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Chinese Cars: 2030 तक बिकने वाली हर तीन कारों में से एक चीनी ब्रांड की होगी, अध्ययन में खुलासा

Tue, 02 Jul 2024 10:50 AM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 02 Jul 2024 10:50 AM IST
सार

चीनी वाहन कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं और इसकी संभावना है कि यह जल्द ही एक वैश्विक दौड़ में बदल जाएगी। अमेरिका स्थित एक वित्तीय सलाहकार और वैश्विक परामर्श फर्म ने भविष्यवाणी की है कि 2030 तक वैश्विक बाजार में बिकने वाली हर तीन नई कारों में से एक कार चीनी निर्माता की होगी। 

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One in every three new cars sold in global markets by 2030 to be from Chinese manufacturer predicts study
Electric car - फोटो : Freepik

विस्तार

चीनी वाहन कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं और इसकी संभावना है कि यह जल्द ही एक वैश्विक दौड़ में बदल जाएगी। एलिक्सपार्टनर्स द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, चीनी कार कंपनियां न सिर्फ घरेलू बाजार में अपना दबदबा बढ़ाने के लिए तैयार हैं। बल्कि 2030 तक वैश्विक बिक्री का एक बड़ा हिस्सा भी हथिया लेंगी।
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अमेरिका स्थित एक वित्तीय सलाहकार और वैश्विक परामर्श फर्म एलिक्सपार्टनर्स ने भविष्यवाणी की है कि 2030 तक वैश्विक बाजार में बिकने वाली हर तीन नई कारों में से एक कार चीनी निर्माता की होगी। यह आगे भविष्यवाणी करता है कि चीनी वाहन कंपनियां इस दशक के आखिर तक वैश्विक बाजार हिस्सेदारी को मौजूदा 21 प्रतिशत से बढ़ाकर 31 प्रतिशत कर लेंगी।

यह बताया गया है कि यह चीनी निर्माताओं द्वारा विदेशी बाजारों में विस्तार और चीन के भीतर पश्चिमी ब्रांडों को हटाने दोनों के कारण होगा। गौरतलब है कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा वाहन बाजार है।
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गैर-चीनी वाहन कंपनियों के लिए चिंता का विषय हो सकता है कि एलिक्सपार्टनर्स के अध्ययन में आगे भविष्यवाणी की गई है कि चीन के बाहर चीनी कंपनियों की बिक्री तेजी से बढ़ेगी। जो 2024 में अनुमानित तीन मिलियन (30 लाख) से बढ़कर 2030 तक नौ मिलियन (90 लाख) हो जाएगी।
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इस समय, चीनी निर्माताओं की बाजार हिस्सेदारी चीन के भीतर 59 प्रतिशत, रूस में 33 प्रतिशत, यूरोप में छह प्रतिशत, उत्तरी अमेरिका में एक प्रतिशत, मध्य और दक्षिण अमेरिका में सात प्रतिशत और मध्य-पूर्व और अफ्रीका क्षेत्र में आठ प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी है। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में बाजार हिस्सेदारी इस समय तीन प्रतिशत है और 2030 तक बढ़कर 31 प्रतिशत होने का अनुमान है।

चीन का तरीका- अतीत की बाधाओं को पार करना
यूरोप में चीन में निर्मित ईवी पर हालिया टैरिफ और अमेरिकी सरकार द्वारा चीनी कारों पर आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला ये चीनी कंपनियों के लिए रुकावटें हैं। लेकिन एलिक्सपार्टनर्स के अध्ययन में कहा गया है कि हालांकि उत्तरी अमेरिका और जापान में एंट्री करना चुनौतीपूर्ण बने रहने की संभावना है।

लेकिन चीनी कंपनियां अन्य जगहों पर फायदा हासिल करने की कोशिश करेंगी। यह कहा गया है कि टैरिफ से संबंधित मुद्दों के बावजूद यूरोप में हिस्सेदारी 12 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी। जबकि रूस, मध्य-पूर्व और अफ्रीका और दक्षिण और दक्षिण-पूर्व के बाजार फायदेमंद साबित होंगे।

फायदे से समझौता नहीं!
चीनी वाहन निर्माताओं की मदद करने वाले कारकों में चीन के भीतर मैन्युफेक्चरिंग कॉस्ट (विनिर्माण लागत) कम होना है। साथ ही, अब भरोसेमंद और फीचर्स से भरपूर मॉडल पेश करने पर ध्यान देना शामिल है। एलिक्सपार्टनर्स के एंड्रयू बर्गबाम का कहना है कि "चीनी ब्रांड उन फीचर्स पर ज्यादा जोर देते हैं जिनका ग्राहक वास्तव में अनुभव कर सकते हैं। जैसे कि डिजाइन और इन-केबिन तकनीक। इतनी ही नहीं वे विदेशों में कारखाने बनाते समय भी अपनी लागत लाभ को बनाए रखने पर निर्दयता से ध्यान केंद्रित करते हैं।"
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