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NHAI: 'अगर ट्रैफिक जाम 12 घंटे तक रहे तो टोल क्यों दें?' टोल वसूली पर NHAI की याचिका पर SC का फैसला सुरक्षित

Mon, 18 Aug 2025 03:33 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Mon, 18 Aug 2025 03:33 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त, सोमवार को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की उस याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें केरल हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी।

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Twelve-Hour Jams Spark Supreme Court Reserves Verdict on Kerala Highway Row
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त, सोमवार को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की उस याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें केरल हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने त्रिशूर जिले के पालयेक्कारा टोल प्लाजा पर टोल वसूली को रोक दिया था। यह फैसला इसलिए लिया गया था क्योंकि एनएच 544 (एडप्पल्ली-मान्नुथी हाईवे) की हालत खराब थी और यहां लंबे समय से भारी ट्रैफिक जाम की समस्या बनी हुई है।
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"12 घंटे जाम में फंसे तो टोल क्यों भरें?"
चीफ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजनारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि जब लोगों को 12-12 घंटे तक जाम में फंसना पड़ रहा है तो उनसे टोल वसूलने का क्या औचित्य है। जस्टिस चंद्रन ने हाल ही की घटना का जिक्र किया, जहां एक ट्रक गड्ढे में फंसकर पलट गया था।

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एनएचएआई का पक्ष
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एनएचएआई की ओर से दलील दी कि जिन जगहों पर अंडरपास का काम चल रहा है, वहां वैकल्पिक रास्ते यानी सर्विस रोड बनाए गए हैं। लेकिन बारिश की वजह से काम प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि टोल को पूरी तरह रोकना अनुचित है, कोर्ट को चाहिए कि टोल में आनुपातिक कटौती का विकल्प अपनाए। हालांकि, बेंच ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि 65 किलोमीटर का सफर, जिसके लिए 150 रुपये टोल लिया जाता है, अगर 12 घंटे में तय हो रहा है तो यह बिल्कुल भी उचित नहीं है।

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टोल कंपनी की दलील
गुरुवायूर इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, जो यहां टोल वसूल रही है, ने भी हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी। कंपनी की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दिवान ने कहा कि उनके जिम्मे जो 60 किलोमीटर का हिस्सा है, उसकी देखभाल ठीक से की जा रही है। असली समस्या उन जगहों पर है जहां एनएचएआई ने काम किसी तीसरी कंपनी (पीएसजी इंजीनियरिंग) को सौंपा है। अप्रैल 2024 से ये कंपनी काम देख रही है। दिवान ने दावा किया कि टोल वसूली बंद होने से उन्हें पहले ही 5-6 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।

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हाईकोर्ट का फैसला और आगे की राह
हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को चार हफ्तों के लिए टोल वसूली रोक दी थी। कोर्ट ने कहा था कि जब सड़कें खराब हों और ट्रैफिक सुचारु न हो तो जनता से टोल वसूला नहीं जा सकता। यह जनता और एनएचएआई के बीच भरोसे का रिश्ता है, जिसे तोड़ा नहीं जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि मानसून की वजह से मुश्किलें बढ़ी हैं। फिलहाल कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है और जल्द ही यह तय करेगा कि पालयेक्कारा टोल प्लाजा पर वसूली दोबारा शुरू होगी या नहीं। 

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