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थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ने की तैयारी: साल के अंत तक बदल सकती हैं दरें, कितने वाहन मालिकों पर असर?

Wed, 02 Sep 2026 11:51 AM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति शुक्ला Updated Wed, 02 Sep 2026 11:51 AM IST
सार

मोटर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस: ईंधन की कीमतों के बीच अब वाहन मालिकों को एक और झटका लग सकता है। बीमा नियामक आईआरडीएआई इस साल के अंत तक मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम की नई दरों को अधिसूचित कर सकता है। दुर्घटना दावों और अदालती लागत में तेज इजाफे की वजह से बीमा कंपनियों पर भारी क्लेम का दबाव है, जिसके चलते 2022 के बाद पहली बार दरों में संशोधन की तैयारी है। 
 

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Motor third-party insurance premiums rise towards end year; how many vehicle owners affected by this?
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

ईंधन की कीमतों के दबाव के बीच वाहन मालिकों को अब गाड़ियों के थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम में बढ़ोतरी का भी सामना करना पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार, मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम की दरों की समीक्षा की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। नई दरें इस साल के अंत तक अधिसूचित की जा सकती हैं। इससे पहले वर्ष 2022 में थर्ड-पार्टी बीमा दरों में बदलाव किया गया था। अब बीमा कंपनियां लंबे समय से बीमा नियामक आईआरडीएआई से प्रीमियम बढ़ाने की मांग कर रही हैं।

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कितने वाहन मालिकों पर पड़ सकता है असर?
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम में बदलाव का सीधा असर बड़ी संख्या में वाहन मालिकों, करीब 24.77 करोड़ पर पड़ सकता है, इसलिए अगर नई दरों में बढ़ोतरी होती है तो इसका असर बड़े स्तर पर दिखाई दे सकता है।
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हालांकि, दरों में बदलाव का उद्देश्य ऐसा संतुलन बनाना है जिससे बीमा कंपनियों के बढ़ते खर्च और क्लेम के दबाव को संभाला जा सके, लेकिन वाहन मालिकों पर अतिरिक्त बोझ भी बहुत ज्यादा न पड़े।
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बीमा कंपनियां लंबे समय से कर रही हैं प्रीमियम बढ़ाने की मांग

  • बीमा कंपनियों का भी कहना है कि मौजूदा दरों पर मोटर इंश्योरेंस कारोबार में बढ़ते क्लेम खर्च को संभालना मुश्किल हो रहा है। इसी वजह से कंपनियां लंबे समय से आईआरडीएआई के सामने प्रीमियम बढ़ाने की मांग रख रही हैं।
  • अब मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम की दरों की समीक्षा की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचने की बात सामने आई है। ऐसे में इस साल के अंत तक नई दरें अधिसूचित होने की संभावना है।


क्लेम के बढ़ते दबाव से कंपनियों की परेशानी बढ़ी

  • प्रीमियम बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह बीमा कंपनियों पर बढ़ता अंडरराइटिंग लॉस है। एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के मोटर इंश्योरेंस बाजार में अंडरराइटिंग लॉस की स्थिति तब बनती है, जब कंपनियों को कुल प्रीमियम से होने वाली कमाई की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े दावों और कानूनी देनदारियों के निपटारे में ज्यादा राशि खर्च करनी पड़ती है।
  • पिछले कई वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं से जुड़ी क्षतिपूर्ति, अदालती लागत और क्लेम की औसत राशि में तेज बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते बीमा कंपनियों को पुरानी प्रीमियम दरों पर लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है।


क्यों बढ़ सकती हैं थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की दरें?

  • देखिए थर्ड-पार्टी बीमा में बीमा कंपनी वाहन मालिक की गलती से किसी तीसरे व्यक्ति को हुए नुकसान या चोट से जुड़ी कानूनी देनदारी को कवर करती है। सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में मुआवजे की राशि और कानूनी लागत बढ़ने से बीमा कंपनियों का खर्च भी बढ़ा है।
  • यही वजह है कि कंपनियां मौजूदा प्रीमियम दरों की समीक्षा और उनमें बदलाव की मांग कर रही हैं। हालांकि नई दरें तय करते समय कोशिश यह होगी कि बीमा कंपनियों के बढ़ते क्लेम खर्च को ध्यान में रखा जाए और वाहन मालिकों पर भी बहुत अधिक वित्तीय बोझ न पड़े।


इससे पहले कब हुआ था बदलाव?
इससे पहले मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की दरों में 2022 में बदलाव किया गया था। अब नई समीक्षा के बाद अगर प्रीमियम में बढ़ोतरी होती है, तो कार और दोपहिया समेत कई तरह के वाहनों के मालिकों को पहले की तुलना में ज्यादा प्रीमियम देना पड़ सकता है। हालांकि, नई दरों का अंतिम स्वरूप और अलग-अलग श्रेणियों के वाहनों के लिए कितना बदलाव होगा, यह नई दरें अधिसूचित होने के बाद ही स्पष्ट होगा।



वाहन मालिकों के लिए क्या बदलेगा?
अगर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस का प्रीमियम बढ़ता है तो वाहन मालिकों की सालाना बीमा लागत बढ़ सकती है। इसका असर कारों के साथ-साथ दोपहिया वाहनों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल दरों की समीक्षा अंतिम चरण में होने की बात सामने आई है। ऐसे में वाहन मालिकों को साल के अंत तक नई दरों का इंतजार करना होगा। नई दरें लागू होने के बाद ही यह साफ होगा कि अलग-अलग वाहन श्रेणियों के लिए प्रीमियम में कितना बदलाव किया गया है।

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