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मध्यप्रदेश में सियासी हलचल बढ़ी, भाजपा ने कमलनाथ सरकार के अल्पमत में होने का किया दावा

Mon, 20 May 2019 04:50 PM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: संदीप भट्ट Updated Mon, 20 May 2019 04:50 PM IST
सार

  • भाजपा ने कहा- विशेष सत्र बुलाया जाए, नाथ बोले- 4 बार बहुमत साबित कर चुके
  • सियासी घमासान : एग्जिट पोल के नतीजों के बाद प्रदेश में राजनीति गरमाई 
  • नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल को लिखा पत्र

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BJP Wrote Letter To Governor Of Madhya Pradesh Said State Government In The Minority
Kamalnath - फोटो : social media

विस्तार

एग्जिट पोल के नतीजों से प्रदेश में सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा इन नतीजों को लोकसभा चुनाव परिणाम में परिवर्तित होना तय मानते हुए इसे जनता का कांग्रेस सरकार के प्रति अविश्वास बता रही है और उससे विश्वास हासिल करने की मांग कर रही है। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने के लिए राज्यपाल को पत्र लिखा है, जिसमें जनसमस्याओं को लेकर चर्चा कराए जाने की बात कही है।

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हालांकि भार्गव के पत्र में फ्लोर टेस्ट कराए जाने का जिक्र नहीं है। दिन भर चले इस घटनाक्रम के बाद शाम को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि भाजपा पहले दिन से फ्लोर टेस्ट करना की बात कर रही है। पिछले पांच महीनों में हमने चार बार अपना बहुमत साबित किया है। विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव की बात हो या उपाध्यक्ष, अनुपूरक बजट हो या बजट की बात। हमने हमेशा अपना बहुमत साबित किया। हमे कोई समस्या नहीं है। 

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जुलाई में है मानसन सत्र 
मानसून सत्र जुलाई में होना संभावित है। सत्र बुलाने के लिए कैबिनेट से अनुमोदित प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा जाएगा, जहां से विधानसभा सचिवालय को उसकी अनुमति भेजी जाएगी। इसके बाद विधानसभा सचिवालय सत्र की अधिसूचना जारी करेगा। 

कांग्रेस सरकार बनने के बाद विधानसभा के दो सत्र हो चुके हैं, जनवरी में चार दिन का पहला सत्र हुआ था, उसके बाद फरवरी में हुए सत्र में तीन बैठकें हुई। यानी सिर्फ पिछले छह महीने में सिर्फ सात दिन विधानसभा में सदन की कार्रवाई चली है।

पत्र लिखने की क्या जरूरत थी, फोन पर ही कह देते

भार्गव ने राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा है कि नई सरकार बने करीब 6 महीने हो चुके हैं। इस दौरान प्रदेश में कई ज्वलंत समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। प्रदेश में पेयजल का गंभीर संकट हो गया है। कानून व्यवस्था बिगड़ गई है। किसानों को गेहूं-चने का उपार्जन एवं भुगतान नहीं हो पा रहा है। ऋणमाफी को लेकर किसान भ्रमित और परेशान है।

पूर्व से चल रही संबल एवं अन्य लोकप्रिय योजनाओं का लाभ प्रदेश के हितग्राहियों को नहीं मिल पा रहा है। गत 18 फरवरी को हुए दो दिन के सत्र में इन सभी विषयों पर चर्चा नहीं हो सकी थी, जिससे प्रदेश का बड़ा वर्ग आंदोलित है। अत: विशेष सत्र बुलाए जाने के लिए मुख्यमंत्री को निर्देशित करने का कष्ट करें। 

मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से कहा था कि अगर उनके क्षेत्र में कांग्रेस की हार हुई तो मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देना होगा। यदि कांग्रेस हारती है तो क्या कमलनाथ स्वयं भी पद छोड़ेंगे। -शिवराज सिंह चौहान, पूर्व सीएम 

 

मुझे फोन करके कह देते कि हमें बहुमत साबित करना है, मैं उनका स्वागत करता। उन्हें पत्र लिखने की क्या आवश्यकता थी। हमारे पास बहुमत है और इसे फिर साबित करने में हमें कोई परेशानी नहीं है। भाजपा को डर है कि 15 साल में उन्होंने जो घोटाले किए हैं, भ्रष्टाचार किए हैं, ये सब खुलासे न हों। इस सबसे बचने के लिए ये प्रयास कर रहे हैं कि वर्तमान सरकार के काम में किसी भी तरह से बाधा डाली जाए। -कमलनाथ

 

पहले दिन से कमलनाथ सरकार बहुमत में नहीं है। हमने कभी जोड़-तोड़ की कोशिश नहीं की, इसलिए मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन गई है। कांग्रेस के कई विधायक हमारे संपर्क में हैं। -नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय मंत्री

कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं, यह राजनीतिक मांग

विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव बीडी ईसरानी का कहना है कि राज्यपाल को नेता प्रतिपक्ष के पत्र पर सत्र बुलाने की कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है। नेता प्रतिपक्ष जिन मुद्दों की बात कर रहे हैं। उन पर आगामी सत्र में चर्चा की जा सकती है। यह राजनीतिक मांग है। 

सरकार क्या करेगी? 

तय समय पर ही बुलाया जाएगा विधानसभा सत्र : संसदीय कार्यमंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने कहा है कि सरकार भार्गव की मर्जी से नहीं चलेगी। विधानसभा का सत्र भी तय समय से बुलाया जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि यह कमलनाथ की सरकार है, कितने भी फ्लोर टेस्ट करवा लो। भाजपा के भ्रष्टाचारी बच नहीं सकते।

मालूम हो कि मध्यप्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस का 114 सीटों पर कब्जा है, जबकि भाजपा ने 109 सीटों पर जीत दर्ज की थी। दो सीटों पर बसपा, जबकि पांच सीटों पर अन्य का कब्जा है। कांग्रेस यहां 116 के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई थी, जिसके बाद भाजपा के विरोध में बसपा ने समर्थन दिया और कांग्रेस की सरकार बन पाई।
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