पर सालाना लगभग 50 हजार का खर्च आने की संभावना है। पुल पर ग्रामीणों ने फिलहाल कोई ‘टोल-टैक्स’ नहीं लगाया है।

विधायकों-सांसदों को न
पुल बनने के बाद ग्रामीणों ने दो बडे फैसले किए। प्रदीप कुमार कहते हैं, "हमने फैसला किया है कि स्थायी पुल निर्माण शुरू होने तक इससे जनप्रतिनिधियों के गुजरने की मनाही रहेगी और पुल न बनने पर हम लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार करेंगे।"

कलमपुर के ग्रामीणों ने बताया कि उनकी अपनी पंचायत पिडरी सहित आसपास के दूसरी पांच पंचायतों के लोगों ने भी वोट बहिष्कार का समर्थन किया है। इनमें सोनकी, बरुआरा, मेकना-वेदा, सिनुआर और मेहम्मदपुर पंचायत शामिल हैं।

फिलहाल इस पुल के दोनों छोरों पर इन फैसलों से जुडे एक-एक बैनर लहरा रहे हैं। पुल निर्माण में पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों का योगदान देखते हुए उन पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।

लाखों का चंदा
ग्रामीण पहले भी हर बरसात के बाद नदी पार करने के लिए लचका पुल यानी की बांस का अस्थायी पुल बनाते थे। इससे साइकिल के अलावा किसी दूसरे वाहन का गुजरना संभव नहीं होता था और बरसात के समय नदी में पानी ज्यादा होने से यह ध्वस्त भी हो जाता था।

मगर अब ग्रामीण चचरी पुल का निर्माण कर लेने भर से संतुष्ट नहीं हैं। ग्रामीण विष्णुकांत झा ने बताया कि बरसात के अगले मौसम के पहले तक पुल को दो फुट और चौडा और ऊंचा करने की योजना पर काम चल रहा है। फिलहाल यह पुल लगभग 180 फुट लंबा, 30 फुट ऊंचा और आठ फुट चौडा है।

पुल मजबूत करने में करीब पांच लाख रुपए और खर्च होंगे। इसके लिए एक बार फिर चंदा करने का काम शुरू हो चुका है। गांव वालों को यह उम्मीद है कि अगले साल महाशिवरात्रि पर होने वाले यज्ञ के समय पुल के लिए बडे पैमाने पर दान मिलेगा।

‘सांसद निधि से संभव नहीं’
ग्रामीणों ने पुल से जनप्रतिनिधियों के गुजरने की मनाही तो कर रखी है पर क्षेत्र के सांसदों, विधायकों और उम्मीदवारों को निजी उपयोग के लिए शायद ही इस पुल का उपयोग करने की जरूरत पडे। हां, वोट छह पंचायतों के हजारों मतों की जरूरत उन्हें जरूर पडेगी।

ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस गतिरोध को तोडने कौन सामने आता है और यह कैसे दूर होता है।

इस बारे में स्थानीय सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि वे क्षेत्र लौटने पर कमलपुर के लोगों से मिलेंगे और वोट बहिष्कार न करने की अपील करेंगे।

पुल निर्माण को उन्होंने राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला और जिम्मेवारी बताया। उनका कहना है कि उन्होंने कमलपुर पुल सहित कई पुलों के निर्माण के लिए राज्य सरकार को लिख रखा है।

क्या सांसद निधि से वे पुल बनवाएंगे? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि इस छोटी सी राशि से ऐसे निर्माण कराना संभव नहीं है।

क्षेत्र में दर्जनों पुलों की जरूरत बताते हुए स्थानीय विधायक मदन साहनी ने कहा कि संसाधनों के अभाव में यह संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में भविष्य में बनने वाले चुनिंदा पुल उन जगहों पर बनेंगे, जहां उनकी ज्यादा जरूरत होगी। उनके अनुसार लोगों के विरोध और मांग के आधार पर पुल के स्थान का फैसला नहीं लिया जा सकता।

पुल के लिए धरना
पडरी पंचायत के मुखिया रामबाबू यादव एक दूसरी संभावना की ओर भी इशारा करते है। वे कहते हैं कि पुल निर्माण न भी शुरू हुआ, तो हम किसी ऐसे उम्मीदवार के पक्ष में अपना फैसला वापस ले सकते हैं जिनके वादे पर ग्रामीण सामूहिक रूप से भरोसा करें।


इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ जिला प्रशासन का ध्यान पुल निर्माण की ओर खींचने के लिए ग्रामीणों ने नए साल में दो जनवरी से जिला मुख्यालय पर चरणबद्ध धरना देने का कार्यक्रम बनाया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed