बड़े दलों के लिये हमेशा सिरदर्द साबित हुए हैं निर्दलीय उम्मीदवार
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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं और एक बार फिर बड़ी से लेकर छोटी पार्टियां अपने राजनीतिक हित साधने में लगीं हैं। इन पार्टियों के सामने हमेशा एक चुनौती निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी होती है। ये किसी भी दल से संबंध तो नहीं रखते हैं लेकिन चुनाव को प्रभावित करने में इनकी अहम भूमिका होती है। अपने व्यवहार और संपर्क की दम पर ये चुनाव लड़ने का काम करते हैं। ऐसे प्रत्याशियों की संख्या तो काफी होती है लेकिन जीतने का प्रतिशत बहुत कम होता है। यहीं कारण है कि मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में 1980 से 2013 के बीच मात्र 49 प्रत्याशी ही जीत का हासिल कर सके।
इनके जीतने का प्रतिशत भले ही कम रहता है पर इनको मिलने वाले वोटों की संख्या बड़ी पार्टियों की जीत-हार को काफी प्रभावित करती है। मध्यप्रदेश में इनका सबसे ज्यादा प्रभाव 1990 में देखने को मिला था जब कुल वोटों में से इन्हें 12.31 प्रतिशत वोट हासिल करने में सफलता मिली थी। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों की जीतने की संख्या 10 तक पहुंच गई थी। वहीं अगर 1998 के चुनावों की बात करें तो इन्हें 6.49 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे और जीतने वाले प्रत्याशियों की संख्या 9 थी। लेकिन 2013 में इनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था और इन्हें मात्र 5.38 प्रतिशत वोट ही मिले थे।
चुनावी वर्ष - वोट प्रतिशत- विजयी उम्मीदवार
1980- 10.26 - 8
1985- 10.82 - 6
1990- 12.31 - 10
1993- 5.8 - 8
1998- 6.49 - 9
2003- 7.70 - 2
2008- 8.23 - 3
2013- 5.38 - 3
