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Hybrid Cars: हाइब्रिड वाहनों का सबसे बड़ा बाजार बना उत्तर प्रदेश, दिल्ली और कर्नाटक ईवी अपनाने में आगे

Wed, 31 Dec 2025 07:57 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 31 Dec 2025 07:57 PM IST
सार

जहां दिल्ली, कर्नाटक और चंडीगढ़ भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तरफ बढ़ रहे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश हाइब्रिड गाड़ियों के लिए देश के सबसे बड़े बाजार के तौर पर एक अलग रास्ता अपना रहा है।

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Uttar Pradesh Emerges as India’s Hybrid Car Hub While Delhi and Karnataka Lead EV Adoption
2025 Maruti Suzuki Grand Vitara - फोटो : Maruti Suzuki

विस्तार

जहां दिल्ली, कर्नाटक और चंडीगढ़ भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की अगुवाई कर रहे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश ने एक अलग राह अपनाते हुए देश के सबसे बड़े हाइब्रिड कार बाजार के रूप में अपनी पहचान बना ली है। 2025 में भारत में बिकने वाली हर छह स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों में से लगभग एक का पंजीकरण उत्तर प्रदेश में हुआ। जो उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं को साफ तौर पर दर्शाता है।
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राष्ट्रीय औसत से कहीं आगे यूपी की हिस्सेदारी
आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की कुल कार रजिस्ट्रेशन में हिस्सेदारी 11.6 प्रतिशत रही, लेकिन हाइब्रिड कारों की बिक्री में इसका हिस्सा बढ़कर 16.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह अंतर बताता है कि राज्य के खरीदार ईंधन दक्षता को प्राथमिकता दे रहे हैं। लेकिन पूरी तरह से इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) को छोड़ने के लिए अभी तैयार नहीं हैं। इस मामले में केवल महाराष्ट्र 14.6 प्रतिशत और दिल्ली 7.4 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ कुछ हद तक करीब नजर आते हैं।

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Uttar Pradesh Emerges as India’s Hybrid Car Hub While Delhi and Karnataka Lead EV Adoption
Volkswagen ID.4 - फोटो : Volkswagen
टैक्स छूट बनी हाइब्रिड मांग की बड़ी वजह
उत्तर प्रदेश में हाइब्रिड वाहनों की लोकप्रियता के पीछे सबसे बड़ा कारण राज्य की वित्तीय नीति रही। राज्य की ईवी नीति के तहत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी गई थी, जो 13 अक्तूबर तक लागू रही। आम तौर पर यूपी में 10 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों पर 8 प्रतिशत और इससे ऊपर की कारों पर 10 प्रतिशत रोड टैक्स लगता है। ऐसे में इस छूट ने खास तौर पर प्रीमियम हाइब्रिड कार खरीदने वालों को बड़ा फायदा पहुंचाया और मांग को तेज किया।

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महानगरों में EV की तेज रफ्तार
दूसरी ओर, देश के कुछ हिस्सों में ट्रांजिशन की तस्वीर बिल्कुल अलग है। दिल्ली, कर्नाटक और चंडीगढ़ ईवी अपनाने के मामले में सबसे आगे हैं। दिल्ली में 2025 के दौरान कुल कार रजिस्ट्रेशन में ईवी की हिस्सेदारी 6.7 प्रतिशत रही, जो एक साल पहले महज 0.3 प्रतिशत थी। चंडीगढ़ में यह आंकड़ा 6.5 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि कर्नाटक में ईवी की हिस्सेदारी 5.3 प्रतिशत रही, जो पिछले साल 1.5 प्रतिशत थी।

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Electric Car Charging - फोटो : Freepik
दक्षिणी राज्यों में भी मजबूत EV अपनाने का रुझान
ईवी अपनाने की दौड़ में आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु भी अहम योगदान दे रहे हैं। इन राज्यों में ईवी की हिस्सेदारी 4 से 5 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। खास तौर पर दिल्ली में आने वाले समय में ईवी अपनाने की रफ्तार और तेज हो सकती है। क्योंकि राज्य सरकार नई ईवी नीति के जरिए प्रोत्साहन बढ़ाने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाने की तैयारी में है।

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अलग-अलग राज्यों में अलग संक्रमण मार्ग
ये क्षेत्रीय अंतर साफ दिखाते हैं कि भारत में हरित मोबिलिटी की ओर बढ़त एक समान नहीं है। दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में, जहां चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर है और ड्राइविंग दूरी कम रहती है, वहां प्योर इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाया जा रहा है। वहीं, कर्नाटक जैसे राज्य उच्च आय और टेक-सेवी उपभोक्ताओं के दम पर ईवी ट्रांजिशन को आगे बढ़ा रहे हैं।

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Leapmotor C10 - फोटो : Stellantis
उत्तर भारत में हाइब्रिड को तरजीह
इसके उलट, बड़े उत्तरी राज्यों में हाइब्रिड वाहन ज्यादा लोकप्रिय हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में 2025 में बिकने वाली कुल कारों में हाइब्रिड कारों की हिस्सेदारी 3.6 प्रतिशत रही, जो एक साल पहले 2.1 प्रतिशत थी और राष्ट्रीय औसत 2.5 प्रतिशत से कहीं ज्यादा है। हरियाणा भी इस ट्रेंड में मजबूत नजर आया, जहां राष्ट्रीय हाइब्रिड बिक्री में उसकी हिस्सेदारी 8.2 प्रतिशत रही। तमिलनाडु भी 7.6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ इसी तरह का पैटर्न दिखाता है।

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ग्रीन ट्रांजिशन की रफ्तार है अलग!
कुल मिलाकर, 2025 भारत के ग्रीन मोबिलिटी सफर में एक अहम मोड़ साबित हुआ है, लेकिन यह सफर एक समान गति से आगे नहीं बढ़ रहा। शहरी इलाकों में ईवी को तेजी से अपनाने, बड़े उत्तरी राज्यों में हाइब्रिड को तहजीह और बाकी हिस्सों में धीरे-धीरे बढ़ती स्वीकार्यता यह दिखाती है कि भारत का ऑटो ट्रांजिशन तकनीक के साथ-साथ स्थानीय नीतियों और आर्थिक परिस्थितियों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

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