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Car Features: भारतीय कार खरीदारों की पहली पसंद बन गई है ये फीचर, नई रिपोर्ट में हुआ खुलासा
Fri, 11 Apr 2025 09:15 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 11 Apr 2025 09:15 PM IST
सार
जैसे-जैसे पूरे देश में तापमान चढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे कार खरीदने वालों की प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं। सर्वे में यह भी सामने आया कि अब लोग एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) और सेफ्टी फीचर्स पर भी लोगों का नजरिया बदला है।
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Automobiles
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
जैसे-जैसे पूरे देश में तापमान चढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे कार खरीदने वालों की प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं। एक ताजा सर्वे में ये बात सामने आई है कि अब लोग कार में सनरूफ नहीं, बल्कि वेंटिलेटेड सीट्स को सबसे जरूरी फीचर मानने लगे हैं। पार्क+ रिसर्च लैब्स के एक सर्वे के मुताबिक, 78 प्रतिशत कार मालिकों ने वेंटिलेटेड सीट्स को अपनी सबसे बड़ी जरूरत बताया है।
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देशभर से मिले दिलचस्प आंकड़े
पार्क+ का ये पैन-इंडिया सर्वे 6,000 कार मालिकों के अनुभवों पर आधारित था। सर्वे में पाया गया कि तेज गर्मी के चलते लोगों को अब कार के अंदर ठंडक बनाए रखने वाले फीचर्स की ज्यादा जरूरत महसूस हो रही है। पहले जहां वेंटिलेटेड सीट्स सिर्फ महंगी कारों में मिलती थीं। वहीं अब ह्यूंदै, किआ, एमजी, फॉक्सवैगन जैसी कंपनियां इसे मिड-रेंज कारों में भी देने लगी हैं।
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पार्क+ का ये पैन-इंडिया सर्वे 6,000 कार मालिकों के अनुभवों पर आधारित था। सर्वे में पाया गया कि तेज गर्मी के चलते लोगों को अब कार के अंदर ठंडक बनाए रखने वाले फीचर्स की ज्यादा जरूरत महसूस हो रही है। पहले जहां वेंटिलेटेड सीट्स सिर्फ महंगी कारों में मिलती थीं। वहीं अब ह्यूंदै, किआ, एमजी, फॉक्सवैगन जैसी कंपनियां इसे मिड-रेंज कारों में भी देने लगी हैं।
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सनरूफ का क्रेज अब हुआ पुराना
एक समय था जब सनरूफ को स्टाइल और लग्जरी का सिंबल माना जाता था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। इस सर्वे में सिर्फ 11 प्रतिशत लोगों ने सनरूफ को जरूरी फीचर माना। ज्यादातर लोगों ने बताया कि बारिश में लीक होना, मेंटेनेंस की दिक्कत और प्रैक्टिकल इस्तेमाल न होना जैसे कारणों से अब ये फीचर उतना काम का नहीं लगता। हां, कुछ लोगों के लिए ये अभी भी एक 'ड्रीम फीचर' है। लेकिन जरूरत की लिस्ट में अब यह ऊपर नहीं है।
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एक समय था जब सनरूफ को स्टाइल और लग्जरी का सिंबल माना जाता था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। इस सर्वे में सिर्फ 11 प्रतिशत लोगों ने सनरूफ को जरूरी फीचर माना। ज्यादातर लोगों ने बताया कि बारिश में लीक होना, मेंटेनेंस की दिक्कत और प्रैक्टिकल इस्तेमाल न होना जैसे कारणों से अब ये फीचर उतना काम का नहीं लगता। हां, कुछ लोगों के लिए ये अभी भी एक 'ड्रीम फीचर' है। लेकिन जरूरत की लिस्ट में अब यह ऊपर नहीं है।
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ADAS और सेफ्टी फीचर्स पर भी बदला नजरिया
सर्वे में यह भी सामने आया कि अब लोग एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) और बाकी सेफ्टी फीचर्स को 'ऐड-ऑन' नहीं बल्कि 'बेसिक एक्सपेक्टेशन' की तरह देखने लगे हैं। सिर्फ 8 प्रतिशत लोगों ने इन्हें 'जरूरी फीचर' बताया। विश्लेषकों का मानना है कि यह उपभोक्ताओं के बीच बदलती मानसिकता की ओर इशारा कर सकता है।
लोग अब मानकर चल रहे हैं कि नई कारों में सेफ्टी फीचर्स स्टैंडर्ड होंगे, इसलिए उन्हें अलग से 'फीचर' के तौर पर नहीं देखा जा रहा। यह स्टैंडर्ड सेफ्टी पैकेजों के लिए वाहन निर्माताओं की प्रतिबद्धता में बढ़ते विश्वास को भी दर्शाता है।
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सर्वे में यह भी सामने आया कि अब लोग एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) और बाकी सेफ्टी फीचर्स को 'ऐड-ऑन' नहीं बल्कि 'बेसिक एक्सपेक्टेशन' की तरह देखने लगे हैं। सिर्फ 8 प्रतिशत लोगों ने इन्हें 'जरूरी फीचर' बताया। विश्लेषकों का मानना है कि यह उपभोक्ताओं के बीच बदलती मानसिकता की ओर इशारा कर सकता है।
लोग अब मानकर चल रहे हैं कि नई कारों में सेफ्टी फीचर्स स्टैंडर्ड होंगे, इसलिए उन्हें अलग से 'फीचर' के तौर पर नहीं देखा जा रहा। यह स्टैंडर्ड सेफ्टी पैकेजों के लिए वाहन निर्माताओं की प्रतिबद्धता में बढ़ते विश्वास को भी दर्शाता है।
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बड़ी स्क्रीन का क्रेज भी घटा
जहां हाल की कई कार लॉन्च में बड़ी-बड़ी इंफोटेनमेंट स्क्रीन को हाईलाइट किया गया। वहीं इस सर्वे में पता चला कि सिर्फ 3 प्रतिशत लोग ही इसे जरूरी मानते हैं। इससे साफ है कि अब भारतीय ग्राहक स्टाइल से ज्यादा फंक्शनल कम्फर्ट पर ध्यान दे रहे हैं।
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