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WHO: दक्षिण-पूर्व एशिया में पैदल यात्री, साइकिल-दोपहिया वाहन चालक असुरक्षित, सड़क दुर्घटनाओं में 66% मौतें
Mon, 02 Sep 2024 07:19 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 02 Sep 2024 07:19 PM IST
सार
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया में सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों में 66 प्रतिशत मौतें पैदल यात्रियों, दोपहिया मोटर वाहन चालकों और साइकिल चालकों की होती हैं।
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भीषण सड़क हादसा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया में सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों में 66 प्रतिशत मौतें पैदल यात्रियों, दोपहिया मोटर वाहन चालकों और साइकिल चालकों की होती हैं। जबकि भारत में सबसे ज्यादा घातक दुर्घटनाएं दोपहिया और तिपहिया वाहन चालकों की होती हैं।
"डब्ल्यूएचओ साउथ-ईस्ट एशिया रीजनल स्टेटस रिपोर्ट ऑन रोड सेफ्टी" को "सुरक्षा 2024", चोट रोकथाम और सुरक्षा संवर्धन पर 15वां विश्व सम्मेलन, 2024 के दौरान लॉन्च किया गया था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, वैश्विक स्तर पर, सड़क यातायात से होने वाली मौतों में से 30 प्रतिशत मौतें पावर्ड टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के उपयोगकर्ताओं से संबंधित हैं।
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चार पहिया वाहनों में सवार लोगों की मृत्यु 25 प्रतिशत होती है और पैदल चलने वालों की मृत्यु 21 प्रतिशत होती है। साइकिल सवारों की मृत्यु 5 प्रतिशत होती है। शेष 20 प्रतिशत में बड़े वाहनों, भारी मालवाहक वाहनों और अन्य या अज्ञात उपयोगकर्ता प्रकार के यात्री शामिल हैं।
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"डब्ल्यूएचओ साउथ-ईस्ट एशिया रीजनल स्टेटस रिपोर्ट ऑन रोड सेफ्टी" को "सुरक्षा 2024", चोट रोकथाम और सुरक्षा संवर्धन पर 15वां विश्व सम्मेलन, 2024 के दौरान लॉन्च किया गया था।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, वैश्विक स्तर पर, सड़क यातायात से होने वाली मौतों में से 30 प्रतिशत मौतें पावर्ड टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के उपयोगकर्ताओं से संबंधित हैं।
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चार पहिया वाहनों में सवार लोगों की मृत्यु 25 प्रतिशत होती है और पैदल चलने वालों की मृत्यु 21 प्रतिशत होती है। साइकिल सवारों की मृत्यु 5 प्रतिशत होती है। शेष 20 प्रतिशत में बड़े वाहनों, भारी मालवाहक वाहनों और अन्य या अज्ञात उपयोगकर्ता प्रकार के यात्री शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, "डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में, सड़क यातायात से होने वाली मौतों का हिस्सा दोपहिया और तीन पहिया वाहनों के उपयोगकर्ताओं के लिए 46 प्रतिशत, 12 प्रतिशत चार पहिया वाहनों के उपयोगकर्ताओं के लिए, 17 प्रतिशत पैदल यात्रियों के लिए, 3 प्रतिशत साइकिल चालकों के लिए और 22 प्रतिशत अन्य लोगों के लिए है। इन सभी देशों में, सड़क यातायात से होने वाली कुल मौतों में से 66 प्रतिशत मौतें असुरक्षित सड़क उपयोगकर्ताओं (पैदल यात्री, मोटर चालित दोपहिया वाहन उपयोगकर्ता और साइकिल चालक) के कारण होती हैं।"
सड़क हादसा
- फोटो : अमर उजाला
इसमें कहा गया है, "भारत (45.1 प्रतिशत), मालदीव (100 प्रतिशत), म्यांमार (47 प्रतिशत) और थाईलैंड (51.4 प्रतिशत) में सभी सड़क उपयोगकर्ता श्रेणियों में दो और तीन पहियों वाले वाहनों के चालक या सवार सबसे ज्यादा अनुपात बनाते हैं।"
WHO ने उल्लेख किया कि दक्षिण एशिया क्षेत्र में कोई भी देश अपने अनुमानित सड़क यातायात मौतों को 50 प्रतिशत तक कम करने के लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाया था।
हालांकि, मालदीव और थाईलैंड में WHO के अनुमानित सड़क यातायात मौतों में काफी कमी आई। जहां अनुमानित सड़क यातायात मौतों में क्रमशः 46.2 प्रतिशत और 41.7 प्रतिशत की कमी आई।
WHO ने उल्लेख किया कि दक्षिण एशिया क्षेत्र में कोई भी देश अपने अनुमानित सड़क यातायात मौतों को 50 प्रतिशत तक कम करने के लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाया था।
हालांकि, मालदीव और थाईलैंड में WHO के अनुमानित सड़क यातायात मौतों में काफी कमी आई। जहां अनुमानित सड़क यातायात मौतों में क्रमशः 46.2 प्रतिशत और 41.7 प्रतिशत की कमी आई।
