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पीएम ई-ड्राइव योजना का बड़ा असर: जानें भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी कितनी हुई?

Fri, 25 Sep 2026 10:04 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Fri, 25 Sep 2026 10:04 PM IST
सार

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विस्तार अब केवल निजी वाहनों तक सीमित नहीं रह गया है। इलेक्ट्रिक दोपहिया और तीनपहिया वाहनों के साथ बसों, ट्रकों, चार्जिंग ढांचे और वाहन परीक्षण सुविधाओं में भी तेजी से विस्तार हो रहा है। सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना इस बदलाव को गति देने वाली प्रमुख योजनाओं में शामिल है।

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PM E-DRIVE Scheme Success: e-2W Market Share Nears 10%, e-3W L5 Crosses 46% Penetration
PM E-Drive Scheme - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। दोपहिया, तीन-पहिया, बस और वाणिज्यिक वाहनों के सेगमेंट में ईवी की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार की PM E-DRIVE (पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एनहांसमेंट) (पीएम ई-ड्राइव) योजना इस बदलाव को गति देने में मुख्य भूमिका निभा रही है।

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इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (ICAT), मानेसर के 20 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित "PM E-DRIVE: डायलॉग विद द इंडस्ट्री" कार्यक्रम में IFCI लिमिटेड के चीफ जनरल मैनेजर सुनीत शुक्ला द्वारा योजना के ताजा प्रगति आंकड़े पेश किए गए। यह रिपोर्ट ईवी बिक्री, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और टेस्टिंग सुविधाओं में हुई प्रगति का विस्तृत ब्योरा देती है।

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इलेक्ट्रिक दोपहिया (e-2W) और तीन-पहिया (e-3W) वाहनों की बाजार हिस्सेदारी में कितनी तेजी आई है?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दोपहिया और तीन-पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के अपनाने में भारी वृद्धि देखी गई है:
  • इलेक्ट्रिक दोपहिया (e-2W): e-2W की बाजार हिस्सेदारी FY2021-22 में 1.9% थी, जो FY2025-26 में बढ़कर 6.6% हो गई। FY2026-27 के शुरुआती 5 महीनों (अप्रैल से अगस्त) में यह आंकड़ा 9.9% (लगभग 10%) तक पहुंच गया है।
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  • बढ़ा हुआ लक्ष्य और आवंटन: भारी सफलता को देखते हुए e-2W के लक्ष्य को 24.8 लाख से बढ़ाकर 45.8 लाख वाहन कर दिया गया है। इस सेगमेंट के लिए ₹2,767 करोड़ का आवंटन किया गया है और योजना को 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है। वाहन (Vahan) पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 19 सितंबर 2026 तक योजना के तहत 25 लाख से अधिक e-2W की बिक्री दर्ज हो चुकी है।
  • इलेक्ट्रिक तीन-पहिया (L5 e-3W): L5 कैटेगरी के तीन-पहिया वाहनों में सबसे तीव्र उछाल आया है। इसकी पैठ FY2021-22 के 4.7% से बढ़कर अप्रैल-अगस्त 2026 में 46.1% पर पहुंच गई है। 2.89 लाख वाहनों का लक्ष्य समय से पहले पूरा होने के कारण L5 सेगमेंट का इंसेंटिव घटक 26 दिसंबर 2025 को ही बंद कर दिया गया था।

 

सार्वजनिक परिवहन (e-Buses) और कमर्शियल e-Trucks को लेकर क्या योजनाएं हैं?

योजना के तहत सार्वजनिक परिवहन और माल ढुलाई के लिए क्लीन फ्यूल को प्राथमिकता दी जा रही है:
  • इलेक्ट्रिक बसें: PM E-DRIVE योजना के तहत 14,028 ई-बसों के लिए ₹4,391 करोड़ आरक्षित किए गए हैं। बेंगलुरु (4,500), दिल्ली (2,800), हैदराबाद (2,200), मुंबई (1,500), अहमदाबाद (1,200), पुणे (1,000) और सूरत (600) समेत प्रमुख शहरों में 13,800 बसों के टेंडर पूरे हो चुके हैं।
  • इलेक्ट्रिक ट्रक्स (e-Trucks): वाणिज्यिक वाहनों के लिए ₹500 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिसका लक्ष्य 5,600 से अधिक e-ट्रकों को सहायता देना है। इसके तहत N2 और N3 श्रेणी के ट्रकों को शामिल किया गया है (अधिकतम एक्स-फैक्ट्री कीमत ₹1.25 करोड़)। टाटा मोटर्स और आईपीएल टेक जैसे निर्माताओं के ट्रकों को पहले ही PM E-DRIVE सर्टिफिकेशन मिल चुका है।

 

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और टेस्टिंग सुविधाओं के अपग्रेडेशन पर कितना खर्च किया जा रहा है?

ईवी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए सरकार चार्जिंग नेटवर्क और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही है:
  • ₹2,000 करोड़ का चार्जिंग फंड: सार्वजनिक ईवी चार्जिंग नेटवर्क के लिए ₹2,000 करोड़ का आवंटन किया गया है। इसमें से ₹729.34 करोड़ की लागत से 7,254 चार्जर्स को मंजूरी दी जा चुकी है। इसमें कर्नाटक (1,571), दिल्ली (1,146) और राजस्थान (805) के अलावा HPCL, BPCL और IOCL जैसी तेल कंपनियां शामिल हैं।
  • ₹776.29 करोड़ से टेस्टिंग सेंटरों का आधुनिकीकरण: ARAI पुणे, ICAT मानेसर, GARC चेन्नई और NATRAX इंदौर को आधुनिक बनाने के लिए ₹776.29 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। इसमें फोर-व्हीलर चेसिस डायनेमोमीटर, एडवांस्ड बैटरी सेल साइकलर्स और EMI/EMC टेस्टिंग लैब जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं।

 

ओवरऑल पीएम ई-ड्राइव योजना का बजट और दृष्टिकोण क्या है?

शुरुआत में PM E-DRIVE योजना ₹10,900 करोड़ के परिव्यय के साथ स्वीकृत की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर ₹11,900 करोड़ कर दिया गया। यह योजना केवल अग्रिम वाहन छूट देने तक सीमित नहीं है। बल्कि सार्वजनिक परिवहन, वाणिज्यिक वाहनों, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड टेस्टिंग सुविधाओं को एक साथ जोड़कर भारत में एक स्थायी और आत्मनिर्भर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम तैयार कर रही है।
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