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NHAI: एनएचएआई ने टोल कलेक्शन का खर्च 2,062 करोड़ रुपये घटाया, टोल प्लाजा संचालन में बढ़ी दक्षता
Thu, 30 Oct 2025 07:43 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 30 Oct 2025 07:43 PM IST
सार
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने वित्त वर्ष 2024-25 में टोल वसूली पर होने वाला खर्च 2,062 करोड़ रुपये तक घटा दिया है।
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Toll Plaza
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने वित्त वर्ष 2024-25 में टोल वसूली पर होने वाला खर्च 2,062 करोड़ रुपये तक घटा दिया है। यह खर्च 2023-24 में 4,736 करोड़ रुपये था, जो अब घटकर 2,674 करोड़ रुपये रह गया। यानी खर्च में करीब 56 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
खर्च में भारी गिरावट का कारण
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, टोल कलेक्शन का खर्च अब 17.27 प्रतिशत से घटकर 9.27 प्रतिशत रह गया है। "टोल कलेक्शन कॉस्ट" का मतलब होता है- वो अंतर जो निजी एजेंसियों द्वारा वसूले गए टोल और एनएचएआई को भेजी गई रकम के बीच होता है।
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खर्च में भारी गिरावट का कारण
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, टोल कलेक्शन का खर्च अब 17.27 प्रतिशत से घटकर 9.27 प्रतिशत रह गया है। "टोल कलेक्शन कॉस्ट" का मतलब होता है- वो अंतर जो निजी एजेंसियों द्वारा वसूले गए टोल और एनएचएआई को भेजी गई रकम के बीच होता है।
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टोल वसूली और एनएचएआई की आमदनी
वित्त वर्ष 2024-25 में टोल एजेंसियों ने कुल 28,823 करोड़ रुपये वसूले, जिनमें से 26,149 करोड़ रुपये एनएचएआई को भेजे गए। इसके मुकाबले 2023-24 में कुल वसूली 27,417 करोड़ रुपये थी, जिनमें से एनएचएआई को 22,681 करोड़ रुपये ही मिले थे।
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वित्त वर्ष 2024-25 में टोल एजेंसियों ने कुल 28,823 करोड़ रुपये वसूले, जिनमें से 26,149 करोड़ रुपये एनएचएआई को भेजे गए। इसके मुकाबले 2023-24 में कुल वसूली 27,417 करोड़ रुपये थी, जिनमें से एनएचएआई को 22,681 करोड़ रुपये ही मिले थे।
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कैसे हुई इतनी बड़ी बचत
अधिकारियों ने बताया कि ये बचत एनएचएआई द्वारा किए गए प्रशासनिक और अनुबंध सुधारों की वजह से हुई है। एनएचएआई ने कॉन्ट्रैक्ट की सख्त मॉनिटरिंग शुरू की, पहले की "तीन महीने की ऑटो एक्सटेंशन" नीति खत्म की। और अब ज्यादातर कॉन्ट्रैक्ट एक साल की अवधि के लिए दिए जा रहे हैं। इससे टेंडर प्रक्रिया समय पर पूरी हो रही है और पारदर्शिता भी बढ़ी है।
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अधिकारियों ने बताया कि ये बचत एनएचएआई द्वारा किए गए प्रशासनिक और अनुबंध सुधारों की वजह से हुई है। एनएचएआई ने कॉन्ट्रैक्ट की सख्त मॉनिटरिंग शुरू की, पहले की "तीन महीने की ऑटो एक्सटेंशन" नीति खत्म की। और अब ज्यादातर कॉन्ट्रैक्ट एक साल की अवधि के लिए दिए जा रहे हैं। इससे टेंडर प्रक्रिया समय पर पूरी हो रही है और पारदर्शिता भी बढ़ी है।
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कॉन्ट्रैक्टरों के लिए नई गाइडलाइंस
एनएचएआई ने अल्पकालिक कॉन्ट्रैक्ट्स को कम किया है और ठेकेदारों द्वारा बार-बार समय से पहले कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगाई है। अब एक वित्त वर्ष में किसी ठेकेदार को अधिकतम तीन बार ही ऐसी अनुमति दी जा सकती है।
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एनएचएआई ने अल्पकालिक कॉन्ट्रैक्ट्स को कम किया है और ठेकेदारों द्वारा बार-बार समय से पहले कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगाई है। अब एक वित्त वर्ष में किसी ठेकेदार को अधिकतम तीन बार ही ऐसी अनुमति दी जा सकती है।
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बोली प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा
टोल ऑपरेटर्स का भरोसा बनाए रखने के लिए एनएचएआई लगातार ऑल इंडिया यूजर फी कलेक्शन फेडरेशन के साथ संवाद कर रही है। इसके तहत बैंक गारंटी और परफॉर्मेंस सिक्योरिटी समय पर जारी की जा रही हैं, जिससे टेंडर प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।
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अनियमितता पर रोक
टोल से अत्यधिक मुनाफा कमाने से रोकने के लिए एनएचएआई ने एक नया "विंडफॉल गेन" नियम लागू किया है। इसके तहत अगर किसी टोल प्लाजा की 15 दिनों की औसत वसूली एनएचएआई को दी जाने वाली रकम से 40 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ जाती है। तो एनएचएआई उस कॉन्ट्रैक्ट को तुरंत समाप्त कर सकती है।
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