महंगी पड़ रही कच्ची सामग्री से बढ़ा दबाव: क्या टाटा मोटर्स कारों की कीमतें फिर बढ़ाने पर कर रही विचार?
कच्चे माल की बढ़ती लागत और मार्जिन पर पड़ रहे दबाव के बीच टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स अपनी कारों की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है। जानें कंपनी के एमडी ने क्या कहा।
विस्तार
कच्ची सामग्री की बढ़ती लागत के बीच टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (Tata Motors Passenger Vehicles) अपनी कारों की कीमतों में एक और बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। कंपनी के प्रबंध निदेशक शैलेश चंद्र ने कहा कि लागत बढ़ने का एक बड़ा हिस्सा अभी भी कंपनी खुद वहन कर रही है। हालांकि, भविष्य में कीमतों में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ने पर इसे एक साथ लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। ताकि ग्राहकों की मांग पर अचानक असर न पड़े।
कंपनी सितंबर में पहले ही एक बार कीमतें बढ़ा चुकी है। इसके बावजूद बढ़ती इनपुट लागत का असर पूरी तरह ग्राहकों पर नहीं डाला गया है। शैलेश चंद्र के मुताबिक, कंपनी हर महीने स्थिति की समीक्षा कर रही है और साथ ही लागत कम करने के प्रयास भी तेज कर रही है।
टाटा मोटर्स कारों की कीमतों में फिर बढ़ोतरी कब हो सकती है?
शैलेश चंद्र ने पीटीआई से कहा कि कच्ची सामग्री की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा अभी भी टाटा मोटर्स खुद वहन कर रही है। कंपनी लागत कम करने की दिशा में भी काम कर रही है और हर महीने यह समीक्षा करती है कि कीमतों में अगली बढ़ोतरी के लिए सही समय और गुंजाइश कब बनती है।
उन्होंने कहा कि कंपनी ने सितंबर में पहले ही कीमत बढ़ाई है, इसलिए अगली बढ़ोतरी के समय के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
अगर आगे कीमत बढ़ाने का फैसला लिया जाता है, तो कंपनी इसे छोटे-छोटे चरणों में लागू करेगी। चंद्र के मुताबिक, इसका उद्देश्य एकमुश्त बड़ी बढ़ोतरी से बचना और मांग पर अचानक पड़ने वाले असर को कम करना है।
कच्ची सामग्री की बढ़ती कीमतों से टाटा मोटर्स पर कितना दबाव है?
शैलेश चंद्र के अनुसार, जीएसटी लागू होने के बाद अब तक वाहन निर्माताओं ने कीमतों में 5 प्रतिशत से कम की बढ़ोतरी की है। इस दौरान कच्ची सामग्री की लागत में बढ़ोतरी ने कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी के बाद वाहन निर्माता चाहें तो कीमतों में ज्यादा आक्रामक बढ़ोतरी कर सकते थे, लेकिन बाजार में छूट भी जारी रही। अब मांग की तुलना में आपूर्ति थोड़ी कम रहने के कारण छूट में कमी आना शुरू हो गई है।
चंद्र ने कहा कि वाहन निर्माताओं के लिए बड़ी चुनौती यह है कि कच्ची सामग्री की लागत जिस गति से बढ़ रही है, उसी रफ्तार से वाहन की कीमतें बढ़ाना संभव नहीं है। इससे लागत और बिक्री कीमत के बीच अंतर बढ़ता है और मुनाफे पर दबाव पड़ता है।
क्या टाटा मोटर्स अगली कीमत बढ़ोतरी धीरे-धीरे लागू करेगी?
कंपनी का कहना है कि अगर भविष्य में कीमतों में और बढ़ोतरी की जाती है तो इसे धीरे-धीरे और छोटे चरणों में लागू किया जाएगा। टाटा मोटर्स का मानना है कि एक साथ बड़ी कीमत बढ़ाने के बजाय समय के साथ छोटी बढ़ोतरी करने से बाजार की मांग पर तत्काल असर को सीमित किया जा सकता है।
वहीं, कच्ची सामग्री की कीमतें आगे किस दिशा में जाएंगी, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि, चंद्र ने कहा कि फिलहाल उत्पादन या आपूर्ति के मोर्चे पर कोई बड़ा खतरा नजर नहीं आ रहा है।
टाटा मोटर्स ने सितंबर में कौन-सी कीमत बढ़ाई थी?
टाटा मोटर्स ने सितंबर में यात्री वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। इसके अलावा कंपनी ने इस महीने की शुरुआत में अपने पूरे वाणिज्यिक वाहन पोर्टफोलियो की कीमतों में 1 अक्तूबर से 1 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी।
यात्री वाहनों की कीमतों को लेकर अगली बढ़ोतरी का समय अभी तय नहीं किया गया है और कंपनी स्थिति की मासिक समीक्षा कर रही है।
टाटा मोटर्स को कॉम्पैक्ट सेडान से कितनी उम्मीदें हैं?
कीमतों को लेकर यह टिप्पणी टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स द्वारा शुक्रवार को नई Tata Aeris (टाट एरीस) लॉन्च किए जाने के दौरान आई। कंपनी ने पेट्रोल संस्करण की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 5.29 लाख रुपये और iCNG संस्करण की कीमत 6.29 लाख रुपये रखी है।
कंपनी ने इस कॉम्पैक्ट सेडान को खासतौर पर निजी ग्राहकों के लिए विकसित किया है। इसे फ्लीट बाजार को ध्यान में रखकर तैयार नहीं किया गया है।
शैलेश चंद्र ने कहा कि व्यापक सेडान बाजार में कॉम्पैक्ट सेडान की हिस्सेदारी भले ही कम हो रही हो, लेकिन इस श्रेणी की कुल बिक्री बढ़ रही है। उनके मुताबिक, पिछले एक साल में कॉम्पैक्ट सेडान खंड में करीब 25-26 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी का भी इस श्रेणी पर असर पड़ा है और ऐसे ग्राहकों का एक स्पष्ट वर्ग मौजूद है जो कॉम्पैक्ट सेडान खरीदना चाहता है।