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Auto Sector e-waste: ऑटो क्षेत्र में क्यों बढ़ रहा है ई-कचरा? पैदा हो रहे इतने ई-कचरे का क्या होगा?
Thu, 04 Apr 2024 04:11 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 04 Apr 2024 04:11 PM IST
सार
वाहन उद्योग यात्री वाहनों में दिए जाने वाले फीचर्स के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हालांकि, वाहनों में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स को लगातार अपनाने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण चुनौती भी सामने आती है। और वह है इलेक्ट्रॉनिक कचरा, या ई-कचरा।
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Car Infotainment System
- फोटो : For Reference Only
विस्तार
वाहन उद्योग हाल ही में यात्री वाहनों में दिए जाने वाले फीचर्स के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है। तेजी से हो रहे इस विकास के पीछे टेक्नोलॉजी का अहम रोल है। हालांकि, वाहनों में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स को लगातार अपनाने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण चुनौती भी सामने आती है। और वह है इलेक्ट्रॉनिक कचरा, या ई-कचरा।
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ऑटो क्षेत्र में ई-कचरा क्या है?
आसान शब्दों में कहें तो, ई-कचरा का मतलब है हटा दिए गए इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण। और ऑटो क्षेत्र में, इसमें इंफोटेनमेंट सिस्टम, ड्राइवर डिस्प्ले और अन्य सेंसर और इनपुट/आउटपुट डिवाइस शामिल हैं। जैसे-जैसे मॉडर्न कारें फंक्शन, सुविधा और परफॉर्मेंस के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर ज्यादा निर्भर होती जा रही हैं। निर्माता कंपनियां अपने वाहनों में ज्यादा फीचर्स की पेशकश करने के लिए आपस में कड़ी प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। और ऐसी स्थिति में ऑटो क्षेत्र द्वारा ओवरऑल पैदे होने वाले ई-कचरे की मात्रा भी बढ़ रही है।
आसान शब्दों में कहें तो, ई-कचरा का मतलब है हटा दिए गए इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण। और ऑटो क्षेत्र में, इसमें इंफोटेनमेंट सिस्टम, ड्राइवर डिस्प्ले और अन्य सेंसर और इनपुट/आउटपुट डिवाइस शामिल हैं। जैसे-जैसे मॉडर्न कारें फंक्शन, सुविधा और परफॉर्मेंस के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर ज्यादा निर्भर होती जा रही हैं। निर्माता कंपनियां अपने वाहनों में ज्यादा फीचर्स की पेशकश करने के लिए आपस में कड़ी प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। और ऐसी स्थिति में ऑटो क्षेत्र द्वारा ओवरऑल पैदे होने वाले ई-कचरे की मात्रा भी बढ़ रही है।
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ऑटो क्षेत्र में ई-कचरा क्यों बढ़ रहा है?
ऑटो उद्योग में ई-कचरे के बढ़ने के पीछे प्राथमिक कारणों में से एक तकनीकी उन्नति को तेजी से अपनाना है। मॉडर्न पैसेंजर व्हीकल्स (यात्री वाहनों), यहां तक कि दोपहिया वाहनों और व्यावसायिक वाहनों में भी लगातार नए, ज्यादा बेहतर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को लगाया जा रहा है। हालांकि, जैसे-जैसे पुराने उपकरण अप्रचलित हो जाते हैं, उन्हें अक्सर हटा दिया जाता है, जो ई-कचरे की समस्या में योगदान देता है।
ऑटो उद्योग में ई-कचरे के बढ़ने के पीछे प्राथमिक कारणों में से एक तकनीकी उन्नति को तेजी से अपनाना है। मॉडर्न पैसेंजर व्हीकल्स (यात्री वाहनों), यहां तक कि दोपहिया वाहनों और व्यावसायिक वाहनों में भी लगातार नए, ज्यादा बेहतर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को लगाया जा रहा है। हालांकि, जैसे-जैसे पुराने उपकरण अप्रचलित हो जाते हैं, उन्हें अक्सर हटा दिया जाता है, जो ई-कचरे की समस्या में योगदान देता है।
साथ ही, वाहन के कुल लाइफ की तुलना में इन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और कंपोनेंट्स की लाइफ कम होती है। इसलिए, जब ये कंपोनेंट्स पुराने हो जाते हैं, तो उन्हें अक्सर मरम्मत के बजाय बदल दिया जाता है। जिससे ई-कचरा जमा होता है।
इसके अलावा, ऑटो उद्योग में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के लिए स्टैंडर्डाइज्ड रिसाइकल प्रोसेस (मानकीकृत पुनर्चक्रण प्रक्रियाओं) का नहीं होना भी समस्या को और बढ़ा देता है। धातु या प्लास्टिक जैसी सामग्री के उलट, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स में अक्सर सीसा, पारा और कैडमियम जैसे खतरनाक पदार्थ होते हैं। जिससे उनका सुरक्षित रूप से निपटारा करना मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा, ऑटो उद्योग में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के लिए स्टैंडर्डाइज्ड रिसाइकल प्रोसेस (मानकीकृत पुनर्चक्रण प्रक्रियाओं) का नहीं होना भी समस्या को और बढ़ा देता है। धातु या प्लास्टिक जैसी सामग्री के उलट, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स में अक्सर सीसा, पारा और कैडमियम जैसे खतरनाक पदार्थ होते हैं। जिससे उनका सुरक्षित रूप से निपटारा करना मुश्किल हो जाता है।
ऑटो क्षेत्र में ई-कचरा: आगे क्या होगा?
जबकि निर्माता कंपनियां, कंपोनेंट सप्लाई करने वाले और अन्य संबंधित उद्योगों ने पहले ही अपने कार्यों में सस्टेनेबल प्रैक्टिस को अपनाना शुरू कर दिया है। वहीं उद्योग के कुछ हितधारक भी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के लिए ज्यादा पर्यावरण के अनुकूल रिसाइकल प्रोसेस को विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं। उदाहरण के लिए, पैदा होने वाले ई-कचरे की मात्रा इस समय हमारे पास मौजूद बुनियादी ढांचे की तुलना में अपेक्षाकृत बहुत ज्यादा है।
इसके अलावा, उपभोक्ता भी निर्दिष्ट रिसाइकल फैसिलिटी पर इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का सही निपटान करके अपनी भूमिका निभा सकते हैं। जो ई-कचरे के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में मदद करेगा।
जबकि निर्माता कंपनियां, कंपोनेंट सप्लाई करने वाले और अन्य संबंधित उद्योगों ने पहले ही अपने कार्यों में सस्टेनेबल प्रैक्टिस को अपनाना शुरू कर दिया है। वहीं उद्योग के कुछ हितधारक भी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के लिए ज्यादा पर्यावरण के अनुकूल रिसाइकल प्रोसेस को विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं। उदाहरण के लिए, पैदा होने वाले ई-कचरे की मात्रा इस समय हमारे पास मौजूद बुनियादी ढांचे की तुलना में अपेक्षाकृत बहुत ज्यादा है।
इसके अलावा, उपभोक्ता भी निर्दिष्ट रिसाइकल फैसिलिटी पर इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का सही निपटान करके अपनी भूमिका निभा सकते हैं। जो ई-कचरे के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में मदद करेगा।