इसके उलट, 2010-2021 की अवधि में क्षेत्र में रिपोर्ट की गई सड़क यातायात मौतों में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। देश के स्तर पर, दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का कोई भी सदस्य राज्य, जिसकी आबादी 10 मिलियन (एक करोड़) से ज्यादा है, ने इस अवधि के दौरान सड़क यातायात मौतों में कमी की सूचना दी है।
रिपोर्ट में कहा गया है, "हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि थाईलैंड में रिपोर्ट की गई सड़क यातायात मौतों में 2016 और 2021 के बीच 22.9 प्रतिशत की कमी आई। इस अवधि के दौरान बांग्लादेश, भारत और नेपाल में भी अनुमानित सड़क यातायात मौतों में क्रमशः 23 प्रतिशत, 2 प्रतिशत और 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।"
रिपोर्ट में कहा गया है, "हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि थाईलैंड में रिपोर्ट की गई सड़क यातायात मौतों में 2016 और 2021 के बीच 22.9 प्रतिशत की कमी आई। इस अवधि के दौरान बांग्लादेश, भारत और नेपाल में भी अनुमानित सड़क यातायात मौतों में क्रमशः 23 प्रतिशत, 2 प्रतिशत और 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।"
सड़क हादसा
- फोटो : अमर उजाला
WHO के सामाजिक निर्धारकों के लिए स्वास्थ्य विभाग के निदेशक, एटिएन क्रुग ने कहा कि सड़क यातायात दुर्घटनाएं 21वीं सदी का एक प्रमुख संकट थीं।
उन्होंने कहा, "...सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाले लोगों का एक बड़ा हिस्सा वे हैं जो कार खरीदने का खर्च नहीं उठा सकते। यह कार्रवाई करने का समय है। रिपोर्ट से पता चलता है कि संकट बहुत बड़ा है। लेकिन हमें दृढ़ संकल्प के साथ समझने और कार्य करने की जरूरत है कि रोकथाम संभव है। और इसके लिए सख्त प्रवर्तन की आवश्यकता है।"
उन्होंने कहा, "...सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाले लोगों का एक बड़ा हिस्सा वे हैं जो कार खरीदने का खर्च नहीं उठा सकते। यह कार्रवाई करने का समय है। रिपोर्ट से पता चलता है कि संकट बहुत बड़ा है। लेकिन हमें दृढ़ संकल्प के साथ समझने और कार्य करने की जरूरत है कि रोकथाम संभव है। और इसके लिए सख्त प्रवर्तन की आवश्यकता है।"
तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली, जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के सहयोग से ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज (AIIMS), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (NIMHANS) और WHO द्वारा सह-प्रायोजित किया जा रहा है।
जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ में चोट विभाग के प्रमुख जगनूर जगनूर ने कहा, "असमानताओं को कम करने के लिए, हमें यह स्वीकार करना होगा कि चोटें असमान रूप से कमजोर समुदायों को प्रभावित करती हैं। क्योंकि हम वास्तविक समस्याओं को वास्तविक समाधानों के साथ हल करने में बहुत पीछे हैं। अनुभव दिखाता है कि नीति कैसे अंतर भेद, जोखिम और नतीजों को आकार देती है, जो परिवर्तन की तत्काल जरूरत पर जोर जेती है।"
जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ में चोट विभाग के प्रमुख जगनूर जगनूर ने कहा, "असमानताओं को कम करने के लिए, हमें यह स्वीकार करना होगा कि चोटें असमान रूप से कमजोर समुदायों को प्रभावित करती हैं। क्योंकि हम वास्तविक समस्याओं को वास्तविक समाधानों के साथ हल करने में बहुत पीछे हैं। अनुभव दिखाता है कि नीति कैसे अंतर भेद, जोखिम और नतीजों को आकार देती है, जो परिवर्तन की तत्काल जरूरत पर जोर जेती है।"
सम्मेलन के दौरान, अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ "सभी के लिए एक सुरक्षित भविष्य का निर्माण: चोट और हिंसा रोकथाम के लिए न्यायसंगत और स्थायी रणनीतियां" के साझा लक्ष्य के साथ एकजुट हो रहे हैं।
सम्मेलन पांच प्रमुख विषयों पर ध्यान केंद्रित करेगा - हितधारकों के बीच समन्वय और सहयोग में सुधार, अनुसंधान और अभ्यास के लिए क्षमता को मजबूत करना, चोट रोकथाम को वैश्विक स्वास्थ्य एजेंडा जैसे स्थिरता और समानता के साथ एकीकृत करना, समुदायों को सशक्त बनाना और सूचित नीति निर्माण को बढ़ावा देना।
सम्मेलन पांच प्रमुख विषयों पर ध्यान केंद्रित करेगा - हितधारकों के बीच समन्वय और सहयोग में सुधार, अनुसंधान और अभ्यास के लिए क्षमता को मजबूत करना, चोट रोकथाम को वैश्विक स्वास्थ्य एजेंडा जैसे स्थिरता और समानता के साथ एकीकृत करना, समुदायों को सशक्त बनाना और सूचित नीति निर्माण को बढ़ावा देना।